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निजी संपत्ति पर Supreme Court का ऐतिहासिक फैसला, 1978 के बाद के फैसले को पलटा- SC Decision On Private Property

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Buland Kesari :- Supreme Court Hearing On Private Property: निजी संपत्ति ( प्राइवेट प्रॉपर्टी -Private Property) को सरकार द्वारा अधिग्रहण मामले में Supreme Court ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

Supreme Court के 9 जजों की बड़ी बेंच ने मंगलवार को अपने अहम फैसले में कहा कि सरकार सभी निजी संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकती, जब तक कि सार्वजनिक हित ना जुड़ रहे हों। इसके साथ ही CJI ने 1978 के बाद के फैसले को पलटते हुए यह फैसला सुनाया।

क्या सरकार संविधान के अनुच्छेद 39 (बी) के तहत किसी व्यक्ति या समुदाय की निजी संपत्ति को समाज के नाम पर अपने नियंत्रण में ले सकती है? इस अहम सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बड़ी बेंच ने आज मंगलवार को अपने अहम फैसले में कहा कि सरकार सभी निजी संपत्तियों का इस्तेमाल नहीं कर सकती, जब तक कि सार्वजनिक हित ना जुड़ रहे हों।

सीजेआई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हर निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति नहीं कहा जा सकता है। इससे पहले संविधान पीठ ने इस साल 1 मई को सुनवाई के बाद निजी संपत्ति मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने 9 जजों की बेंच के मामले में बहुमत से अपना फैसला सुनाया। बहुमत के जरिए बेंच ने अपने फैसले में यह व्यवस्था दी है कि सभी निजी स्वामित्व वाले संसाधनों को राज्य द्वारा अधिग्रहित नहीं किया जा सकता है, राज्य उन संसाधनों पर दावा कर सकता है जो सार्वजनिक हित के लिए हैं और समुदाय के पास हैं।इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साल 1978 के बाद के उन फैसलों को पलट दिया जिसमें समाजवादी थीम को अपनाया गया था और फैसला सुनाया गया था कि राज्य आम भलाई के लिए सभी निजी संपत्तियों को अपने अधीन कर सकते हैं। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने बहुमत का फैसला पढ़ते हुए कहा कि नीति निदेशक सिद्धांतों के मुताबिक बने कानूनों की रक्षा करने वाला संविधान का अनुच्छेद 31 (सी) सही है। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, ”अब हम 39 (बी) पर बात करेंगे। 39 (बी) सामुदायिक संपत्ति के सार्वजनिक हित में वितरण की बात करता है। सभी निजी संपत्तियों को सामुदायिक संपत्ति की तरह नहीं देखा जा सकता है। इस बारे में आए कुछ पुराने फैसले एक खास आर्थिक विचारधारा से प्रभावित थे।सीजेआई ने कहा कि आज के आर्थिक ढांचे में निजी क्षेत्र का महत्व है. उन्होंने फैसला सुनाते हुए कहा कि हर निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति नहीं कहा जा सकता है। संपत्ति की स्थिति, सार्वजनिक हित में उसकी जरूरत और उसकी कमी जैसे सवालों से किसी निजी संपत्ति को सामुदायिक संपत्ति का दर्जा मिल सकता है।

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