Buland Kesari/स्मार्ट सिटी जालंधर का जुलूस निकाल कर रख दिया है यहां के नगर निगम और जिला प्रशासन ने! बड़े-बड़े दावों और करोड़ों के बजट वाली इस ‘स्मार्ट सिटी’ की असली तस्वीर देखनी हो, तो बीएमसी चौक (BMC Chowk) से लेकर बस स्टैंड तक की ग्रीन बेल्ट पर चले जाइए।
जिस जगह को शहर की सुंदरता और पर्यावरण के लिए ‘ग्रीन बेल्ट’ बनाया गया था, आज वह जगह नगर निगम की नाकामी की जीती-जागती मिसाल बन चुकी है।
इस पूरे रास्ते पर टैक्सी वालों और देसी दवाई बेचने वालों ने अवैध कब्जा कर लिया है।
हालात यह हैं कि आम जनता और आस-पास के प्राइवेट ऑफिसों में काम करने वाले लोग अपनी गाड़ियां तक खड़ी नहीं कर पा रहे हैं।
## टैक्सी माफिया का ‘अपना’ राज, आम लोग बेहाल:
ग्रीन बेल्ट की इस कीमती जगह को टैक्सी वालों ने अपना प्राइवेट अड्डा बना लिया है। वहां सिर्फ और सिर्फ उनकी ही कमर्शियल गाड़ियां लाइन से खड़ी रहती हैं। अगर कोई आम शहरी या ऑफिस जाने वाला शख्स अपनी गाड़ी वहां लगाने की कोशिश करता है, तो ये टैक्सी वाले उनसे बदतमीजी करते हैं और गाड़ी खड़ी नहीं करने देते। प्राइवेट ऑफिसों का स्टाफ और वहां आने-जाने वाले लोग रोज इस मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
## ⛺ ग्रीन बेल्ट में खुल गए देसी दवाइयों के टेंट:
सितम यह है कि खुली ग्रीन बेल्ट पर बड़े-बड़े टेंट लगाकर देसी दवाइयां बेचने वालों ने अपने पक्के ठिकाने बना लिए हैं। इस वजह से पूरा इलाका एक सस्ते बाजार जैसा दिखने लगा है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे इस खेल ने शहर के सबसे मुख्य और व्यस्त रास्ते का जनाजा निकाल दिया है।
## ❓ नगर निगम के पास कोई जवाब नहीं!
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि नगर निगम किस आधार पर खामोश बैठा है?
* किस कानून या परमिशन के तहत इन टैक्सी वालों को ग्रीन बेल्ट पर टैक्सी स्टैंड खोलने दिया गया?
* किस अधिकारी ने ग्रीन बेल्ट पर टेंट लगाकर दवाइयां बेचने की अनुमति दी?
जब इस बारे में नगर निगम से जवाब मांगा जाता है, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं होता। अधिकारी अनजान बनने का नाटक करते हैं, जबकि जमीनी हकीकत से साफ जाहिर है कि प्रशासन की मिलीभगत या लापरवाही के बिना इतना बड़ा कब्जा मुमकिन ही नहीं है।
## स्मार्ट सिटी के नाम पर जालंधर का जुलूस:
यह किसी स्मार्ट सिटी का नजारा नहीं, बल्कि उसके नाम पर एक गहरा धब्बा है! एक तरफ जिला प्रशासन शहर को डिजिटल और स्मार्ट बनाने के दावे करता है, वहीं दूसरी तरफ शहर की सबसे मुख्य सड़क पर कब्जा माफिया राज कर रहा है।
जालंधर के लोग अब यह पूछ रहे हैं कि क्या इसी ‘जुलूस’ को देखने के लिए उन्होंने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर टैक्स दिया था?
आम जनता की मांग है कि जिला प्रशासन और नगर निगम तुरंत इस अवैध कब्जे पर एक्शन ले, ग्रीन बेल्ट को इन कब्जाधारियों से मुक्त करवाए, और आम लोगों के लिए पार्किंग व रास्ता बहाल करे।

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