Buland kesari**चंडीगढ़/ Buland Kesari:*स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन, पंजाब (चंडीगढ़) ने कार खरीदारों के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने माना कि फोर्ड इकोस्पोर्ट (प्लैटिनम एडिशन) के 17-इंच अलॉय व्हील और लो-प्रोफाइल टायर के डिजाइन में खराबी (Inherent Manufacturing Defect) थी, जिसके कारण गाड़ी के टायर मामूली गड्डों में भी बार-बार फट रहे थे।
कंज्यूमर कोर्ट ने कंपनी के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया कि टायर लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण फट रहे थे। कोर्ट ने फोर्ड इंडिया (Ford India Private Limited) और उसके अधिकृत डीलर्स को आदेश दिया है कि वे पीड़ित ग्राहक को मानसिक प्रताड़ना और परेशानी के एवज में **₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपये) का अतिरिक्त मुआवजा** दें. साथ ही, गाड़ी को पूरी तरह से ठीक (comprehensive repair) करके और डिफेक्टिव रिम को बदलकर सड़क पर चलने योग्य (Roadworthy) बनाने का पिछला आदेश भी बरकरार रखा है।
### **क्या था पूरा मामला?**
लुधियाना की रहने वालीं प्रभा सूद और उनके बेटे आदित्य सूद ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसमें उन्होंने फोर्ड इंडिया प्र. लि., इंपीरियल फोर्ड लुधियाना, और भगत फोर्ड लुधियाना को पार्टी बनाया था।
उन्होंने शिकायत में बताया कि जुलाई 2017 में ₹12,05,237 की भारी-भरकम कीमत चुकाकर एक नई ‘Ford Ecosport Platinum Edition’ कार खरीदी थी. इस गाड़ी में कंपनी की तरफ से ‘डायमंड-कट 17-इंच अलॉय व्हील्स’ और अपोलो कंपनी के ‘205/50R17’ साइज के टायर स्टैंडर्ड फिटमेंट के तौर पर दिए गए थे.
कार खरीदने के महज 4 महीने के भीतर, अलग-अलग घटनाओं में गाड़ी के टायर **4 बार** मामूली गड्डों (potholes) से टकराकर या तो फट गए या उनमें गंभीर सूजन (bulge) आ गई. एक हादसे में तो चलती गाड़ी का अलॉय व्हील (रिम) बीच से टूटकर दो टुकड़ों में बंट गया, जिससे कार सवारों की जान पर बन आई थी.
बार-बार होने वाले इन हादसों से तंग आकर ग्राहकों ने गाड़ी को डीलर के पास खड़ा कर दिया और साल 2018 में जिला उपभोक्ता फोरम (District Commission) का दरवाजा खटखटाया.
### **ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट की रिपोर्ट ने खोली पोल**
मामले की गहराई से जांच के लिए ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले डायग्नोस्टिक एक्सपर्ट श्री मनोज वर्मा (दादा मोटर्स, लुधियाना) को नियुक्त किया गया था. उनकी तकनीकी रिपोर्ट ने कोर्ट में केस का रुख बदल दिया. Expert Report के मुख्य बिंदु इस प्रकार थे:
* **गलत टायर और व्हील साइज:** इस सेगमेंट की अन्य गाड़ियां (जैसे क्रेटा, ब्रेजा, डस्टर, एक्सयूवी300) 15 या 16 इंच के व्हील्स के साथ आती हैं. फोर्ड ने लुक और स्टाइल (USP) बढ़ाने के लिए 17 इंच के बड़े अलॉय व्हील और बहुत कम प्रोफाइल वाले टायर दे दिए.
* **शॉक एब्जॉर्ब नहीं कर पा रही थी गाड़ी:** व्हील का साइज और कंस्ट्रक्शन ऐसा था जो गाड़ी के सस्पेंशन और शॉक एब्जॉर्बर (झटका सोखने की क्षमता) के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहा था. गड्डों का सीधा झटका सीधे टायरों और रिम पर पड़ रहा था, जिससे वे बार-बार फट रहे थे. रिपोर्ट में इसे अलॉय व्हील्स का **’इनहेरेंट मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’** बताया गया.
### **कोर्ट ने क्या कहा?**
स्टेट कमीशन की बेंच (न्यायिक सदस्य श्री हरिंदरपाल सिंह माहल और श्रीमती किरण सिबल) ने कहा कि ग्राहक ने एक मोटी रकम खर्च करके नई गाड़ी इसलिए खरीदी थी ताकि वह उसका आनंद ले सके. लेकिन गाड़ी के डिफेक्टिव रिम के कारण ग्राहक को बार-बार मानसिक तनाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. गाड़ी पिछले कई सालों से डीलर के पास ही धूल फांक रही थी.
हालांकि, कोर्ट ने कार की पूरी कीमत वापस (Refund) करने की मांग को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि एक्सपर्ट रिपोर्ट के अनुसार खराबी सिर्फ अलॉय व्हील और टायर कॉम्बिनेशन में थी, न कि गाड़ी के इंजन या बाकी मैकेनिकल हिस्सों में।
### **60 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान**
स्टेट कमीशन ने जिला फोरम के मरम्मत वाले आदेश को संशोधित करते हुए फोर्ड इंडिया और उसके डीलर्स को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आदेश की कॉपी मिलने के **60 दिनों के भीतर** ₹1,50,000 का मुआवजा ग्राहक को भुगतान करें. साथ ही, गाड़ी को पूरी तरह ठीक करने और अदालती खर्च (Litigation Cost) देने का पुराना आदेश लागू रहेगा.

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