Buland kesari/होशियारपुर जिले के मुकेरियां स्थित गांव कौलपुर में आवारा कुत्तों के एक झुंड ने 10 साल की मासूम बच्ची प्रभजोत कौर पर उस समय हमला कर दिया, जब वह दुकान से सामान लेने जा रही थी। कुत्तों ने बच्ची को बुरी तरह नोंच डाला, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।
स्थानीय महिला की तत्परता से बच्ची की जान बच सकी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना ने ग्रामीणों में भारी रोष पैदा कर दिया है और उन्होंने सरकार से आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान की मांग की है।
होशियारपुर के अंतर्गत आते मुकेरियां के गांव कौलपुर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुत्तों के एक हिंसक झुंड ने बच्ची पर हमला कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 वर्षीय प्रभजोत कौर अपने घर के पास स्थित एक दुकान से सामान खरीदने के लिए निकली थी।
जैसे ही वह गली के मोड़ पर पहुंची, अचानक वहां मौजूद आवारा कुत्तों के झुंड ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। इससे पहले कि बच्ची कुछ समझ पाती या वहां से भाग पाती, कुत्तों ने उस पर हमला कर उसे जमीन पर गिरा दिया।
चीखें सुनकर दौड़ी महिला ने बचाई जान
कुत्तों के हमले के दौरान बच्ची की चीख-पुकार सुनकर पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया। गनीमत रही कि गली में रहने वाली एक महिला ने साहस दिखाया और तुरंत लाठी लेकर बच्ची की ओर दौड़ी। महिला ने शोर मचाकर और कुत्तों को डराकर बच्ची को उनके चंगुल से छुड़ाया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर समय रहते महिला वहां न पहुंचती, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी क्योंकि कुत्तों का झुंड बेहद आक्रामक था।
गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
बच्ची की मां हर्षविंदर कौर ने रोते हुए बताया कि कुत्तों ने उनकी बेटी प्रभजोत को बुरी तरह से काट लिया है। कुत्तों के दांतों के गहरे निशान बच्ची के कूल्हे, घुटने और टांग पर आए हैं। लहूलुहान हालत में बच्ची को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे कई टांके लगाए। फिलहाल बच्ची का इलाज चल रहा है, लेकिन वह इस हादसे के बाद से गहरे सदमे में है।
इस घटना के बाद कौलपुर गांव के निवासियों में गहरा डर और प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। हर्षविंदर कौर और अन्य ग्रामीणों ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि गलियों में बच्चों का निकलना दूभर हो गया है। उन्होंने मांग की है कि नसबंदी अभियान और कुत्तों को रिहाइशी इलाकों से हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम को इस दर्द से न गुजरना पड़े।

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