Buland kesari/कनाडा में चल रही जबरन वसूली और हिंसक वारदातों के पीछे सक्रिय लॉरेंस गैंग के सिंडिकेट ने ब्रिटिश कोलंबिया पुलिस को सीधे चुनौती देते हुए एक लेटर भेजा है। लेटर में गैंग की ओर से दावा किया गया है कि कनाडा में उनके 1000 से अधिक ‘फुट सोल्जर्स’ या ग्राउंड स्तर के शूटर सक्रिय हैं।
लेटर सामने आने के बाद कनाडा के सुरक्षा तंत्र और वहां रह रहे दक्षिण एशियाई समुदाय, खासकर भारतीय और पंजाबी मूल के व्यापारियों में दहशत का माहौल है। यह खुलासा गुरुवार को कनाडा में चल रही एक डिपोर्टेशन सुनवाई के दौरान हुआ।
कनाडाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जबरन वसूली मामलों के एक प्रमुख जांचकर्ता और एडमॉन्टन पुलिस सेवा के जासूस ने इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड के सामने गवाही देते हुए बताया कि ब्रिटिश कोलंबिया के एबॉट्सफोर्ड पुलिस स्टेशन में पिछले साल 13 अगस्त 2025 को यह पत्र पहुंचा था।
लेटर की सामग्री और स्रोतों की जांच
लेटर ने कनाडा में संगठित अपराध के उस नेटवर्क को उजागर किया है, जिसे भारत की जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई से जोड़ा जाता है। कनाडा पुलिस अब इस लेटर की सामग्री और इसके स्रोतों की गहन जांच कर रही है।

लॉरेंस के पत्र में क्या-क्या कहा गया, सिलसिलेवार जानिए…
- 1,000 शूटरों की फौज का दावा: कैनेडियन मीडिया के अनुसार पत्र में सबसे बड़ा और डराने वाला दावा यह किया गया है कि बिश्नोई गैंग ने कनाडा के विभिन्न प्रांतों में अपने पैर पूरी तरह पसार लिए हैं। समूह के पास कनाडा के भीतर ही 1,000 से अधिक फुट सोल्जर्स मौजूद हैं, जो गैंग के एक इशारे पर किसी भी समय, कहीं भी फायरिंग या अन्य हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए तैयार खड़े हैं।
- आपराधिक साम्राज्य की रूपरेखा: पत्र में बिश्नोई गैंग ने अपने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क और संगठन की संरचना की बकायदा रूपरेखा पेश की है। इसमें बताया गया है कि भारत से लेकर कनाडा तक उनका यह सिंडिकेट किस तरह आपस में जुड़ा हुआ है और कनाडाई धरती पर उनकी ताकत कितनी बढ़ चुकी है।
- हर बिजनेस को ‘टैक्स’ देना ही होगा: पत्र में कनाडा के भीतर सक्रिय व्यापारियों और समृद्ध परिवारों को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है। इसमें साफ शब्दों में लिखा गया है कि कनाडा में चल रहे हर एक बिजनेस को गैंग को ‘टैक्स’ (प्रोटेक्शन मनी/जबरन वसूली की रकम) चुकाना ही पड़ेगा।
- आर्थिक लाभ ही मुख्य मकसद: पत्र की भाषा और मांगों से स्पष्ट है कि इस गिरोह का प्राथमिक और एकमात्र उद्देश्य कनाडाई व्यापारियों को डरा-धमकाकर भारी-भरकम रकम वसूलना और वित्तीय लाभ कमाना है। ‘टैक्स’ न देने की सूरत में अंजाम भुगतने की खुली धमकी दी गई है।
- कनाडाई कानून व्यवस्था को सीधी चुनौती: यह पत्र किसी व्यक्ति या व्यापारी को न भेजकर सीधे ‘पुलिस स्टेशन’ के पते पर भेजा गया था। जांचकर्ताओं का मानना है कि ऐसा करके गैंग ने कनाडा की पुलिस और लॉ इंफोर्समेंट एजेंसियों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे सरकारी तंत्र से बिल्कुल नहीं डरते और उनका नेटवर्क बेहद मजबूत है।

कनाडा में जबरन वसूली और गैंग से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां, जानिए..
1. ‘प्रोजेक्ट अल-एक्सटॉर्शन’ और ‘ऑपरेशन कम्युनिटी शील्ड’ की कार्रवाई
पत्र मिलने के बाद कनाडा की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं। एडमॉन्टन पुलिस सेवा के जासूस कॉन्स्टेबल केविन सेंट लुइस ने बताया कि वे ‘प्रोजेक्ट अल-एक्सटॉर्शन’ के तहत काम कर रहे हैं, जो विशेष रूप से अल्बर्टा प्रांत में दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बनाने वाले संगठित अपराधों की जांच कर रहा है।
वहीं, एबॉट्सफोर्ड पुलिस विभाग के सार्जेंट पॉल वॉकर ने पुष्टि की है कि उनकी आंतरिक टास्क फोर्स, जिसे ‘ऑपरेशन कम्युनिटी शील्ड’ नाम दिया गया है, इस पत्र के मूल स्रोत और इसके पीछे के किरदारों की गहनता से तफ्तीश कर रही है। इस पत्र की कॉपियां पूरे कनाडा की पुलिस एजेंसियों के साथ साझा की गई हैं।
2. नए कनाडाई गुर्गों की भर्ती
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला सच सामने आया है कि भारत में बैठा लॉरेंस बिश्नोई कनाडा में कोई पेशेवर शूटर भारत से नहीं भेज रहा है, बल्कि वह कनाडा की धरती पर ही मौजूद भारतीय नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों का इस्तेमाल कर रहा है। इन युवाओं को गोलीबारी करने या डराने-धमकाने वाले पत्र पहुंचाने के लिए बेहद “छोटी” रकम का भुगतान किया जाता है।
जासूस सेंट लुइस ने गवाही दी कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे कनाडाई-भारतीय युवाओं को ये गैंग्स एक ‘जुड़ाव की भावना’ और एक कम्युनिटी का अहसास दिलाते हैं। परदेस में अकेले रह रहे युवाओं को अपना शिकार बनाना इन गैंग्स के लिए बेहद आसान होता है, जो बाद में उनके लिए हिंसक वारदातों को अंजाम देने लगते हैं।
3. व्हाट्सएप कॉल्स और नया मुख्य किरदार ‘जोरा सिद्धू’
कनाडा पुलिस के अनुसार, वसूली की यह पूरी स्क्रिप्ट डिजिटल माध्यमों से लिखी जा रही है। व्यापारियों से संपर्क करने के लिए केवल एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप जैसे व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया जाता है। इन कॉल्स या मैसेजेस में अमूमन लॉरेंस बिश्नोई या उसके कनाडा स्थित मुख्य लेफ्टिनेंट रहे गोल्डी बराड़ के नाम का खौफ दिखाया जाता है।
हालांकि, पुलिस की जांच में एक नया और सबसे बड़ा नाम सामने आया है जोरा सिद्धू। पुलिस के अनुसार, कनाडाई व्यापारियों से वसूली करने के लिए जो व्यक्ति लगातार फोन और मैसेज कर रहा था, वह जोरा सिद्धू ही है।
पुलिस का पुख्ता अनुमान है कि यह जबरन वसूली की कॉल करते समय जोरा सिद्धू कनाडा की सीमा के भीतर मौजूद नहीं था, बल्कि वह किसी अन्य देश से बैठकर इस नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।

4. बिश्नोई और गोल्डी बराड़ में फूट, बदले गैंग के तौर-तरीके
कनाडा पुलिस की गवाही में यह भी सामने आया कि पिछले साल भारत में बंद लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा में उसके मुख्य सिपहसालार गोल्डी बराड़ के बीच किसी बात को लेकर गंभीर अनबन हो गई, जिसके बाद यह पूरा ग्रुप दो धड़ों में टूट गया। इस फूट के बाद गैंग के काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया।
पहले गैंग के सदस्य व्यापारियों को फोन कर पैसे मांगते थे और न देने पर गोली चलाते थे। आपसी विवाद के बाद, गैंग में एक प्रकार की “अव्यवस्था” देखी गई। अब गुर्गों ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या पैसे की मांग किए ही सीधे लोगों के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, ताकि खौफ का माहौल बना रहे।
5. ‘कॉपीकैट’ गैंग्स का बढ़ता खतरा
लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के नाम के खौफ का फायदा उठाने के लिए कनाडा में कई स्थानीय ‘कॉपीकैट’ गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं। ये छोटे-मोटे अपराधी व्यापारियों को फोन करके खुद को लॉरेंस गैंग का बताते हैं और उनके बड़े नेताओं के नामों का इस्तेमाल करके डराते हैं।
हालांकि, पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि ये नकली ग्रुप केवल नाम का इस्तेमाल कर पैसे ऐंठना चाहते हैं। ये आमतौर पर गोलीबारी जैसी हिंसक वारदातों को अंजाम नहीं देते।
6. ट्रेस करना लगभग असंभव
कनाडाई जांचकर्ताओं ने अदालतों को बताया कि इस तकनीकी दौर में अपराधियों को पकड़ना एक बेहद जटिल काम बन गया है। अपराधी जिन व्हाट्सएप नंबरों का इस्तेमाल करते हैं, वे अंतरराष्ट्रीय होते हैं और पूरी तरह एन्क्रिप्टेड होते हैं, जिससे उनके वास्तविक आईपी एड्रेस का पता लगाना बेहद कठिन होता है।
गैंग के सदस्य अवैध हथियारों को कनाडा के एक प्रांत से दूसरे प्रांत में इतनी तेजी से ट्रांसफर करते हैं कि पुलिस के लिए उन्हें ट्रैक करना “लगभग असंभव” हो जाता है। पुलिस ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक ही बंदूक का इस्तेमाल मात्र 24 घंटे के भीतर कनाडा के दो अलग-अलग प्रांतों में जबरन वसूली के लिए की गई फायरिंग की घटनाओं में पाया गया।
7. जशनदीप सिंह की देश निकाला सुनवाई
यह पूरा मामला तब खुलकर दुनिया के सामने आया जब कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) अल्बर्टा, ब्रिटिश कोलंबिया और ओंटारियो में हुई गोलीबारी की घटनाओं से जुड़े एक कथित गैंग सदस्य जशनदीप सिंह को देश से निकालने के लिए सुनवाई कर रही थी। वर्चुअल मोड से चल रही इस सुनवाई में जशनदीप सिंह अपने कमरे से पेश हुआ, जहां उसके पीछे बच्चों वाले खिलौने सजे हुए थे।
पुलिस ने जशनदीप के पास से एक बेहद हिंसक वीडियो जब्त किया था, जिसमें वह एक अन्य व्यक्ति के सिर पर पिस्तौल ताने हुए नजर आ रहा था। बैलिस्टिक जांच में सामने आया कि इसी पिस्तौल का इस्तेमाल सरे में एक व्यापारी के घर पर हुई जबरन वसूली की गोलीबारी में किया गया था।

8. ‘फॉर ब्रदर्स’ गैंग की गिरफ्तारी
कनाडा में इस जबरन वसूली संकट से निपटने के लिए पुलिस अब गिरफ्तारियों के साथ-साथ ‘देश निकाला’ को अपना सबसे बड़ा और कारगर हथियार मान रही है, क्योंकि इन अपराधों में शामिल अधिकांश संदिग्ध कनाडाई नागरिक नहीं हैं, बल्कि वे वीजा पर आए विदेशी नागरिक हैं।
हाल ही में पील रीजनल पुलिस ने ‘फॉर ब्रदर्स’ नामक एक अन्य कुख्यात गिरोह के 17 संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो दक्षिण एशियाई व्यापारियों को निशाना बना रहे थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) ने जबरन वसूली के संदिग्धों के खिलाफ कुल 446 मामलों की जांच शुरू की है।
इनमें से 118 लोगों के खिलाफ निष्कासन आदेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि 55 संदिग्धों को पहले ही कनाडा की धरती से डिपोर्ट किया जा चुका है। क्षेत्रीय आंकड़ों की बात करें तो सबसे गंभीर स्थिति टोरंटो क्षेत्र में है जहां 188 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद ब्रिटिश कोलंबिया में 132 और प्रैरीज क्षेत्र में 126 जांच के मामले सामने आए हैं।

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