Buland kesari/जबरन रूसी सेनी में भर्ती किए गए पंजाब के लुधियाना के युवक समरजीत सिंह की रूस में मौत हो गई। 21 वर्षीय समरजीत करियर बनाने के लिए रूस पहुंचे थे। लेकिन उन्हें जबरन आर्मी में भर्ती किया गया। 8 सितंबर के बाद उसका परिवार से संपर्क टूट गया और 10 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
समरजीत की मौत की सूचना परिवार को दो दिन पहले मिली और अब उसका शव रूस से लुधियाना आ चुका है। आज उसका डाबा स्थित श्मशान घाट में अंतिम संस्कार होगा। समरजीत अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था।
समरजीत के मौसा अमरजीत सिंह ने बताया कि परिवार को एक सप्ताह पहले एक रुसी भाषा में एक लेटर मिला था। उसमे समरजीत सिंह की मौत की जानकारी थी। दो दिन पहले सूचना मिली थी कि समरजीत की मौत हो गई और उसका डेथ सर्टिफिकेट भी उन्हें भेजा गया। उन्हें सूचना दी गई कि वीरवार को शव दिल्ली एयरपोर्ट पर आएगा।
अमरजीत सिंह ने बताया कि गुरुवार को शव हासिल कर लुधियाना लाए हैं। उन्होंने बताया कि डेथ सर्टिफिकेट में दिसंबर में मौत होने की बात लिखी है। उन्होंने बताया कि समरजीत को जबरन सेना में भर्ती किया गया था। उसकी पहचान भी रूस सेना के टोकन से ही हुई है।

धोखे से किया आर्मी में भर्ती
चरणजीत सिंह ने बताया कि ट्रेनिंग के कुछ दिन बाद जब उन्होंने समरजीत को आर्मी की वर्दी दी तो उसने सवाल किया कि उसे वर्दी क्यों दी जा रही है। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें आर्मी के डॉक्टर के साथ काम करना है, इसलिए वर्दी पहननी जरूरी है। कुछ दिन बाद समरजीत पता चला कि उसे धोखे से आर्मी में भर्ती करवा दिया।
आठ सितंबर को आखिरी बार हुई थी परिवार से बात
चरणजीत सिंह ने बताया कि उसका 21 साल का बेटा समरजीत सिंह जुलाई में करियर बनाने के लिए रूस गया था। उसकी आखिरी बार 8 सितंबर को परिवार से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। यह 22 सेकेंड की कॉल थी लेकिन उसमें से सिर्फ सात सेकेंड ही बात हो पाई थी। कॉल पर समरजीत ने कहा- “मैं ठीक हूं, पापा अपना और मम्मी का ख्याल रखना।” इतना कहकर कॉल कट गई।
इसके बाद पिता चरणजीत बार-बार फोन मिलाते रहे, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। बाद में पता चला कि समरजीत को जबरन रूसी सेना में भर्ती किया गया था और अब उसका कोई सुराग नहीं है।

रूस पहुंचकर खुश था समरजीत
पिता चरणजीत ने बताया कि 16 जुलाई को समरजीत लुधियाना से रूस जाने के लिए निकला। उसके बाद वह रूस पहुंचा। वहां पर कुछ दिन रहने के बाद उसे कहा गया कि रशियन लैंग्वेज सीखने के लिए 3 महीने का कोर्स करना होगा। उसने वह कोर्स शुरू किया और कहा कि कोर्स पूरा होने के बाद उसे नौकरी मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि वह बहुत खुश था।
सात लाख रुपए कर्ज लेकर भेजा था रूस
पिता चरणजीत ने बताया कि समरजीत ने 2020 में 12वीं कक्षा पास की थी। उसके बाद एक्सरे टेक्नीशियन का डिप्लोमा किया। डिप्लोमा करके वह यहां पर नौकरी कर रहा था। अचानक उसने बाहर जाने की जिद्द पकड़ी। चरणजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने बेटे को विदेश भेजने के लिए जी तोड़ मेहनत की और पैसा पूरा नहीं हुआ तो 7 लाख रुपए मकान की रजिस्ट्री रखकर लोन लिया। उन्होंने बताया कि घर का गुजारा चलाने के लिए एक छोटी सी दुकान है। दूसरा बेटा 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। परिवार में उनकी पत्नी, बेटा और ताई हैं।
यूक्रेन युद्ध में ड्रोन अटैक में मौत बताया गया कि समरजीत की बीती 10 सितंबर को ड्रोन अटैक में मौत हो गई थी। लेकिन उसकी सूचना नहीं मिले थे। परिवार के लोग परेशान थे। परिजनों को कहना है कि एक सप्ताह पहले उनको रसियन भाषा में एक लेटर में मिला था। इसमें उसकी मौत की जानकारी दी गई थी।

बेटे को सुरक्षित वापस लाने के लिए परिवार के संघर्ष को सिलसिलेवार जानिए…
डिप्टी कमिश्नर को दिया आवेदन: चरणजीत सिंह ने बताया कि जब आखिरी बार उनके बेटे की बात हुई तो उसके बाद उन्होंने एक दो दिन संपर्क साधने की कोशिश की। लेकिन संपर्क नहीं हुई। फिर रूस में फंसे बूटा सिंह का एक वीडियो सामने आया और उसके बाद वो घबरा गए। उन्होंने बताया कि वो फिर डीसी दफ्तर गए और डीसी को इस संबंध में आवेदन दिया।
पंजाब सरकार को भेजा आवेदन: चरणजीत सिंह ने बताया कि अलग-अलग माध्यमों से उन्होंने पंजाब सरकार से अपने बेटे को सकुशल वापस लेने की गुहार लगाई। लेकिन कोई ठोस रिस्पॉन्स नहीं मिला। एनआरआई मंत्री संजीव अरोड़ा को मिलने गए तो वो नहीं मिले। उनके स्टाफ से ही बात होती रही। लेकिन हुआ कुछ नहीं।
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को मिले: परिवार ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू से मुलाकात की और उन्हें अपने बच्चे के केस से अवगत कराया और उसकी पूरी फाइल उन्हें सौंपी। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि वो इस मामले को केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के सामने उठाएंगे।
सांसद राजा वड़िंग को मिलने गए: चरणजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को मिलने उनके दफ्तर पहुंचे। राजा वड़िंग तो नहीं मिले, लेकिन उनके पीए ने उन्हें भरोसा दिलाया कि अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें दिल्ली लेकर जाएंगे।
दिल्ली के जंतर मंतर में धरना दिया: चरणजीत सिंह ने बताया कि रूस में जिन युवाओं को जबरन सेना में भर्ती किया गया, उनके परिजन जंतर मंतर में एकत्रित हुए और मांग की कि उनके बच्चों को सकुशल वापस लाया जाए। उन्होंने बताया कि धरने के बाद विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बुलाया और उन्हें आश्वासन दिया।
27 युवाओं के नाम विदेश मंत्रालय को दिए: समरजीत सिंह के पिता चरणजीत सिंह ने बताया कि जंतर मंतर धरने में बैठे परिवारों ने विदेश मंत्रालय को 27 युवाओं की सूची दी जिन्हें रूस में जबरन आर्मी में भर्ती किया है। उनमें से कोई भी युवा परिवार के संपर्क में नहीं हैं।
विदेश मंत्रालय से लगातर संपर्क करते रहे: समरजीत के पिता चरणजीत सिंह बेटे की सकुशल वापसी के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क करते रहे। विदेश मंत्रालय ने रूस को अपने मिसिंग युवाओं की सूची भेजी। पड़ताल हुई और अब उसके मरने की खबर आई है।

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