जालंधर तहसील आरटीओ कार्यालय में तैनात एक क्लर्क का नया कारनामा सामने आया है, जिसने सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि उक्त क्लर्क ने सरकारी कामकाज के लिए नए निजी करिंदे रखे हुए हैं, जो अवैध रूप से जनता से वसूली कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, ये दोनों निजी करिंदे तहसील से बाहर एक चाय की दुकान पर बैठकर परमिट और अन्य दस्तावेज़ों से जुड़े काम पकड़ते हैं। इसके बाद संबंधित क्लर्क घर पर बैठकर कंप्यूटर के माध्यम से काम पूरा करता है। बताया जा रहा है कि क्लर्क को स्वयं कंप्यूटर का पर्याप्त ज्ञान नहीं है, इसलिए वह ओटीपी (OTP) लेकर सारा काम निजी करिंदों के सहारे करता है।
सूत्रों का कहना है कि क्लर्क ने पूरी उम्र कंप्यूटर चलाए बिना ही निजी करिंदों की मदद से मोटी कमाई की और उसी पैसे को लुधियाना में आलीशान कोठियों व प्रॉपर्टी में निवेश किया। सरकारी सेवा की आड़ में चल रहे इस कथित अवैध नेटवर्क से आम जनता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्लर्क पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है—
“राम नाम जपना, एजेंटों का माल रिश्वत के रूप में अपना।”
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस मामले की जांच करेगा या फिर यह खेल यूँ ही चलता रहेगा। जनता मांग कर रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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