Buland kesari/जालंधर : जिले में स्वास्थ्य सुरक्षा और लोगों को गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई निर्णायक मुकाम पर पहुंच गई, जिसके तहत एडीशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल)-कम-एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट अमनिंदर कौर की अदालत ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम (फूड सेफ्टी एक्ट) के तहत दर्ज 2 मामलों में दोषी पाए गए मॉडल टाउन स्थित मशहूर रेस्टोरेंट “सनी साइड अप” पर 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह जुर्माना 10-10 हजार रुपए को दो अलग-अलग धाराओं के तहत लगाया है।
उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग की फूड सेफ्टी टीम ने 10 अक्तूबर 2024 को मॉडल टाऊन स्थित इस रैस्टोरेंट की सघन जांच की थी। जांच के दौरान टीम ने रैस्टोरैंट से पनीर और क्यूलिनरी सॉस के सैंपल लिए थे। ये दोनों सैंपल फूड सेफ्टी लैब में परीक्षण के लिए भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट आने के बाद पाया गया कि दोनों सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद विभाग ने फूड सेफ्टी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया।
फूड सेफ्टी टीम की ओर से दर्ज केस की सुनवाई करते हुए एडीशनल डिप्टी कमिश्नर अमनिंदर कौर की अदालत ने गत 24 सितम्बर को फैसला सुनाया। अदालत ने रैस्टोरैंट को दोषी मानते हुए दो अलग-अलग मामलों में 10-10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। इस तरह कुल 20 हजार रुपए का आर्थिक दंड सुनिश्चित किया गया।
जिक्रयोग्य है कि मामला ए.डी.एम. कोर्ट में आने के बाद फर्म के मालिक और हैड शेफ को दो से तीन बार सम्मन जारी किए गए, जिनमें से एक सम्मन तामील हो गया था। इसके बावजूद ‘सनी साइड अप’ की ओर से न तो कोई प्रतिनिधि और न ही कोई वकील अदालत में पेश हुआ। इसी को देखते हुए तत्कालीन ए.डी.एम. कम ए.डी.सी. विवेक कुमार मोदी ने मई 2025 को फर्म के मालिक और हेड शेफ के खिलाफ पुलिस विभाग के मार्फत सम्मन जारी करने के आदेश दिए हैं। जिस उपरांत जुलाई महीने में फर्म के प्रतिनिधि कोर्ट में पेश तो हो गए परंतु 2-3 तारीखों पर आने के बाद फिर से गैरहाजिर होते रहे, जिसको देखते हुए ए.डी.एम. ने केस का फैसला सुना दिया।
वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार कई बार नामी और प्रतिष्ठित रैस्टोरेंट भी गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करते हैं। इस मामले ने यह साबित कर दिया कि विभाग की जांचें केवल छोटे ढाबों या गली-मोहल्लों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े नाम भी इसकी जद में आ सकते हैं।
सैंपलों में क्या-क्या गड़बड़ियां पाई गईं?
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, क्यूलिनरी सॉस में 1 प्रतिशत एसिडिटी लेवल होना चाहिए था, लेकिन जांच में मात्र 0.03 प्रतिशत पाई गई। यह मानक से बहुत नीचे था। जबकि पनीर में 71.24 प्रतिशत मॉइस्चर लेवल निर्धारित है, जबकि जांच में केवल 60 प्रतिशत ही पाया गया।
जिला प्रशासन की चेतावनी
वहीं एडीशनल डिप्टी कमिश्नर अमनिंदर कौर ने स्पष्ट कहा कि जिले में खाद्य सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने बताया कि इस तरह के मामलों पर रोजाना निगरानी रखी जा रही है और प्रशासन की प्राथमिकता यही है कि लोगों तक केवल गुणवत्ता पूर्ण और सुरक्षित खाद्य पदार्थ ही पहुंचें। उन्होंने कहा कि जिले में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के निर्देशों उपरांत विभाग द्वारा लगातार की जा रही सैंपलिंग और जांच की कार्रवाई जारी रहेगी।

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