Buland kesari/अमृतसर : लगातार बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग व गुरु नानक देव अस्पताल ने जरूरी इंतजाम कर लिए हैं। सरकारी अस्पतालों में एमरजैंसी स्थिति से निपटने के लिए जरूरी दवाओं का स्टॉक उपलब्ध करवा दिया गया है, वहीं जरूरत पड़ने पर सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों को 24 घंटे ड्यूटी पर रहने के आदेश दिए गए हैं। विभाग ने हर स्थिति से निपटने के लिए 30 मैडीकल टीमें बनाई हैं और वरिष्ठ डॉक्टरों को बाढ़ से प्रभावित होकर आने वाले मरीजों की खुद निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार लगातार हो रही बारिश के कारण अमृतसर में रावि और ब्यास दरिया उफान पर हैं। दावा किया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग और मैडीकल शिक्षा एवं खोज विभाग के अधीन चलने वाले गुरु नानक देव अस्पताल, सरकारी टी.बी. अस्पताल, सरकारी ई.एन.टी. अस्पताल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए पूरे इंतजाम कर लिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी सीनियर मैडीकल अधिकारियों को अलर्ट पर रहने के आदेश दिए हैं और एमरजैंसी स्थिति के लिए आवश्यक दवाइयां रखने को कहा है। इसके अलावा सुबह, दोपहर और शाम को डॉक्टरों के नेतृत्व में विशेष टीमों के गठन के आदेश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही जिले में 15 रैपिड रिस्पांस टीमें भी बनाई गई हैं।
सिविल सर्जन डा. किरनदीप कौर ने बताया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से अलर्ट पर हैं। ज़िले में लगभग 80 सरकारी एम्बुलैंस को भी अलर्ट पर रखा गया है। स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तत्परता से काम कर रहा है। अधिकारियों को 24 घंटे फ़ोन के जरिए वरिष्ठ अधिकारियों के संपर्क में रहने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा सभी अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अस्पतालों में जरूरी व्यवस्थाओं पर नजर रखने के लिए भी कहा गया है। इसके अलावा सरकारी गुरु नानक देव अस्पताल के मैडीकल सुपरिंटैंडैंट डा. कर्मजीत सिंह ने बताया कि अस्पताल में जरूरी प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। एमरजैंसी स्थिति के लिए सभी तरह की दवाओं का स्टॉक पूरी मात्रा में उपलब्ध है। ब्लड ऑक्सीजनेशन का प्रबंध भी पूरा कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि बाढ़ से आने वाले मरीजों पर वरिष्ठ डॉक्टरों को भी नजर रखने को कहा गया है।
उधर सरकारी मैडीकल कॉलेज के प्रिंसीपल डायरैक्टर डा. राजीव देवगन ने कहा कि सरकारी मैडीकल कॉलेज के अधीन सभी अस्पतालों को आदेश दिए गए हैं कि सीनियर अधिकारी 24 घंटे फोन पर उपलब्ध रहें। अगर कोई स्थिति बनती है तो सीनियर अधिकारी खुद आकर स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभार संभालेंगे। डा. देवगन के अनुसार सरकारी अस्पतालों में प्रबंध पूरे हैं और खासकर दवाओं का स्टॉक और टैस्टिंग का प्रबंध भी किया गया है। डा. देवगन ने कहा कि सरकारी मैडीकल कॉलेज प्रशासन पूरी तत्परता से अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।
जिला स्तरीय सिविल अस्पताल में किए गए मुकम्मल प्रबंध
जिला स्तरीय सिविल अस्पताल के सीनियर मैडीकल अधिकारी एवं प्रभारी डा. स्वर्णजीत धवन ने बताया कि बाढ़ को देखते हुए आज अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों को विशेष निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कर्मचारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि बाढ़ से प्रभावित कोई भी मरीज अस्पताल में आता है तो उस पर विशेष निगरानी रखते हुए उपचार किया जाए। इसके अलावा एमरजैंसी व ओ.पी.डी. में आवश्यक दवाइयों का स्टॉक भी उपलब्ध करवा दिया गया है। अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक में रक्त की कोई कमी नहीं है। सुबह, दोपहर व शाम के लिए डॉक्टरों व कर्मचारियों की विशेष टीमें बनाई गई हैं। जिला स्तरीय सिविल अस्पताल पूरी तरह अलर्ट पर है।
बाढ़ के मद्देनजर सांप काटने के मामले सामने आने लगे
जिले में बाढ़ के मद्देनजर सांप काटने के मामले सामने आने लगे हैं। गुरु नानक देव अस्पताल में हर दिन सांप काटने के दो से तीन मामले सामने आ रहे हैं। अस्पताल के मैडीकल सुपरिंटैंडैंट डा. कर्मजीत सिंह ने कहा कि अस्पताल प्रशासन सांप काटने के पीड़ितों का मुफ्त इलाज कर रहा है। पंजाब सरकार अस्पताल में मरीजों को बेहद कीमती सांप काटने का इंजैक्शन मुफ्त उपलब्ध करवा रही है। अस्पताल प्रशासन के पास सांप काटने से बचाव के लिए 2000 से अधिक इंजैक्शन उपलब्ध हैं। दूसरी तरफ जिला स्तरीय सिविल अस्पताल प्रभारी डा. स्वर्णजीत धवन ने कहा कि अस्पताल में सांप काटने के इंजैक्शन उपलब्ध हैं और इसके लिए एक विशेष टीम का गठन किया जा रहा है और सांप काटने वाले मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
भारी बारिश से स्कूलों में घुसा पानी
जिले में भारी बारिश के कारण आज अधिकतर सरकारी स्कूलों में पानी भर गया। अधिकतर स्कूलों में आज कम ही विद्यार्थी आए हैं। इसके अलावा कई अध्यापक भी स्कूलों में नहीं पहुंचे हैं। पानी के कारण स्कूल के मैदान और कमरों के बाहर पानी ही पानी दिखाई दिया। कई अध्यापकों ने बताया कि भारी बारिश के कारण विद्यार्थियों की संख्या न के बराबर रही है। अगर आगे भी ऐसे ही हालात रहे तो सरकारी इमारतों को पानी ज्यादा नुक्सान पहुंचा सकता है।

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