मानसिक उत्पीड़न के बदले उपभोक्ता को 20 हज़ार मुआवजा राशि देने के आदेश
Buland Kesari/ चंडीगढ़, राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, यू.टी. चंडीगढ़ (State Consumer Disputes Redressal Commission) ने उपभोक्ता अधिकारों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत (जिला उपभोक्ता फोरम) द्वारा दिए गए मुआवजे की राशि को बढ़ाने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस राज शेखर अत्री और सदस्य प्रीतिंदर सिंह की पीठ ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में खराबी के कारण उपभोक्ता को गंभीर मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें उचित मुआवजा मिलना आवश्यक है।
क्या था पूरा विवाद?
शिकायतकर्ता अमृत पाल सिंह ने 17 अक्टूबर 2021 को रिलायंस रिटेल लिमिटेड से एक सैमसंग 60-इंच यूएचडी स्मार्ट एलईडी टीवी (वॉल माउंट और बोट होम थिएटर के साथ) कुल 85,970/- रुपये में खरीदा था, जिसकी दो साल की वारंटी थी।
1 मार्च 2023 को टीवी के डिस्प्ले पैनल पर कुछ लाइनें आ गईं (डिस्प्ले खराब हो गया)। कंपनी ने वारंटी के तहत इसे एक हफ्ते में बदलने का वादा किया, लेकिन नया पैनल लगाने में 18 दिन लगा दिए। उपभोक्ता की परेशानी तब और बढ़ गई जब वह नया पैनल भी तकनीकी रूप से खराब निकला।
बार-बार ईमेल और कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब कंपनियों ने कोई उचित कदम नहीं उठाया, तो पीड़ित ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
निचली अदालत (District Commission) का फैसला:
जिला उपभोक्ता फोरम (District Commission-II, U.T. Chandigarh) ने 30 अक्टूबर 2025 को शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सैमसंग इंडिया को निर्देश दिया था कि वह टीवी की इनवॉइस राशि 79,980/- रुपये को 9% वार्षिक ब्याज के साथ उपभोक्ता को वापस लौटाए और मानसिक उत्पीड़न व अदालती खर्च के लिए 10,000/- रुपये का मुआवजा दे।
स्टेट कमीशन ने क्यों बढ़ाया मुआवजा?
जिला अदालत के इस फैसले से असंतुष्ट होकर अमृत पाल सिंह ने स्टेट कमीशन में अपील (First Appeal No. SC/4/FA/5/2026) दायर की। उनकी दलील थी कि कानूनी लड़ाई और कंपनियों की लापरवाही के कारण उन्हें जो मानसिक और आर्थिक कष्ट हुआ, उसके सामने 10,000 रुपये का मुआवजा बेहद कम है।
स्टेट कमीशन ने दोनों पक्षों के वकीलों (अपीलकर्ता के लिए एडवोकेट विवेक अरोड़ा, रिलायंस के लिए एडवोकेट संजीव पब्बी और सैमसंग के लिए एडवोकेट दविंदर कुमार) की दलीलें सुनीं।
माननीय जस्टिस राज शेखर अत्री की पीठ ने माना कि जिला फोरम ने शिकायतकर्ता के मानसिक तनाव और अदालती खर्च के शुरुआती आकलनों को ठीक से नहीं देखा था।
अंतिम आदेश:
कमीशन ने जिला फोरम के आदेश में संशोधन करते हुए मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च के मुआवजे को 10,000/- रुपये से बढ़ाकर सीधे 20,000/- रुपये (दोगुना) कर दिया। इसके अलावा, टीवी की मूल राशि (79,980 रुपये) पर 9% ब्याज और टीवी वापस करने की बाकी शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।

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