Buland kesari/जालंधर ;हाल ही में शहर में पार्किंग साइट्स को लेकर नगर निगम की ओर से की गई ई-ऑक्शन प्रक्रिया अब विवादों में घिर गई है। जानकारी के अनुसार निगम ने शहर में लगभग दो दर्जन पार्किंग साइट्स निर्धारित की थीं, जिनसे करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त हो सकता था। लेकिन इन साइट्स में से केवल एक दर्जन की ही नीलामी हो पाई, जबकि शेष साइट्स की नीलामी लंबे समय से सिरे नहीं चढ़ पा रही है।
अब बड़ा खुलासा हुआ है कि शहर में लंबे समय से एक्टिव पार्किंग माफिया ने निगम को न केवल गच्चा दिया, बल्कि ई-ऑक्शन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा भी किया है। निगम रिकॉर्ड के अनुसार, जिन 12 पार्किंग साइट्स की पिछले दिनों सफल नीलामी हुई, उनमें से 6 साइट्स के लिए एक ही आईपी एड्रेस से बोली लगाई गई। इसका मतलब यह है कि अलग-अलग ठेकेदारों के नाम से बोली लगाने वाले वास्तव में एक ही ग्रुप के सदस्य हो सकते हैं।
निगम अधिकारियों को यह जानकारी समय रहते मिल गई थी कि माफिया ने ई-ऑक्शन में पूलिंग करके फ्रॉड किया है। इसके बावजूद, अब तक किसी भी निगम अधिकारी ने इस मामले में एफ.आई.आर. दर्ज करवाने का साहस नहीं दिखाया है।
माफिया ने इन साइट्स के लिए पूल करके किया फ्रॉड
– सतनाम मोटर गैरेज, बीएमसी चौक के सामने – 4.72 लाख
– सर्किट हाउस के सामने, स्टेट बैंक की दीवार के पास – 9.40 लाख
– मूनलाइट पब के सामने, जी.टी. रोड – 7.60 लाख
– आईसीआईसीआई बैंक के सामने, जी.टी. रोड – 9.40 लाख
– नरेंद्र सिनेमा के निकट, ग्लासी जंक्शन के पास – 9.40 लाख
– ग्लासी जंक्शन के सामने, बस स्टैंड के निकट – 16.60 लाख
निगम हाउस आने के बाद बदलाव की उम्मीदें जगी थीं
नगर निगम में अब अफसरशाही का राज समाप्त हो चुका है। हाल ही में नगर निगम चुनावों के बाद नया हाउस गठित हुआ है। इसके चलते निगम की आमदनी में भी सुधार देखने को मिल रहा था। पिछली बार अफसरों के कार्यकाल में कुल 26 पार्किंग साइट्स की ई-नीलामी करवाई गई थी, लेकिन पार्षद हाउस के अभाव में अलॉटमैंट रोक दी गई थी। इस साल की शुरुआत में पार्षद हाउस से मंजूरी मिलने के बाद निगम ने फिर से ई-नीलामी करवाई, और कई साइट्स सफलतापूर्वक अलॉट भी हो गईं। इससे सिस्टम में बदलाव की उम्मीद जगी थी पर हाल ही में हुए फ्रॉड से साबित हो गया है कि शहर में पार्किंग माफिया काफी हावी है ।
सारी नीलामी रद्द हुई तो निगम को होगा करोड़ों का नुकसान
सूत्रों के मुताबिक अब नगर निगम इन सभी साइट्स की नीलामी रद्द करने की तैयारी में है। मेयर वनीत धीर ने भी नीलामी रद्द करने हेतु हामी भर दी है । ऐसे में निगम को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान हो सकता है। माना जा रहा है कि फ्रॉड को देखते हुए निगम इस साइट्स की नीलामी को भी रद्द करने जा रहा है:-
– रंगला वेहड़ा प्रोजैक्ट – 66.30 लाख वार्षिक में अलॉट
– कंपनी बाग पार्किंग – 42.30 लाख वार्षिक में अलॉट
– मॉडल टाऊन, सरकारी गर्ल्स स्कूल के पास – 17.60 लाख
– शक्ति टावर, विशाल मैगा मार्ट के सामने – 11.10 लाख
– अपेक्स टावर के सामने, जी.टी. रोड – 5.20 लाख
– बस स्टैंड के पास पार्किंग प्लेस – 8.70 लाख
– कंपनी बाग पार्किंग की शॉप नंबर 1 – 2.60 लाख
सवाल-रैवेन्यू लॉस के लिए आखिर किसकी जिम्मेदारी फिक्स की जाएगी
निगम रिकार्ड के मुताबिक सामने आ चुका है कि आपस में पूल करके निगम से फ्रॉड करने वाले माफिया ने नंद टूरिज्म एंड फिनसर्व लि. के नाम से फर्जीवाड़ा किया और एक ही आई.पी. एड्रेस से नीलामी में भाग लिया। इसी कंपनी ने सभी 6 पार्किंग साइट्स में ही बोली अपने नाम करवाई। इस कंपनी के सारे दस्तावेज निगम रिकार्ड में मौजूद हैं पर फिर भी निगम द्वारा कोई संरक्षण न ले पाना कई सवाल खड़े कर रहा है?
निगम अधिकारियों को यह भी मालूम है कि निगम का पावरफुल ठेकेदार शिवम मदान पिछले लंबे समय से पार्किंग साइट्स की नीलामी में दिलचस्पी दिखा रहा था। अब बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी किस पर डाली जाएगी ? क्या निगम अधिकारी माफिया के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएंगे और एफआईआर दर्ज करवाएंगे? माना जा रहा है कि अगर अब सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में निगम को इस तरह की धोखाधड़ी से बचाना मुश्किल होगा। अगर निगम को लाखों का नुकसान हुआ है और उन तत्वों का पता भी लग गया है जिन्होंने निगम से फ्रॉड किया तो फिर एफ़.आई.आर. दर्ज करवाने में हर्ज क्या है। फिलहाल सभी की नजरें नगर निगम कमिश्नर के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

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