Buland kesari / पंजाब सरकार ने ईजी रजिस्ट्रेशन प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए प्रॉपर्टी की रजिस्ट्रेशन, पावर ऑफ अटॉर्नी, तबदील मलकियत सहित अन्य दस्तावेजों की अप्रूवल के लिए मिलने वाले ऑनलाइन अप्वाइंटमैंट स्लॉट को घटाकर 225 से केवल 82 कर दिया है। अब किसी भी तहसील व सब-तहसील में एक दिन में 82 से अधिक ऑनलाइन अपॉइंटमैंट बुक नहीं किए जा सकेंगे। आज से ही यह नया नियम लागू हो गया। सब-रजिस्ट्रार जालंधर-1 और सब-रजिस्ट्रार जालंधर-2 कार्यालय में केवल 82-82 अप्वाइंटमैंट स्लॉट ही खुले, जबकि इससे पहले 225 स्लॉट तक उपलब्ध हुआ करते थे।
फर्स्ट इन–फर्स्ट आऊट (फीफो) पॉलिसी लागू
सरकार ने इस फैसले के साथ ‘पहले आओ-पहले पाओ’ (फीफो) की पॉलिसी भी लागू कर दी है। इसके तहत अब कोई भी आवेदक तभी अपना काम निपटा सकेगा जब उससे पहले जमा हुई फाइल का निपटारा हो चुका होगा।
पहले जहां सब-रजिस्ट्रार किसी भी फाइल को रैंडमली खोलकर अप्रूव कर देते थे, वहीं अब उन्हें सीरियल वाइज काम करना होगा। यानी जब तक पहले नंबर की फाइल की जांच पूरी कर अप्रूवल/ऑब्जैक्शन का फैसला नहीं हो जाता, तब तक अगली फाइल खुल ही नहीं पाएगी। अब नया नियम लागू होने के बाद रैंडम अप्रूवल की प्रथा खत्म हो गई है।
इजी रजिस्ट्रेशन लागू होने के बाद से अप्वाइंटमैंट घटे
पंजाब सरकार ने विगत महीने ही ईजी रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया था, जिसके बाद से सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में अपॉइंटमेंट लेने वालों की संख्या में पहले ही भारी गिरावट दर्ज की जा रही थी। पिछले महीने के आंकड़े बताते हैं कि सब-रजिस्ट्रार जालंधर-1 और जालंधर-2 में प्रतिदिन केवल 80-90 के करीब अप्वाइंटमैंट ही दर्ज हो रही थीं। ऐसे में सरकार द्वारा 82 स्लॉट फिक्स करने का फैसला जनता को राहत देने की बजाय और परेशानी भी खड़ी कर सकता है।
जनता हुई परेशान
नए नियम लागू होने के पहले ही दिन आम लोग और अर्जीनवीस (डीड राइटर) खासे परेशान दिखाई दिए। कई लोग बार-बार सब-रजिस्ट्रार के सामने चक्कर काटते दिखे। जिनके दस्तावेज पूरी तरह दुरुस्त थे, उनका भी काम तुरंत निपट नहीं सका। लोगों का कहना था कि सरकार ने ईजी रजिस्ट्रेशन लागू कर अनावश्यक परेशानियां खड़ी कर दी हैं। गौतम कपूर आवेदक ने बताया कि उसके सारे डाक्यूमैंट बिल्कुल सही हैं लेकिन फिर भी अप्रूवल के लिए कई दिन लग रहे हैं। अगर सब सही है तो तुरंत अप्रूवल क्यों नहीं दिया जा सकता? अर्जीनवीसों का कहना है कि रैंडम सिस्टम खत्म होने से काम की स्पीड बहुत धीमी हो जाएगी। सीरियल वाइज करने में दिनों का इंतजार करना पड़ेगा।
सरकारी तर्क और हकीकत
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने के लिए उठाया गया है। पहले कई बार शिकायतें आती थीं कि रैंडम सिस्टम में कुछ फाइलों को प्राथमिकता देकर जल्दी अप्रूवल मिल जाता था। अब सीरियल वाइज जांच होने से हर आवेदक की फाइल क्रमानुसार देखी जाएगी और पक्षपात की संभावना कम होगी। लेकिन हकीकत यह है कि इससे आम जनता की परेशानियां और बढ़ गई हैं।

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