Buland kesari ;- राज्य भर में बंजर जमीनों में लोगों के पैसे इन्वैस्ट करवा कर कई बिल्डर करोड़ों का खेल तो खेल रहे हैं, इसके साथ ही रीयल एस्टेट में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक जैसे-जैसे राज्य भर में रीयल एस्टेट का कारोबार फल-फूल रहा है, वैसे ही राज्य भर में कई बिल्डर ट्रांसफर फीस के नाम पर गोरखधंधा चला कर राज्य सरकार को लाखों-करोड़ों का रैवेन्यू का चूना लगा रहे हैं।
इसके साथ ही वह ऑनरशिप चेंज करने के बदले एक कागज के टुकड़े पर अपने मात्र हस्ताक्षर करने के बदले निवेशकों से 2 से 4 लाख रुपए तक अंदरखाते फीस बटोर कर अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं, जिससे न तो उक्त रुपयों की निवेशकों को रसीद दी जा रही है व न ही उनसे ट्रांसफर फीस का कोई चैक लिया जा रहा है। इस बात को लेकर राज्य भर में कई बिल्डरों की ऐसी करतूत देख कर निवेशकों के चेहरे मुरझाने लग पडे़ हैं, जिस कारण कई निवेशकों से कुछ बिल्डरों से विश्वास उठता जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक पिछले करीब 10-12 सालों से राज्य भर में फ्लैट कल्चर को काफी कामयाबी मिल रही है और वहीं लोग सिक्योरिटी व आधुनिक सुविधाओं को देखते हुए फ्लैट कल्चर को अपनाने लग पडे़ हैं, जिस कारण राज्य भर में कई लोग अपनी कोठियां व मकान बेच कर फ्लैट कल्चर में अपना आशियाना बसाने की सोच रहे हैं।
वहीं लोगों का रुझान बढ़ता देख कर राज्य भर में प्रापर्टी डीलर भी काफी एक्टिव हो रहे हैं, जिसमें कुछेक प्रापर्टी कारोबारी तो सही हैं जो कि अपनी रैपुटेशन बनाने के साथ-साथ निवेशकों को सही मार्गदर्शन दिखा कर उनका पैसा निवेश करवाते हैं जबकि राज्य भर में कुछ ऐसे भी प्रापर्टी कारोबारी हैं जो कि मोटी कमीशन की खातिर लोगों का पैसा ऐसी जगह पर निवेश करवाते हैं, जहां मुनाफा आना तो दूर की बात निवेशक को कई सालों तक अपना मूल वापस निकालना भी मुश्किल हो जाता है।
जिस कारण निवेशकों को कई बार ऐसे प्रापर्टी कारोबारियों के दफ्तर में अपना मूल वापस लेने के लिए इतने चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिस कारण उनके जूते तक घिस जाते हैं और उनके हाथ निराशा ही लगती है।
वहीं रीयल एस्टेट के बढ़ रहे कारोबार को देखते हुए कई बिल्डरों ने भी राज्य भर में अपना आतंक मचाना शुरू कर दिया है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति फ्लैट या कोई और प्रापर्टी बिल्डर से खरीदता है तो बिल्डर द्वारा उसका एग्रीमैंट बना दिया जाता है और उक्त प्रापर्टी बेचने पर अगर निवेशक किसी को अपनी प्रापर्टी बेचता है तो ऑनरशिप चेंज करवाने के लिए मात्र एक कागज के टुकडे़ पर 50 रुपए देकर मैटर टाइपिंग करवाने के बदले बिल्डर निवेशकों से 2 से 4 लाख रुपए तक की ट्रांसफर फीस बटोर पर अपनी जेबें गर्म करने के साथ-साथ राज्य सरकार को भी चूना लगा रहे हैं। वहीं राज्य भर में कई बिल्डरों की ऐसी कारगुजारी देखकर निवेशकों में निराशा की लहर पाई जा रही है।
खुद ही खोल रखी है प्राइवेट तहसील
सूत्रों के मुताबिक अगर कोई भी निवेशक प्रापर्टी खरीदता या बेचता है तो उसे तहसील में रजिस्ट्री करवाने के लिए जाना पड़ता है और वहां जाकर क्षेत्र व प्रापर्टी के हिसाब से उक्त निवेशक को सरकारी रेट के मुताबिक अष्टाम ड्यूटी वहां जमा करवानी पड़ती है और सरकार के नियमों के बाद ही रजिस्ट्री की जाती है। सूत्रों के मुताबिक कई प्राइवेट बिल्डरों ने अपने दफ्तरों में ही इस गोरखधंधे को अंजाम देना शुरू कर दिया है, जिसके चलते वह दफ्तर में ही निवेशक के ऐसे कागजों पर हस्ताक्षर करवाते हैं जैसे वे सरकारी काम कर रहे हों। राज्य भर में प्राइवेट बिल्डरों के ऐसे गोरखधंधे को देखकर निवेशकों में भी निराश पाई जा रही है।
प्रापर्टी डीलर भी कई बिल्डरों की कारगुजारी से परेशान
राज्य में कई बिल्डरों के निवेशकों से ट्रांसफर फीस के गोरखधंधे से कई प्रापर्टी कारोबारी भी परेशान हैं क्योंकि डीलर को प्रापर्टी बेचने पर बिल्डर से अच्छी-खासी कमीशन मिलती है और कुछ समय बाद उक्त प्रापर्टी में जब कुछ मुनाफा होता है तो उक्त डीलर फिर निवेशक की प्रापर्टी को बेच कर निवेश को कुछ मुनाफा दिलवाता है ताकि उसका निवेशक के ऊपर अपना विश्वास बना रहे।
सूत्रों के मुताबिक जब ट्रांसफर फीस के गोरखधंधे की बात आती है तो प्रापर्टी कारोबारी भी कमीशन के चक्कर में बिल्डर को बोलने में नाकाम दिखते हैं क्योंकि ट्रांसफर फीस तो खुद निवेशक की जेब से जानी होती है न कि प्रापर्टी कारोबारी की जेब से, उलटा प्रापर्टी कारोबारी को तो प्रापर्टी खरीदने व बेचने को लेकर 2 बार कमीशन मिलती है। नाम न छापने की खातिर कुछ प्रापर्टी कारोबारियों ने बताया कि निवेशकों से लाखों रुपए की ट्रांसफर फीस लेना गलत है और बिल्डरों को ऐसा गोरखधंधा बंद कर निवेशकों के ऊपर अपना विश्वास बनाना चाहिए।
निवेशकों को भी भारी परेशानी
राज्य भर में चल रहे ऐसे गोरखधंधे को लेकर निवेशकों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रापर्टी खरीदने व बेचने के समय उन्हें दोनों बार प्रापर्टी कारोबारियों को कमीशन देनी पड़ती है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसे प्रापर्टी कारोबारियों ने भी राज्य भर में कुछ अपना ऐसा मकड़जाल बिछाया है जो कि कमीशन के साथ-साथ निवेशक को टोपी डालने का खेल खेलते हैं। इसके बाद प्रापर्टी ट्रांसफर करवाने पर उसे ट्रांसफर फीस के नाम पर बिल्डर की मार झेलनी पड़ती है, जिसे देख कर निवेशकों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। जो मुनाफा उन्होंने कमाया होता है, उसमें आधा तो कमीशन, प्रापर्टी कारोबारियों की टोपी व ट्रांसफर फीस में चला जाता है।

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