Buland Kesari/ भ्रष्टाचार समाज में किस स्तर पर फैल चुका है इसका सबूत जालंधर रेलवे स्टेशन के बाहर देखने को मिलता है।

जहां जीआरपी पुलिस थाने के बाहर मुख्य मार्ग पर आटोज़ की लाइन लगी होती है। जो कि सवारीयों को उठाने उतारने का काम करते हैं। परंतु अगर कोई आम बंदा प्राइवेट कार में अपने परिजनों और रिश्तेदारों को रिसीव करने या छोड़ने के लिए स्टेशन के बाहर गाड़ी लगा ले तो तुरंत गाड़ी को वहां से हटवा दिया जाता है और पुलिस कर्मचारी गाड़ी लगाने वाले लोगों को भी गलत शब्दावली का प्रयोग करके डांटते दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं थाने के बाहर बने रिसेप्शन काउंटर के सामने भी ऑटो खड़े रहते हैं पर इनको वहां से कोई नहीं हटाता। पता नहीं वहां लगी लंबी ऑटो उसकी लाइन पुलिस वालों को आखिर क्यों नहीं नजर आती? क्या इन ऑटो से पुलिस वालों को कोई फायदा मिल रहा है?इसकी जांच होनी चाहिए!
अगर नियम सबके लिए एक है तो फिर नो पार्किंग एरिया में अगर प्राइवेट गाड़ी लगाकर कोई अपने रिश्तेदारों को उतार जा उन्हें रिसीव नहीं कर सकता तो फिर ऑटो वाले क्यों वहां लंबी कतारें लगाकर बैठे रहते हैं! सड़क तो वही है व उस पर नियम भी वही हैं ! आए दिन इस बात को लेकर लोगों की पुलिस वालों से बहस होती दिखाई देती है।
लोगों का कहना है कि पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों को इस मामले में कोई सख्त नियम बनाने चाहिए या तो जहां ऑटो भी स्टेशनों के बाहर ना लगें या फिर कारों को भी कुछ मिनट के लिए वहां खड़े होकर अपने रिश्तेदारों को छोड़ने और रिसीव करने की अनुमति दी जाए। इतना ही नहीं जिन पुलिस कर्मचारियों का काम इन ऑटोस को हटाना है वह इधर-उधर बैठकर लोगों से बातें करते दिखाई देते हैं! स्टेशन की एंट्री पर बने पुलिस काउंटर पर भी कोई कर्मचारी दिखाई नहीं देता! ऐसे में स्टेशन की सुरक्षा पर विश्वास खड़े होते हैं।

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