बुलंद केसरी न्यूज, मलोटः मंगलवार देर शाम मुक्तसर साहिब में हुए Bus Accident में नहर में बहे कुछ लोगों की तलाश के लिए प्रशासन द्वारा अभी भी प्रयास किये जा रहे हैं। वहीं नहर में शवों को ढूंढने के लिए NDRF की टीमें लगी हुई हैं। बता दें कि मंगलवार देर शाम न्यू दीप प्राइवेट बस कंपनी की एक बस बारिश में तेज रफ्तार के चलते मुक्तसर कोटकपूरा रोड पर गांव वडिंग के पास सरहंद फीडर नहर में रेलिंग तोड़ते हुए गिर गई थी। जिसमें करीब 8 लोगों की मौत हो गई थी।
इस संबंधी में तार सिंह निवासी गांव कट्टियांवाली ने पुलिस को शिकायत दी थी, जिसके बाद पुलिस ने बस को लापरवाही से चलाने के आरोप में ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस को दी शिकायत में तार सिंह ने बताया कि उसकी छोटी बहन प्रीतो कौर तरनतारन से उसे मिलने के लिए गांव कट्टियांवाली में आई थी। उसे छोड़ने के लिए वह करीब सुबह 11 बजे गांव कट्टियांवाली से मलोट बस स्टैंड आए। यहां से हम न्यू दीप बस जो अमृतसर जानी थी, में बैठ गए।
इस दौरान बस का कंडक्टर ड्राइवर को कह रहा था कि खुशपिंदर सिंह बस को तेजी से चलाए। बस को मुक्तसर से बाहर निकाल लेना। यहां के बस स्टैंड में नहीं जाना है। इस पर तो ड्राईवर खुशपिंदर सिंह कंडक्टर को बोला कि हरजीत सिंह तू एक बार सीटी मार, फिर देख में बस कैसे पहुंचाता हूं। इसके बाद बस स्टैंड से निकलते ही ड्राइवर ने तेजी व लापरवाही से बस भगानी शुरू कर दी। रास्ते में सड़क खराब होने व तेज रफ्तार होने के कारण यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर को कहा कि इतनी तेजी से बस न चलाए। इस पर उन्होंने कहा कि हमारे पास टाइम नहीं है। आप चुप-चाप बैठ जाएं। इस बीच जब बस झबेलवाली नहर के पास पुल पर पहुंची तो वह ड्राइवर खुशपिंदर सिंह के कंट्रोल से बाहर हो गई और सरहंद फीडर नहर की रेलिंग तोड़ती हुई नहर में लटक गई।
बता दें कि आज से 30 साल पहले इसी तारीख को इसी जगह पर ऐसा ही हुआ था हादसा, 85 की मौत हो गई थी, जबकि एक पुलिसकर्मी तेजा सिंह ही जिंदा बचा था। वहीं घटना के बाद पुलिस कर्मी तेजा सिंह ने बताया कि 19 सितंबर 1993 को पंजाब रोडवेज मुक्तसर डिपो की एक बस जम्मू कटरा से मुक्तसर के लिए आ रही थी। क्योंकि उस समय जिला फरीदकोट था और वह Faridkot अपने एक सरकारी कार्य निपटाकर फरीदकोट से उस पर सवार हुआ था। कोटकपूरा से मुक्तसर आते हुए रास्ते में रोडवेज की बस व एक प्राइवेट कंपनी की बस का ड्राइवर तेज रफ्तार से आगे पीछे बसें दौड़ा रहे थे।
उन्होंने बताया कि जब यह बसें गांव वडिंग के आगे राजस्थान व सरहंद फीडर नहरों के पास पहुंची तो यात्रियों से खचाखच भरी रोडवेज की बस राजस्थान फीडर नहर में गिर गई। समय करीब साढ़े 4.30 से 5 के बीच का था। मैं तैरना जानता था और थोड़ी दूर तक तैर कर नहर की पटरी के पास पहुंचा तो वहां मौजूद लोगों ने मुझे नहर से बाहर निकाला। उस समय मैं अकेला ही इस हादसे में बचा था। जबकि 85 लोगों के शव नहर में से बरामद हुए थे।
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