Buland kesari /पंजाब में बच्चों को लेकर एक हैरान कर देने वाली Report सामने आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के पोषण ट्रैकर डेटा (जून 2025) के मुताबिक, पंजाब में 5 साल तक की उम्र के कई बच्चे कुपोषण के शिकार होते जा रहे हैं। Report में दावा किया गया है कि राज्य में 0 से 5 साल के बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुसार नहीं बढ़ रही है। साथ ही, इस आयु वर्ग के 2.95% बच्चे अत्यधिक दुबले हैं, जबकि 5.12% बच्चों के वजन में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो रही है।
कुपोषण के पीछे 2 प्रमुख कारण बताए गए हैं, जैसे कि बच्चों के भोजन में पौष्टिक तत्वों की कमी होना। बच्चों को खाने में दूध, दही, दालें, हरी सब्जियां और फल नहीं देना भी कुपोषण का कारण बनता है। इसके अलावा माता-पिता द्वारा बच्चों को जंक फूड और फास्ट फूड की ओर अधिक प्रोत्साहित करना।
पंजाब सरकार द्वारा उठाए जा रहे अहम कदम
पंजाब सरकार ने बच्चों के पोषण और देखभाल के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास शुरू किए हैं। राज्यभर में 1,000 आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने घोषणा की थी कि अब तक 111 आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्र बनाए जा चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों की बेहतर देखभाल और विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अगस्त 2024 में पंजाब के ग्रामीण इलाकों में बच्चों के कुपोषण पर एक सर्वेक्षण किया गया था। इस सर्वे में सामने आया कि बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। 2 से 3 साल की उम्र के 16% बच्चों का औसत वजन कम पाया गया, जबकि 20.4% बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुसार नहीं थी। इतना ही नहीं, 4.8% बच्चे अधिक वजन (ओवरवेट) के भी शिकार पाए गए। यह रिपोर्ट राज्य में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, सरकार द्वारा उठाए गए कदम सकारात्मक संकेत जरूर हैं, लेकिन बच्चों के पोषण में सुधार के लिए समाज और अभिभावकों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।

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