Buland kesari/Coldrif cough syrup ban: पंजाब में बच्चों में खांसी-जुकाम के इलाज के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ (Coldrif) अब गंभीर विवादों में घिर गया है। सिरप के सेवन से कई राज्यों में बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सहित कई प्रमुख राज्यों ने तत्काल प्रभाव से इस दवा की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने दवा के नमूनों को जाँच के लिए भेज दिया है और माता-पिता को इस सिरप का इस्तेमाल तुरंत बंद करने की चेतावनी जारी की है। यह घटना देश की दवा सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
पंजाब और महाराष्ट्र ने की सख्त कार्रवाई पंजाब सरकार ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप की बिक्री और उपयोग पर रोक लगा दी है। वहीं, महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने कोल्ड्रिफ सिरप के बैच नंबर SR 13 की बिक्री, वितरण और उपयोग पर तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। FDA ने लोगों से अपील की है कि जिनके पास यह सिरप मौजूद है, वे इसकी सूचना स्थानीय औषधि नियंत्रण अधिकारियों को दें और इसे किसी भी हालत में इस्तेमाल न करें।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारें भी सतर्क उत्तर प्रदेश ड्रग्स विभाग ने इस कफ सिरप की गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए हैं। राज्य भर के औषधि निरीक्षकों को कोल्ड्रिफ सिरप के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने भी सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट जारी किया है। उन्होंने कहा है कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी या सर्दी की दवा नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारें भी सतर्क उत्तर प्रदेश ड्रग्स विभाग ने इस कफ सिरप की गुणवत्ता की जांच के आदेश दिए हैं। राज्य भर के औषधि निरीक्षकों को कोल्ड्रिफ सिरप के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने भी सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट जारी किया है। उन्होंने कहा है कि दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी या सर्दी की दवा नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है।
कई राज्यों में बच्चों की मौत अब तक मिली रिपोर्टों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 16 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि राजस्थान में तीन बच्चों की जान गई है। प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि इन मौतों का संबंध कोल्ड्रिफ सिरप के सेवन से है। इन घटनाओं के बाद देशभर के स्वास्थ्य विभागों और ड्रग नियंत्रण एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। निर्माण कंपनी पर लगा गंभीर आरोप कोल्ड्रिफ कफ सिरप का निर्माण तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स (ShriSun Pharmaceuticals) कंपनी द्वारा किया जाता है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के उत्पादन केंद्र में कुल 350 गंभीर खामियां पाई गई हैं, जिनमें 39 क्रिटिकल (गंभीर) और 325 मेजर (महत्वपूर्ण) खामियां शामिल हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सिरप में 48.6 प्रतिशत डायएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol – DEG) पाया गया, जो एक विषैला रसायन है। यह रसायन शरीर में जाने पर किडनी फेलियर, उल्टी, सिर दर्द, कोमा और मौत तक का कारण बन सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने जनता को चेतावनी दी है कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप का इस्तेमाल तुरंत बंद करें।
यदि किसी व्यक्ति या दवा विक्रेता के पास यह सिरप मौजूद है, तो उसे निकटतम औषधि नियंत्रण अधिकारी को सौंप दें। फार्मासिस्टों और डॉक्टरों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे इस सिरप को न बेचें और न ही किसी मरीज को सुझाएं। Coldrif cough syrup ban: केंद्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) को देशभर में जांच करने के आदेश दिए हैं। साथ ही तमिलनाडु की दवा कंपनी से सभी बैचों के नमूने मांगे गए हैं। यदि दोष सिद्ध होता है तो कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप पर प्रतिबंध और उससे हुई बच्चों की मौत की घटनाएं भारत में दवा निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती हैं।

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