Buland kesari/पंजाब के कोटकपूरा में चैत्र नवरात्र पर शराब का लंगर चला। गांव मरहाना में बाबा काला महर के यादगार मेले में ये नजारा देखने को मिला। दरबार के बाहर बेंच लगाकर उस पर देसी और अंग्रेजी शराब की बोतलें सजाई गईं। श्रद्धालु टेबल पर ही पैग बनाकर रखते और पिलाते नजर आए।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मान्यता के चलते यहां पर शराब चढ़ाई जाती है और इसी शराब का लंगर भी लगाया जाता है। मेले में सुबह से शाम तक प्रसाद के रूप में शराब पीने वाले लोगों को भीड़ रहती है।
हर श्रद्धालु चढ़ाता है शराब, घर भी ले जाते हैं प्रसाद
बाबा काला महर के प्रति श्रद्धालुओं में अटूट विश्वास है। श्रद्धालुओं में शायद ही कोई हो जो कि बिना शराब के बाबा की दरगाह पर पहुंचता हो। श्रद्धा के अनुसार कोई देसी तो कोई ब्रांडेट शराब चढ़ाता है। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धालु शराब चढ़ाने के बाद थोड़ी शराब घर ले सकता है, परंतु यदि चाहे तो वह उसे वहीं बैठकर पी भी सकता है।

नव विवाहित जोड़े बच्चे की अरदास लेकर आते हैं बाबा के प्रति महिला श्रद्धालुओं की श्रद्धा ज्यादा है। न्यूली मैरिड कपल बच्चे की मुराद मांगने के लिए दूर-दराज से पहुंचते हैं और शराब चढ़ाकर अपनी मुराद पूरी होने की कामना करते हैं। लोगों के अनुसार संधू वंश से संबंधित बाबा काला महर हुए। मनोकामना पूरी होने के बाद एक बार फिर श्रद्धालु बच्चे के साथ शराब चढ़ाने के लिए आते हैं। अफगानिस्तान के गजनी से आए थे बाबा के पूर्वज मूल रूप गजनी के रहने वाले बाबा के पूर्वज लाहौर से आकर कोटकपूरा के पास जंगल में बसे। यहीं पर बाबा काला महर का जन्म हुआ। एक दिन पशु चराते हुए उनका सामना गुरु गोरखनाथ से हुआ उसके बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। आसपास रहने वाले संधू गोत्र में उनकी पूजा होने लगी। ऐसी मान्यता है कि बाबा ने शराब को परमात्मा के रंग में रंगने वाला अमृत बताया था। इसके बाद से शराब चढ़ने की परंपरा शुरू हुई।

Disclaimer:Buland Kesari receives the above news from social media. We do not officially confirm any news. If anyone has an objection to any news or wants to put his side in any news, then he can contact us on +91-98880-00404.








