Buland kesari ;- अमृतसर : रविवार को अमृतसर जिला आबकारी विभाग द्वारा अमृतसर की प्रमुख बारों पर इंस्पैक्शन की। यह कार्रवाई सहायक कमिश्नर अमृतसर रेंज महेश गुप्ता व जिला आबकारी अधिकारी अमृतसर 1-2 ललित कुमार के निर्देश पर की गई है। इस कार्रवाई के लिए इंस्पेक्टर रविंदर सिंह बाजवा के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया, जिसमें सहायक उपनिरीक्षक काहन सिंह, जसपाल मसीह के साथ सुरक्षा कर्मचारियों की टीम शामिल थी। इस दौरान अमृतसर पूर्व क्षेत्र की प्रमुख बारों का निरीक्षण किया। एक्साइज विभाग की चैकिंग समय बारों में हड़कंप मच गया।
बताया जाता है कि बीते दिन अमृतसर की फतेहगढ़ चूड़ियां रोड पर एक घर नुमा स्थान पर भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की गई है, इसकी मात्रा 500 बोतलें के करीब थी। इससे भी बड़ी बात है कि यहां उस ब्रांड की महंगी शराब बरामद की गई है जो आम आदमी नहीं खरीदता। इनके खप्तकार बड़े होटल अथवा बारों में ‘पैग’ के हिसाब से पीते हैं। इसको लेकर अनुमान लगाया जा रहा था कि इस प्रकार की शराब बड़े होटलों की बारों में ही बेची जाती है। अधिक महंगी शराब होने के कारण इस पर टैक्स भी अधिक पड़ता है। किसी पर तरह यदि यही शराब दो नंबर में इन स्थानों पर पहुंच जाए तो सरकार के रैवेन्यू को भारी नुक्सान होने का खतरा है। वहीं शराब के वह ठेकेदार भी खतरे में आ जाएंगे जो करोड़ों रुपए सरकार को टैक्स देते हैं ।
सहायक कमिश्नर द्वारा लाइसैंस धारकों को दी गई सख्त चेतावनी
सहायक कमिश्नर आबकारी महेश गुप्ता ने बताया कि ‘हार्ड बार’ व ‘बीयर बार’ लाइसैंसधारियों को आबकारी मानदंडों और नियमों का पालन करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कहा गया है कि यदि इन बारों में बिना हिसाब, स्टॉक से अधिक अथवा कम शराब या कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो लाइसैंस धारकों के खिलाफ पंजाब शराब लाइसैंस नियम, 1956 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इन स्थानों पर की इंस्पैक्शन
– फॉरेस्ट रिज़ॉर्ट द बाग
-कबीला बार
-शीशो बार
-आरआरवी ड्राफ्ट बीयर बार
-बार-बी-क्यू नेशन एंड बार
आबकारी निरीक्षणों के दौरान इन चीजों पर रखा फोक्स
जिला आबकारी अधिकारी ललित कुमार ने बताया की आबकारी विभाग द्वारा उपरोक्त सभी मामलों को देखते हुए कई मुख्य चीजों पर फोक्स रखा गया है, ताकि किसी प्रकार से अवैध शराब माफिया को सरकार के रैवेन्यू से खेलने का मौका न मिले।
-बिक्री स्टॉक के रजिस्टर में एक्यूरेसी व अप-टू-डेट।
-शराब ब्रांडों की फिजिकल वेरीफिकेशन।
-क्रॉस चैकिंग जिसमें बेचे गए ब्रांड पंजीकृत स्टॉक से परस्पर मेल।
-बिलिंग और शराब उत्पादों की प्रामाणिकता की पुष्टि।
-शराब का मौजूद पूरा स्टॉक उचित आबकारी परमिट वाले अधिकृत थोक विक्रेताओं/सप्लायरों से खरीद।
-लाइसैंसधारकों द्वारा समय पर दाखिल की गई वैट रिटर्न।
-शराब की खाली बोतलों का समय-समय पर निपटान किया जाना चाहिए ताकि उन्हें दोबारा भरने की आवश्यकता न पड़े।
रेड नहीं चैंकिंग है यह : ललित कुमार
एक प्रश्न के उत्तर में जिला आबकारी अधिकारी ललित कुमार ने कहा कि सामान्य तौर पर यदि किसी भी बार पर चैकिंग होती है तो इसके लिए अधिकतर इसे ‘रेड’ समझा जाता है। उन्होंने कहा की रेड और इंस्पैक्शन के अंतर स्पष्ट करते कहा कि रेड उस समय की जाती है, जब किसी की शिकायत/नेगेटिव इनफॉरमेशन आती है, जबकि ‘चैकिंग’ विभाग का सामान्य अधिकार है, जो सतर्कता और आने वाले संभावित खतरे को देखते हुए होती है।

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