Jalandhar (Buland Kesari):-स्मार्ट सिटी में 1.11 करोड़ से 18 प्लास्टिक बॉटल क्रशिंग मशीनें लगी थीं, जो जागरूकता व देखभाल नहीं होने से शोपीस बनी है। जिन सरकारी दफ्तरों में मशीन लगीं है, यहां लोग इसका उपयोग भी नहीं करते हैं। मशीनें खराब हैं सिर्फ स्क्रीन पर स्मार्ट सिटी का विज्ञापन ही चलता है। निगम दफ्तर, डीसी दफ्तर, सिविल अस्पताल, बस अड्डा परिसर में लगाई गई मशीन की स्क्रीन तो चालू हैं, लेकिन मेंटेनेंस नहीं होने के कारण प्लास्टिक बॉटल की क्रशिंग के लिए उपयोग नहीं हो पा रहीं ।
मालूम हो कि स्वच्छ भारत मिशन में सिटी को सुंदर और प्लास्टिक मुक्त बनाने को प्लास्टिक बॉटल क्रशिंग मशीन की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2021 में सिटी के 18 लोकेशन पर बॉटल क्रशिंग मशीनों की इंस्टॉलेशन कराई, ताकि लोग खाली बोतल को मशीन में क्रश कर सकें। कंपनी ने 1.11 करोड़ रुपए से मशीनों की इंस्टॉलेशन कराई और वर्ष 2025 तक कंपनी को ऑपरेशन एंव मेंटेनेंस का काम करना है, लेकिन कंपनी के मुलाजिम मशीनों की नियमित जांच नहीं करते हैं। मशीनों की केवल स्क्रीन चाक रही लेकिन काम कोई नहीं हो रहा ।
लोग जागरूक भी नहीं कि इन मशीनों का उपयोग क्यों और कैसे करें। यहां तक की निगम परिसर की मशीन की भी केवल स्क्रीन पर ही सिटी को स्मार्ट दिखा रही, लेकिन मशीन से लोग कभी भी बॉटल क्रशिंग नहीं करते हैं। इतना जरूर है कि स्क्रीन पर स्मार्ट सिटी का विज्ञापन चलता है।
इस संबंध में प्रोजेक्ट प्रभारी सुरजीत सैनी ने कहा कि सिटी में 18 बॉटल क्रशिंग मशीनों लगीं हैं जो चल रहीं हैं उनका ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस का काम जारी है। जहां पर भी मशीन खराब होती है, तो कंपनी के मुलाजिम मशीन को ठीक करने के लिए पहुंच जाते हैं। बरसात के दौरान लोग मशीन को बंद कर देते हैं। निगम परिसर में लगी प्लास्टिक बॉटल क्रशिंग मशीन।
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