Buland Kesari/ जालंधर के नरेंद्र सिनेमा क्षेत्र में एक बार फिर ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। तस्वीरें साफ बता रही हैं कि बाहरी राज्यों के लिए चलने वाली निजी बसें सड़क किनारे खुलेआम सवारियां चढ़ा और उतार रही हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ ऐसे इलाके में हो रहा है जहां से रोजाना ट्रांसपोर्ट विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों का आना-जाना रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अवैध ट्रांसपोर्टेशन के इस खेल पर रोक क्यों नहीं लग रही? क्या ट्रांसपोर्ट विभाग और RTO को यह गतिविधियां दिखाई नहीं देतीं या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
सूत्रों के अनुसार शहर में अवैध बस ऑपरेटरों और ट्रांसपोर्ट माफिया का नेटवर्क लगातार मजबूत होता जा रहा है, जबकि विभागीय कार्रवाई का दावा केवल फाइलों तक सीमित नजर आता है। दूसरी ओर विभाग में लंबित मामलों (Pendency) का बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने में कोई खास सफलता दिखाई नहीं दे रही।
लोगों का सवाल है कि यदि सड़क किनारे ही अस्थायी बस अड्डे चल रहे हैं तो फिर सरकारी बस स्टैंड और नियमानुसार निर्धारित पिकअप प्वाइंट्स का क्या औचित्य रह जाता है?
अब जनता पूछ रही है—
❓ क्या ट्रांसपोर्ट विभाग सरकार के लिए “सफेद हाथी” बन चुका है?
❓ क्या ट्रांसपोर्ट माफिया के सामने विभाग पूरी तरह बेबस है?
❓ अवैध सवारियां भरने वाली बसों पर कार्रवाई कब होगी?
❓ आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह खेल?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक विभाग की कार्यप्रणाली और ट्रांसपोर्ट माफिया के गठजोड़ पर सवाल उठते रहेंगे।

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