Buland kesari/पंजाब के लुधियाना में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत नूरपुर बेट में स्थापित बूचड़खाना (carcass utilisation plant) 2021 से स्थानीय निवासियों के विरोध के कारण बंद पड़ा है। हालांकि, नगर निगम (MC) ने इसे एक सप्ताह के लिए चालू किया था, जिसके एवज में अब ठेकेदार को 12.25 लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा।
इतना ही नहीं, ठेकेदार ने प्लांट पर सुरक्षा गार्ड रखने का खर्च उठाने से भी इनकार कर दिया है, जिसके बाद नगर निगम अब गार्ड नियुक्त करेगा। इस पर सालाना 6.38 लाख रुपए का खर्च आएगा। वित्त एवं एग्रीमेंट समिति (F&CC) के सदस्यों ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
विरोध के कारण शुरू नहीं हो पाया प्लांट नगर निगम ने मृत जानवरों के निपटारा के लिए नूरपुर बेट में यह प्लांट स्थापित किया था। इसका उद्देश्य आसपास के क्षेत्र और निवासियों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना था। यह काम मेसर्स एस.डी इंटरप्राइजेज को सौंपा गया था। प्लांट का निर्माण 30 मई, 2021 को पूरा हो गया था और ठेकेदार को निर्माण कार्य का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया था।
2021 में चालू किया जाना था प्लांट गौरतलब है कि इस प्लांट को 2021 में ही चालू किया जाना था, लेकिन स्थानीय लोगों के भारी विरोध के कारण ऐसा नहीं हो सका। नगर निगम ने पुलिस की मदद से तीन बार प्लांट को चालू करने की कोशिश की, लेकिन हर बार विरोध हुआ, जिसके कारण झड़पें हुईं और एफआईआर भी दर्ज की गई। लोगों ने इस विरोध के पीछे सामाजिक और भावनात्मक कारण बताए।
कोर्ट में भी है मामला कर्नल (रिटायर्ड) जसजीत सिंह गिल द्वारा प्लांट को चालू करने के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में एक मामला भी लंबित है। पंजाब सरकार द्वारा 17 अगस्त, 2024 को प्लांट को चालू करने में आ रही कठिनाइयों पर विचार करने और सुझाव देने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया था।
NGT के सख्त रवैये को देखते हुए नगर निगम ने कमिश्नर कार्यालय, लुधियाना के मौखिक आदेश पर प्लांट को फिर से शुरू करने की पहल की गई थी। 4 जनवरी 2024 को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ठेकेदार कुशल श्रमिकों के माध्यम से प्लांट को दो महीने के लिए ट्रायल के तौर पर चलाएगा। ट्रायल के दौरान होने वाला खर्च नगर निगम के फंड से वहन किया जाएगा।

इसके बाद ठेकेदार ने 14 जनवरी 2024 को प्लांट चलाना शुरू कर दिया। हालांकि, 25 जनवरी 2024 की शाम को तत्कालीन सांसद रवनीत बिट्टू के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने फिर से प्लांट चलाने का विरोध किया और भारी हंगामे के बीच प्लांट को बंद कर दिया गया। बिट्टू ने प्लांट को ताला लगा दिया था। बिट्टू पर उस समय चौकीदार के बयानों पर FIR भी दर्ज हुई थी।
सुरक्षा गार्ड का खर्च भी नगर निगम देगा ठेकेदार ने प्लांट के रखरखाव के लिए दो सुरक्षा गार्डों को स्थायी रूप से रखा था। उल्लेखनीय है कि ठेकेदार नूरपुर बेट में स्थापित प्लांट को 7 वर्षों तक चलाने के लिए जिम्मेदार था और प्लांट के संचालन के दौरान होने वाले सभी खर्चों को ठेकेदार को ही वहन करना था हालांकि क्षेत्र के निवासियों के विरोध के कारण, यह प्लांट अभी तक चालू नहीं हो सका है। ठेकेदार ने बंद प्लांट का खर्च उठाने में असमर्थता जताई है।
क्षेत्र के निवासियों के विरोध के कारण इस प्लांट को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का भी प्रस्ताव है क्योंकि स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बना यह प्लांट नगर निगम की संपत्ति है, इसलिए इसका रखरखाव भी उसकी जिम्मेदारी है।
अधिकारियों का तर्क नगर निगम के एक अधिकारी ने दावा किया कि यह मामला पहले पिछले साल अक्टूबर में भेजा गया था, लेकिन सदस्यों ने इसे लंबित रखा। इसलिए वे इसे फिर से लाए। ठेकेदार द्वारा किया गया खर्च 12.25 लाख रुपए है, जबकि नगर निगम द्वारा साइट पर 3 सुरक्षा गार्डों की तैनाती पर प्रति वर्ष 6.38 लाख रुपए का खर्च आएगा। उन्होंने कहा कि वे राशि का भुगतान करेंगे।

Disclaimer:Buland Kesari receives the above news from social media. We do not officially confirm any news. If anyone has an objection to any news or wants to put his side in any news, then he can contact us on +91-98880-00404.








