Buland kesari/जालंधर: Buland Kesari** अगर निष्पक्ष जाँच होती है तो राज्य में एक बड़े बैंक खाता फर्जीवाड़े और टैक्स चोरी के नेक्सस (Nexus) का पर्दाफाश होने की संभावना है। बुलंद केसरी को मिली एक बेहद गंभीर शिकायत से यह सनसनीखेज मामला सामने आया है कि कैसे गुंडों और बदमाशों का एक संगठित ‘फर्जीवाड़ा माफिया’ आम और सीधे-सादे लोगों को अपने जाल में फंसाकर बड़े पैमाने पर काले धन का लेनदेन कर रहा है।
इस घटना ने बैंकिंग सुरक्षा और सिस्टम में मौजूद खामियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
### **क्या है पूरा मामला?**
बुलंद केसरी को मिली शिकायत के अनुसार, यह माफिया एक सोची-समझी साजिश के तहत काम कर रहा है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
* **जबरन बैंक खाते खुलवाना:** माफिया के गुर्गे आम लोगों को लालच देकर, डरा-धमकाकर या गुमराह करके अलग-अलग बैंकों में उनके नाम से खाते खुलवाते हैं।
* **करोड़ों का गोलमाल:** इन खातों की पासबुक, एटीएम किट और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर माफिया अपने पास रखता है। शिकायत के अनुसार, इन खातों के जरिए बिना खाताधारक की जानकारी के करोड़ों रुपये का भारी-भरकम लेनदेन और हेरफेर किया जा रहा है।
* *जालंधर में एक भोले भाले युवक को बनाया निशाना* :
शिकायत के अनुसार जालंधर के पठानकोट बाईपास के नजदीक छोटी सी फास्ट फूड की स्टाल लगाने वाले एक युवक को इन बदमाशों ने अपना निशाना बनाया है। उसे लालच देकर पहले उसके नाम से विभिन्न बैंकों में 6- 7 खाते खुलवा लिए गए। उनमें करोड़ का लेन-देन किया गया। जब इसका पता उक्त युवक के घर वालों को लगा तो उन्होंने तुरंत बैंक खातों को बंद करवा दिया।
अब इसके बाद लगातार गुंडे उस युवक को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। यहां तक के उसका अपहरण तक भी किया गया।
* **हथियारों के बल पर अपहरण:** जब किसी खाताधारक को इस फर्जीवाड़े की भनक लगती है और वह बैंक जाकर खाते बंद करवाने की कोशिश करता है, तो उसे माफिया द्वारा हथियारों की नोक पर अगवा कर लिया जाता है।
* **जान से मारने की धमकी और ब्लैकमेल:** शिकायत में स्पष्ट बताया गया है कि पीड़ित को पिस्तौल दिखाकर डराया गया, उसकी गाड़ी और कीमती सामान छीन लिए गए, और खाली कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए गए। और उसे कहा गया अगर पुलिस को शिकायत दी तो तुझे और तेरी मां को जान से मार देंगे।
**बैंक के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत का अंदेशा**
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बैंकिंग प्रणाली पर उठ रहा है। बिना खाताधारक की पूर्ण सहमति और सही वेरिफिकेशन के धड़ल्ले से कई बैंकों (जैसे ग्रामीण बैंक, नेशनल बैंक और अन्य निजी बैंक) में खाते खुल जाना किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
पीड़ित ने अपनी शिकायत में इस बात का स्पष्ट अंदेशा जताया है कि इतने बड़े स्तर पर हो रहे फर्जीवाड़े और टैक्स चोरी के इस खेल में **बैंकों के बड़े अधिकारी, और रसूखदार लोग** भी शामिल हो सकते हैं। इनके बिना इतनी आसानी से किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर करोड़ों का लेनदेन करना संभव नहीं है।
### **उच्च स्तरीय जांच (High-Level Inquiry) की मांग**
यह मामला केवल एक व्यक्ति के साथ हुई धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है। इस माफिया के तार काफी गहराई तक जुड़े हो सकते हैं। हो सकता है कि इन फ़र्जी बैंक खातों के ज़रिए पैसे का इस्तेमाल देश विरोधी आतंकी गतिविधियों या सट्टेबाजी के पैसे के तौर पर या हवाला राशि के तौर पर किया जा रहा हो।
प्रशासन और पुलिस विभाग से इस मामले में निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
1. पूरे मामले की तुरंत एक **उच्च स्तरीय जांच (High-Level Investigation)** के आदेश दिए जाएं।
2. जिन बैंकों में ये फर्जी खाते खोले गए हैं, वहां के संबंधित बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की कड़ाई से जांच हो।
3. इस ‘फर्जीवाड़ा माफिया’ को जड़ से खत्म किया जाए ताकि कोई और आम नागरिक इनके बिछाए जाल में फंसकर अपनी जान-माल का नुकसान न सहे।
*जालंधर तहसील के एक वसीका नवीस ने भी किया था ऐसा ही फर्जीवाड़ा पर नहीं हुई कोई कार्रवाई!*
यहां बता दें कि ऐसा ही फर्जी बैंक खाता खोलकर करोड़ों रुपए का लेनदेन जालंधर के एक वसीका नवीस ने भी किया था। उसने Yes Bank में ऐसा ही एक पेंट कंपनी के नाम का खाता खोला था, जिसके जरिए कुछ ही दिनों में करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ था। जिसके बाद बैंक ने इस खाते को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। पर इस मामले में पुलिस ने कोई भी उच्च स्तरीय जांच नहीं की। ना यह पता करने की कोशिश हुई कि पैसा कहां से आया और किन खातों में ट्रांसफर हुआ?
अगर इस मामले की जांच होती तो वसीका नवीस तो जेल की सलाखों के पीछे जाता ही, उसके साथ वे सभी लोग पुलिस के शिकंजे में होते जिन्होंने फर्जी खाता खोलकर करोड़ों रुपए का लेनदेन किया था।
ऐसे मामले में कार्रवाई न करके पुलिस हेरा फेरी और फर्जीवाड़े करने वाले लोगों को उत्साहित करती है!
❓ *क्या सरकार और पुलिस अधिकारी लेंगे तुरंत एक्शन? या फ़िर करते रहेंगे शिकायत का इंतजार?*
बेशक इस मामले की शिकायत बदमाशों के डर से उक्त पीड़ित युवक द्वारा पुलिस में नहीं की गई। परंतु क्या पुलिस इस शिकायत का ही इंतजार करती रहेगी या विभिन्न बैंकों से सारा रिकार्ड मांगवाकर ऐसे फर्जी खातों को तुरंत सीज़ किया जाएगा, जिनके जरिए पिछले कुछ महीनो में ही करोड़ों रुपए का लेनदेन हुआ है।
किन खातों से पैसा आया है, किन खातों में गया है, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए? बैंक के उच्च अधिकारियों को भी हाई लेवल कमिटी या बनाकर अपने बैंकों के फर्जी खातों को तुरंत बंद करके इसकी सूचना पुलिस को देनी चाहिए ताकि आर्थिक अपराध शाखा ऐसे सभी फर्जी बैंक खातों को तुरंत बंद कराकर उनका पैसा सरकारी खाते में जमा करवा सके और बड़े अपराधियों तक कानून का शिकंजा पहुंच सके।
अब यह देखना बाकी है कि सरकार और प्रशासन इस करोड़ों के बैंक घोटाले और माफिया के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाता है।

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