सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार ने एक बड़ी और चौंकाने वाली मांग की है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से जनहित याचिका (PIL) की व्यवस्था को खत्म करने का आग्रह किया है।
इस मांग के पीछे सरकार ने दुरुपयोग का तर्क दिया है। केंद्र सरकार की इस मांग पर आज सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई और CJI सूर्यकांत की ओर से जवाब भी दिया गया। केंद्र सरकार का कहना है कि जनहित याचिका को शुरू करने के पीछे का मकसद पूरा हो चुका है और अब इसका लोग दुरुपयोग करने लगे हैं तो इसे खत्म किया जाए।
केंद्र सरकार की ओर से दायर याचिका को सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने पेश किया। वहीं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही है। बेंच में CJI सूर्यकांत के अलावा जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी वराले, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।
वहीं ई-फाइलिंग सिस्टम ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लोगों की पहुंच को आसान बना दिया है। एक लेटर लिखकर लोग सीधे अदालत पहुंच सकते हैं। आजकल PIL प्रेरित होकर दायर की जाती हैं, यानी PIL दायर किसी के द्वारा की जाती हैं और इनके दायर होने की वजह कुछ और ही होती है। PIL गरीबी, अशिक्षा, विकलांगता या सामाजिक बहिष्कार के कारण अदालत का दरवाजा खटखटाने में अक्षम लोगों के लिए शुरू हुई थी, लेकिन आज देश में स्थिति बदल गई है।

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