Buland kesari/उत्तर प्रदेश के मेरठ में तलाक के बाद ढोल पर नाचने वाली महिला प्रणिता शर्मा के पति आर्मी में मेजर है और जालंधर में पोस्टेड है। जालंधर कैंट निवास पर रह रहे उनके माता-पिता ने बताया है कि तलाक के बाद से उनका बेटा मेजर गौरव अग्निहोत्री डिप्रेशन में है।
उन्होंने कहा कि बहू प्रणिता झूठ बोल रही है। उसने हमारे बेटे से उसका बच्चा और हमसे हमारा पोता छीन लिया। रुंधे गले से मेजर के पिता ने कहा- उसने मुझसे दादा का अधिकार छीन लिया। बहू का जब ऑपरेशन हुआ और टांग टूटी तो सास ने मालिश कर सेवा की, जिसका यह सिला मिला। कोर्ट एग्रीमेंट तोड़कर हमें पूरे देश में बदनाम किया जा रहा है।
मेजर के माता-पिता ने कहा कि उनका बेटा आर्मी में है, जिसका एक डिसिप्लिन होता है। यहां महिला को प्रताड़ित नहीं किया जा सकता। एक मिनट में शिकायत पर फौज अपने जवान के खिलाफ कार्रवाई करती है। पिता ने कहा कि बहू अपने एडवोकेट भाइयों और जज पिता के दम पर झूठ बोल रही है। पहले भी 2019 में केस करवा चुकी है।
14 दिसंबर, 2018 को यूपी के शाहजहांपुर के आर्मी मेजर गौरव अग्निहोत्री की शादी मेरठ की प्रणिता शर्मा से हुई थी। प्रणिता ने ससुराल पर प्रताड़ना के आरोप लगाकर तलाक मांगा और 4 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया। तलाक मिलते ही प्रणिता ढोल की थाप पर नाची। इसका वीडियो तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो गया।
मेजर के पिता ने मामले में ये बातें कहीं…
- पोते का मुंडन बिना बताए किया: मेजर गौरव के पिता रिटायर्ड सूबेदार श्याम किशोर अग्निहोत्री ने बताया कि विवाद की मुख्य जड़ उनके पोते का मुंडन संस्कार रहा। उनकी और उनके परिवार की सहमति के बिना बहू के मायके वालों ने मनमाने ढंग से मुंडन करा दिया। जब इस पर आपत्ति जताई गई तो मामले को सुलझाने के बजाय तलाक की धमकी दी गई। उनके बेटे की गाड़ी तक जब्त कर ली गई। उनका मानना है कि पोता उनके वंश का हिस्सा है और उसके संस्कार उनके पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार होने चाहिए थे, लेकिन ससुराल पक्ष ने इसे नजरअंदाज कर जबरदस्ती की।
- एग्रीमेंट के बावजूद बेटे की छवि खराब की: उन्होंने अपनी बहू की ओर से लगाए प्रताड़ना के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा- मेरी पत्नी ने बहू की सेवा एक मां की तरह की। यहां तक कि बीमारी और बच्चे के जन्म के समय भी उसका पूरा ख्याल रखा। जबकि, बहू का व्यवहार खराब था।

- कोर्ट में रखी गई शर्त का उल्लंघन किया: साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट में हुए समझौते (एग्रीमेंट) के तहत दोनों पक्षों को एक-दूसरे की सामाजिक छवि खराब न करने की शर्त माननी थी, लेकिन बहू ने मीडिया में गलत जानकारी फैलाकर और ढोल-नगाड़े बजाकर उस समझौते का उल्लंघन किया है।
- एक पिता से उसका बच्चा छीना और वीडियो बना रहे: रिटायर्ड सूबेदार ने कहा- इस सार्वजनिक बदनामी से मैं अत्यंत दुखी हूं। इस विवाद से न केवल हमारे परिवार की, बल्कि पूरी फौज की छवि धूमिल हुई है। मेरा बेटा डिप्रेशन में है, क्योंकि उससे उसका बच्चा और पिता होने का हक छीन लिया गया। मीडिया और समाज से विनती की है कि केवल एक पक्ष न देखा जाए, बल्कि हमारी गरिमा और सच्चाई पर भी गौर किया जाए, ताकि हमें इन झूठे आरोपों से मुक्ति मिल सके।

मेजर की मां ने बताईं 3 अहम बातें…
- बहू नहीं उसके मायके ने षड्यंत्र रचा: मेजर गौरव की मां अनीता अग्निहोत्री ने कहा कि यह तलाक सामान्य विवाद नहीं, बल्कि बहू के मायके वालों की ओर से रचा गया षड्यंत्र है। बहू के परिवार ने अपने बेटे की एक्सीडेंट में मौत के बाद उनके पोते पर अधिकार जमाने के उद्देश्य से यह सब किया। उनके अनुसार, बहू पर दबाव डालकर जानबूझकर झगड़े करवाए गए, ताकि बच्चे को पिता और दादा-दादी से अलग किया जा सके। माता-पिता को अलग कर क्या कोई बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर सकता है?
- मैंने बहू को हमेशा बेटी की तरह माना: अनीता ने बताया कि उन्होंने अपनी बहू को हमेशा बेटी की तरह माना। अपने दूसरे बीमार बेटे को छोड़कर उसकी सेवा की। इसके बावजूद उन्हें कभी सम्मान नहीं मिला। अनीता के अनुसार, बहू का परिवार रसूखदार (वकील और जज) होने के कारण उन पर हमेशा मानसिक दबाव बनाता रहा और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की। उन्होंने अपने बेटे के घर को बचाने के लिए लंबे समय तक हर अत्याचार को चुपचाप सहा।
- तलाक के बाद फौज को बदनाम किया: मेजर की मां ने कहा- समझौते के बावजूद मेरे बेटे की पहचान, फोटो और लोकेशन को सार्वजनिक किया गया। तलाक के बाद भी हमारा भरोसा तोड़ दिया। एक फौजी की सुरक्षा और गरिमा के साथ खिलवाड़ भी किया गया। जिस बेटे ने मीडिया में एक शब्द नहीं बोला, उसे इस तरह बदनाम करना गलत है। मैंने अपनी बहू की तन-मन-धन से सेवा की, लेकिन अंत में मुझे केवल बदनामी और अपने पोते से जुदाई ही मिली। एक-दूसरे के खिलाफ न बोलने के एग्रीमेंट को तोड़कर भारतीय सेना को भी बदनाम किया।

जानिए मायके वालों ने क्या बताया पूरा मामला…
मेरठ में रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया- मेरी बेटी प्रणिता शर्मा के लिए शादी के बाद से ही ससुराल वालों का व्यवहार ठीक नहीं रहा। 7 सालों में उसने काफी परेशानियां झेलीं। पति और ससुराल के लोग उसे प्रताड़ित करने लगे। इस दौरान उसका एक बेटा भी हुआ, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद भी हालात नहीं बदले। ससुराल वाले उसे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते।
आखिरकार प्रणिता ने तलाक लेने का फैसला किया। उसने मेरठ फैमिली कोर्ट में अर्जी लगाई। 4 अप्रैल को कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया। इसके बाद परिवार बेटी प्रणिता शर्मा को पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाया है।

पिता बोले- मेरी बेटी है, कोई सामान नहीं
पिता ज्ञानेंद्र शर्मा ने कहा- अगर मेरी बेटी शादी में दुखी थी, तो उसे खुशी देना मेरा दायित्व था। बेटी शादी में बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी। आज मैं उसे उसी सम्मान के साथ वापस लाया हूं। मैंने उन लोगों से कोई एलीमनी या सामान नहीं लिया।
उन्होंने कहा कि बेटी को हर हाल में ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है। बेटी कोई सामान नहीं, वह परिवार का हिस्सा है। महिलाओं का सशक्तीकरण सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे जमीन पर उतारना जरूरी है।

प्रणिता शर्मा बोली- पहले खुद को मजबूत बनाइए, पढ़िए-लिखिए
प्रणिता शर्मा मेरठ की शास्त्री नगर स्थित प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर हैं। उन्होंने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। वह माता-पिता की इकलौती बेटी हैं। उनके भाई की साल 2022 में एक हादसे में मौत हो गई थी। प्रणिता ने बताया कि वह मानसिक रूप से काफी कमजोर हो चुकी थीं, लेकिन परिवार हर समय उनके साथ खड़ा रहा। इसी सहारे उन्होंने खुद को संभाला।
उन्होंने कहा- अगर कोई महिला किसी तरह की प्रताड़ना झेल रही है, तो चुप न रहे। अपने लिए लड़े। पहले खुद को मजबूत बनाएं। पढ़ें-लिखें, अपने पैरों पर खड़ी हों । उसके बाद ही शादी के बारे में सोचें। उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना ही असलीमहिला सशक्तीकरण है।

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