Buland Kesari/ जालंधर में उपभोक्ता आयोग ने एक अहम फैसले में Apple India Private Limited और उसके सर्विस नेटवर्क को एक आईफोन उपभोक्ता को राहत देने के आदेश दिए हैं। मामला एक ऐसे iPhone 13 Pro Max से जुड़ा था, जिसमें बार-बार तकनीकी खराबियां आने के बाद आखिरकार फोन में आग लगने की घटना सामने आई।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि उसने करीब 1.15 लाख रुपये कीमत का iPhone 13 Pro Max खरीदा था। खरीद के कुछ समय बाद ही फोन में हार्डवेयर संबंधी दिक्कतें आने लगीं। जांच के दौरान “RF front end scan test fail” जैसी तकनीकी खराबी सामने आई, जिसके बाद कंपनी ने फोन बदल दिया।
लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। नया फोन भी कुछ समय बाद डिस्प्ले और ब्लूटूथ संबंधी समस्याओं से खराब हो गया, जिसके चलते दूसरी बार रिप्लेसमेंट दिया गया। इसके बाद तीसरी बार भी डिवाइस में खराबी आई और फिर उसे बदला गया। शिकायतकर्ता के अनुसार जनवरी 2023 में फोन चार्जिंग के दौरान अचानक ओवरहीट हो गया और उसके किनारों से आग निकलने लगी। इस घटना से फोन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और जान-माल का खतरा पैदा हो गया।
फोन को जालंधर स्थित सर्विस सेंटर में जमा कराया गया, जहां जॉब शीट में “जलने की बदबू” और डैमेज की बात दर्ज की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शुरुआत में कंपनी की ओर से रिफंड और मुआवजे का भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में जिम्मेदारी से पीछे हट गए।
दूसरी ओर कंपनी ने आयोग में कहा कि फोन सीमित वारंटी के तहत था और अंतिम नुकसान बाहरी या आकस्मिक कारणों से हुआ। कंपनी ने दावा किया कि फोन में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित नहीं हुआ है। हालांकि आयोग ने कंपनी की इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
जिला उपभोक्ता आयोग, जालंधर ने अपने फैसले में कहा कि एक प्रीमियम मोबाइल फोन का चार महीने के भीतर तीन बार खराब होना सामान्य नहीं माना जा सकता। आयोग ने माना कि बार-बार रिप्लेसमेंट होना ही इस बात का संकेत है कि उत्पाद में अंदरूनी खामियां थीं। आयोग ने यह भी कहा कि अगर फोन का गलत इस्तेमाल हुआ होता तो कंपनी पहले तीन बार रिप्लेसमेंट नहीं देती।
आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि मोबाइल फोन में आग लगना मामूली तकनीकी खराबी नहीं बल्कि गंभीर सुरक्षा खतरा है। ऐसे मामलों में निर्माता कंपनी पर यह जिम्मेदारी होती है कि वह तकनीकी सबूतों के जरिए साबित करे कि उत्पाद में कोई दोष नहीं था, लेकिन कंपनी ऐसा करने में विफल रही।
फैसले में आयोग ने कहा कि डिजिटल युग में मोबाइल फोन एक जरूरी जरूरत बन चुका है और इस तरह की लगातार खराबियों से उपभोक्ता को भारी मानसिक परेशानी और असुविधा होती है।
आयोग ने कंपनी और सर्विस प्रदाता को संयुक्त रूप से आदेश दिया कि शिकायतकर्ता को करीब 1,15,886 रुपये की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस की जाए। इसके अलावा 10 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न और 10 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर भी देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने यह रकम 45 दिनों के भीतर अदा करने का आदेश दिया है, अन्यथा 9 प्रतिशत ब्याज लागू होगा।

Disclaimer:Buland Kesari receives the above news from social media. We do not officially confirm any news. If anyone has an objection to any news or wants to put his side in any news, then he can contact us on +91-98880-00404.








