Buland Kesari/ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, जालंधर ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी आवासीय परियोजना में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जातीं, तो ऐसे फ्लैट का कब्जा दिया जाना कानूनन वैध नहीं माना जा सकता।
आयोग ने इस आधार पर जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट को शिकायतकर्ता द्वारा जमा करवाई गई राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करने के आदेश दिए हैं।
यह फैसला जसविंदर सिंह बनाम जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में सुनाया गया। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि ट्रस्ट द्वारा आवंटित इंदिरा पुरम फ्लैट्स मास्टर गुरबंता सिंह नगर में वर्षों बाद भी बिजली, पानी, गैस कनेक्शन और 45 फीट चौड़ी अप्रोच रोड जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गईं, जबकि ये सभी सुविधाएं अलॉटमेंट लेटर और ब्रॉशर में दर्शाई गई थीं।
सबूतों से साबित हुई ट्रस्ट की लापरवाही:
शिकायतकर्ता की ओर से आयोग के समक्ष फोटो, वैल्यूअर की रिपोर्ट तथा समाचार पत्रों की कटिंग प्रस्तुत की गईं, जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि परियोजना का विकास अधूरा था। इसके विपरीत, इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट अपनी ओर से केवल पजेशन स्लिप प्रस्तुत कर सका और यह साबित करने में असफल रहा कि सभी सुविधाएं पूर्ण कर दी गई थीं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिना कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट के दिया गया कब्जा अधूरा और अमान्य माना जाएगा। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट और राज्य उपभोक्ता आयोग के पूर्व निर्णयों का भी उल्लेख किया गया।
समय सीमा का तर्क भी खारिज
इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने यह दलील दी कि शिकायत समय सीमा से बाहर है, लेकिन आयोग ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि जब तक परियोजना का विकास पूरा नहीं होता, तब तक उपभोक्ता के पक्ष में निरंतर कारण उत्पन्न होता रहता है।
राहत और मुआवजा
आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता द्वारा जमा की गई पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 30 हजार रुपये मुआवजा तथा 10 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च अदा करने के आदेश भी दिए गए हैं। यह पूरी राशि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर अदा करनी होगी, अन्यथा अतिरिक्त ब्याज देना होगा।
अन्य उपभोक्ताओं के लिए अहम संदेश
आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी उपभोक्ता को अनिश्चित काल तक फ्लैट मिलने की प्रतीक्षा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो विकास प्राधिकरणों और सरकारी एजेंसियों की देरी और लापरवाही से लंबे समय से परेशान हैं।
इस मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह ढिल्लों तथा सदस्यों डॉ. हरवीन भारद्वाज और ज्योत्सना की पीठ ने की।
शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट हरप्रीत कौर, जबकि इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की ओर से एडवोकेट सचिन शारदा पेश हुए।

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