Buland kesari / जालंधर ;भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किए गए MLA Raman Arora की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। एक के बाद एक उनके विधायक रहते हुए किए गए फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। ताजा मामला यह है जिसमें नाज सिनेमा के दुकान मालिकों द्वारा विजिलेंस के एस.एस.पी. हरप्रीत सिंह मंडेर को शिकायत सौंप कर कहा कि MLA Raman Arora द्वारा अपने एक रिश्तेदारों के नाम पर 2 दुकानों की रजिस्ट्री तो करवाई गई लेकिन अब तक उन्हें बेची गई दुकानों की पूरी पेमैंट नहीं की गई है। सिर्फ रजिस्ट्री पर चैक नंबर डलवाकर गुड फेथ में रजिस्ट्री करवा ली गई है। विजिलेंस ने उक्त शिकायत पर मामले की जांच शुरू की है।
सूत्रों के मुताबिक विजीलेंस को उक्त शिकायत हिंदू परिवार से संबंध रखते दिनेश कत्याल के भाई प्रवेश कत्याल द्वारा दी गई है, जोकि शहर के एक नामी हिंदू रसूखदार परिवार से संबंध रखते हैं। पीड़ित प्रवेश कत्याल द्वारा विजिलेंस को दी गई शिकायत में कहा गया कि उनके द्वारा नाज सिनेमा में मार्कीट बनाई गई थी, जिसमें 2 दुकानें MLA Raman Arora द्वारा अपने रिश्तेदार को दिलवाई गई थी, जिसका पहले बयाना किया गया, बाद में रजिस्ट्री करवाई गई थी।
हालांकि रजिस्ट्री कराने को लेकर बयाने के मुताबिक वक्त था, लेकिन MLA Raman Arora द्वारा खुद अपने रिश्तेदार को 2 दुकानें दिलाने के नाम पर गुड फेथ में रजिस्ट्री पहले करवा ली गई और मौखिक तौर पर विश्वास जताते हुए कहा गया कि रजिस्ट्री में जो बैंक पेमैंट होनी है, उसके चैक नंबर डलवा लिए जाएं और चैक की पेमैंट तय समय पर ही होगी। मामले में पेंच तब फंसा जब पीड़ितों द्वारा विधायक रमन अरोड़ा के रिश्तेदार के नाम पर रजिस्ट्री तो करवा दी गई, लेकिन अब तक चैक नहीं पास नहीं करवाए गए और पेमैंट के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
दरअसल हुआ यह कि विधायक रमन अरोड़ा द्वारा पीड़ित प्रवेश कत्याल को यह कहकर दुकानों का सौदा करवाया गया कि दुकानें उनके रिश्तेदार ने लेनी है। जिसका सौदा खुद विधायक ने बीच में एक रसूखदार व्यक्ति होने के नाते करवाया। लेकिन जब सौदा हो गया तो रजिस्ट्री कराने के टाइम पर उनके द्वारा बैंक पेमैंट (कलैक्टर रेट अमाउंट) के हिसाब से जो दुकानों की कीमत बनती थी, उसने चैक कटवाकर उसके नंबर डलवा दिया थे और कुछ कैश पेमैंट भी करवाई गई। लेकिन पैंच बैंक पेमैंट न होने का फंस गया है। इसी बीच विधायक रमन अरोड़ा को भ्रष्टाचार के आरोप में विजिलेंस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया तो पीड़ित डर गए कि उनके द्वारा दुकानों की रजिस्ट्री तो करवा दी गई है, लेकिन पैसे पूरे नहीं मिले हैं। जिससे उनके द्वारा विजिलेंस को इस संबंधी शिकायत करना मुनासिब समझा है।
सनद रहे कि विजिलेंस को विधायक रमन अरोड़ा की बेनामी संपत्ति के बारे जानकारी रैवेन्यू रिकॉर्ड से मिली हैं, वह करोड़ों-अरबों रुपए की बताई जा रही हैं। अब इतना बड़ा घोटाला होने के चलते पीड़ित प्रवेश कत्याल जोकि खुद एक प्रॉपर्टी कारोबारी एवं डिवैल्पर हैं, उन्हें चिंता हुई कि वह ठगी का शिकार हो गए हैं। उक्त भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद धीरे-धीरे कई पीड़ित सामने आ रहे हैं।
विजिलेंस ने बाकी संपत्तियों की करवाई रजिस्ट्रियों की बैंक पेमैंट की जांच शुरू की
वहीं बता दें कि विधायक रमन अरोड़ा के खिलाफ विजिलेंस को जो शिकायत अब मिली है, उस आधार पर विजिलेंस ने जांच तो मामले की शुरू कर दी है, क्योंकि विजिलेंस को उक्त शिकायत के बाद शक है कि बाकी बेनामी संपत्तियों की रजिस्ट्रियां जोकि रिश्तेदारों एवं दोस्तों के नाम पर है, उन रजिस्ट्रियों में भी बैंक पेमैंट न किए होने की आशंका है। विधायक होते हुए और सरकार में एक रसूखदार नेता होने के चलते लोग विधायक के डर के कारण सामने नहीं आ रहे थे। इसलिए विजिलेंस बाकी रजिस्ट्रियों के बारे भी बारीकी से जांच करने में जुट चुकी है।
एक दुकान की पेमैंट हुई तो दूसरी की पेमेंट पैंडिंग
सूत्रों की मानें तो विधायक रमन अरोड़ा के रिश्तेदार द्वारा एक दुकान की बैंक पेमैंट (कलैक्टर रेट पेमैंट) तो करवा दी गई है, लेकिन दूसरी दुकान की रजिस्ट्री की बैंक पेमैंट (आम भाषा में व्हाइट पेमैंट) नहीं करवाई गई है। जिस संबंधी विजिलेंस को पता चल चुका है, जिसकी जांच की जा रही है।
विजिलेंस के पास पीड़ितों खुद पेश होकर शिकायत दर्ज करवाई- एस.एस.पी मंडेर
वहीं उक्त शिकायत के संबंध में एस.एस.पी विजिलेंस जालंधर रेंज हरप्रीत सिंह मंडेर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उक्त शिकायत खुद पीड़ितों ने विजिलेंस अधिकारियों समक्ष पेश होकर दी है। जिसकी जांच शुरु कर दी गई है। अगर कोई भी जांच दौरान कोई फर्जीवाड़ा या खामियां सामने आई तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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