Buland kesari/पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री बूटा सिंह को ‘काला’ कहने पर पंजाब कांग्रेस के प्रधान सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नेशनल SC कमीशन ने तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर और SSP से 7 दिन में कार्रवाई को लेकर जवाब तलब कर लिया है। यह कार्रवाई भाजपा नेता तरूण चुग के बयान पर की गई है।
इससे पहले पंजाब SC कमीशन ने भी वडिंग से 7 दिन के भीतर जवाब मांगा था। इसके बाद मंगलवार दोपहर को तरनतारन के जिला चुनाव अधिकारी को पत्र लिखकर 6 नवंबर को सुबह 10 बजे व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं। उनसे पूछा गया कि अनाप-शनाप बोलने वाले राजा वडिंग को अब तक जिले की सीमा से बाहर तड़ीपार क्यों नहीं किया गया।
इसके अलावा, पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार भी एक्टिव हो गई है। वित्तमंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि वडिंग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से उन्हें पार्टी से बाहर निकालने की मांग की है।
वहीं कांग्रेस सांसद व पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने कहा कि राजा वडिंग ने जो कहा, वह बेहद गलत है, इसके लिए उन्होंने माफी मांग ली है। मैं समूची कौम से निवेदन करता हूं कि उन्हें माफ कर देना चाहिए।
वहीं लुधियाना के घंटाघर चौक पर दलित विकास बोर्ड के चेयरमैन विजय दानव की अगुआई में दलित समाज ने राजा वडिंग का पुतला फूंककर रोष प्रदर्शन किया।
सबसे पहले पढ़िए वडिंग का बयान और उस पर सफाई
तरनतारन उपचुनाव में प्रचार के दौरान कांग्रेस का महिमामंडन करने की कोशिश में वडिंग ने दलित बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री स्वर्गीय बूटा सिंह को लेकर एक टिप्पणी की थी।
वडिंग ने कहा था-
” कांग्रेस पार्टी ने काले रंग के एक शख्स को, जो लोगों के घरों में चारा काटने का काम करता था, केंद्रीय गृहमंत्री बना दिया था
इसके बाद विवाद बढ़ता देखकर राजा वडिंग को सोशल मीडिया पर आकर सफाई देनी पड़ी।
वडिंग ने सफाई देते हुए कहा-
” मेरे बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया। मेरा मकसद किसी का अपमान करना नहीं था। फिर भी यदि किसी को ठेस पहुंची हो तो मैं हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं।
हालांकि वडिंग की टिप्पणी से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) नेता हरनूर सिंह मान, जो बूटा सिंह के भांजे हैं, ने वडिंग को पद से हटाने की मांग की है। हरनूर ने कहा कि बूटा सिंह ने गरीबी के बीच संघर्ष करते हुए जालंधर खालसा कॉलेज से पढ़ाई की और फिर कांग्रेस में अपनी मेहनत से केंद्रीय गृहमंत्री, रेलमंत्री, बिहार के राज्यपाल और एससी आयोग के चेयरमैन के पद तक पहुंचे।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई..
विवाद एससी कमीशन पहुंचाः राजा वडिंग का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें वह कह रहे हैं- एक काले रंग दा बंदा पठ्ठे कुतरदा हुंदा सी, उसे कांग्रेस ने गृहमंत्री बणाया सी।’ वडिंग ने यह बात देश के गृहमंत्री रह चुके स्व. बूटा सिंह के बारे में कही थी। उनके इसी बयान का नोटिस लेते हुए कहा कि पंजाब एससी कमीशन के चेयरमैन जसबीर सिंह गढ़ी ने उन्हें नोटिस भेजकर 6 नवंबर तक जवाब तलब किया है।
भांजे हरनूर सिंह मान ने एतराज जतायाः स्व. बूटा सिंह पर वडिंग की इस टिप्पणी पर आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश प्रवक्ता हरनूर सिंह हरजी मान ने कड़ी आपत्ति जताई। AAP के फगवाड़ा विधानसभा सीट के इंचार्ज हरनूर मान ने कहा कि वडिंग जैसे घटिया लोग स्व. बूटा सिंह के चरणों की धूल के बराबर भी नहीं हैं।
हरजी मान बोले- यह सरदार बूटा सिंह का अपमान
वडिंग की टिप्पणी नस्लवादीः आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश प्रवक्ता हरनूर सिंह हरजी मान ने कहा कि राजा वडिंग को सरदार बूटा सिंह पर टिप्पणी करने से पहले उनके जीवन और संघर्ष को समझना चाहिए था। उन्होंने वडिंग की टिप्पणी को नस्लवादी बताया और कहा कि एक वरिष्ठ नेता के प्रति ऐसे शब्द बेहद अपमानजनक हैं। हरनूर मान स्व. बूटा सिंह के भांजे और प्रदेश के पूर्व मंत्री जोगिंदर सिंह मान के बेटे हैं।
बूटा सिंह का संघर्ष और उपलब्धियां: मान ने बताया कि बूटा सिंह ने गरीबी में बचपन बिताया और एक “पाठी सिंह” के रूप में शिक्षा पाई। उन्होंने जालंधर के खालसा कॉलेज से बीए किया और पत्रकारिता के जरिए पंजाब के मुद्दे उठाए। बाद में वे अकाली दल से लोकसभा पहुंचे और फिर कांग्रेस में शामिल हुए। अपनी मेहनत से वे आठ बार सांसद बने, गृह मंत्री, रेल मंत्री, बिहार के राज्यपाल और भारत के एससी आयोग के चेयरमैन रहे।
राजा वडिंग पर कार्रवाई की मांगः हरजी मान ने कहा कि ऐसे बड़े और कद्दावर नेता पर घटिया टिप्पणी करने वाले राजा वडिंग के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से मांग की कि वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया जाए, क्योंकि यह वरिष्ठ नेताओं के प्रति पार्टी की गिरती इज्जत का प्रतीक है।
कौन थे सरदार बूटा सिंह
सरदार बूटा सिंह दलित समाज से आने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कई अहम पद संभाले। वे आठ बार लोकसभा सांसद रहे, देश के गृह मंत्री, रेल मंत्री और बिहार के राज्यपाल बने। इसके अलावा उन्होंने भारत के अनुसूचित जाति आयोग (SC आयोग) के चेयरमैन के रूप में भी काम किया। 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों के आयोजन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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