Buland kesari/पंजाब की लुधियाना सेंट्रल जेल से बंद एक विचाराधीन कैदी (हवालाती) सुखविंदर सिंह की मौत हो गई। जेल प्रशासन ने सुखविंदर का शव सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में रखवाया और इसकी सूचना इलाका मजिस्ट्रेट की कोर्ट में दी।
सेंट्रल जेल के सुपरिंटेंडेंट ने कैदी के शव का पोस्टमॉर्टम करवाने की अनुमति मांगी थी। जेल सुपरिंटेंडेंट के आवेदन के बाद इलाका ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास करनबीर सिंह बत्रा सिविल अस्पताल की मॉर्चरी में मंगलवार देर रात पहुंचे और उन्होंने शव का पोस्टमॉर्टम करने पर रोक लगा दी।
दरअसल, कैदी का कोई भी रिश्तेदार या परिवार का सदस्य नहीं आया है। कैदी की मौत 9 जून को हुई और उन्होंने इस संबंध में संबंधित थाने को भी सूचना दे दी। इसके बावजूद कैदी के परिजन नहीं पहुंचे। अदालत ने पुलिस और जेल प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस दौरान हर हाल में मृतक के परिजनों की तलाश की जाए, ताकि उनकी मौजूदगी में ही आगे की कार्रवाई हो सके।

जेल में सुबह बिगड़ी तबीयत, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
जेल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, मृतक कैदी सुखविंदर सिंह मूल रूप से गुरदासपुर के बटाला के अंतर्गत आते गांव किला लाल सिंह का रहने वाला था। वह लुधियाना के थाना डिवीजन नंबर 5 में दर्ज एक आपराधिक मामले में पिछले साल मई से लुधियाना सेंट्रल जेल में बंद था।
9 जून 2026 की सुबह करीब 06:35 बजे जेल में सुखविंदर सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में परेशानी हुई थी। उसकी यह दिक्कत काफी पुरानी थी। बैरक में मौजूद अन्य बंदियों और जेल वॉर्डन ने इसकी सूचना जेल के मेडिकल स्टाफ को दी। उसे जेल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
अदालत ने क्यों रोका पोस्टमार्टम, वजह जानिए…
- शव की शिनाख्त करने नहीं पहुंचे वारिस: नियमों के मुताबिक, जेल में किसी भी कैदी की मौत होने पर उसका पोस्टमॉर्टम ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की निगरानी में डॉक्टरों के पैनल द्वारा किया जाता है। इसके लिए परिजन का होना अनिवार्य है। जेल प्रशासन ने जब सुखविंदर के रिकॉर्ड में दर्ज पते पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उसका कोई भी वारिस या सगा-संबंधी शव लेने या शिनाख्त के लिए सामने नहीं आया।
- वारिस नहीं मिले तो कोर्ट से मांगी अनुमति: जेल प्रशासन व संबंधित थाने की पुलिस को जब वारिस नहीं मिले तो मामला कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास करनबीर सिंह बत्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पोस्टमॉर्टम को 72 घंटे के लिए टालने का आदेश जारी किया। कोर्ट ने कहा कि यह समय मृतक के परिजनों को ढूंढने के लिए दिया जा रहा है।
- जेल प्रशासन की आम जनता से अपील: सहायक अधीक्षक, केंद्रीय जेल, लुधियाना ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति को मृतक सुखविंदर सिंह पुत्र अवतार सिंह के परिजन या वारिसों के बारे में कोई जानकारी है, तो वह तुरंत केंद्रीय जेल के कंट्रोल रूम नंबर 0161-2660106 पर संपर्क कर जानकारी साझा करे।
किस मामले में कैद था आरोपी, पूरा मामला जानिए…
प्रॉपर्टी विवाद से जुड़ा था मामला: जिस सुखविंदर सिंह की जेल में मौत हुई है, वह लुधियाना के एक बेहद चर्चित और हाई-प्रोफाइल प्रॉपर्टी विवाद व हमले के मामले में सह-आरोपी था। यह पूरा विवाद लुधियाना के मुख्य बस स्टैंड रोड पर स्थित अशोक नगर की एक बेशकीमती कोठी से जुड़ा हुआ था।
दिल्ली के बुजुर्ग मालिक की कोठी पर नजर: FIR के मुताबिक इस संपत्ति के असली मालिक सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी मेजर सुरिंदरपाल सिंह गिल हैं, जो वर्तमान में दिल्ली में रहते हैं। यह प्रॉपर्टी उन्हें वर्ष 1952 में आवंटित हुई थी। मेजर गिल ने अपनी कोठी की देखभाल के लिए शंभू नाम का एक माली-सह-नौकर रखा हुआ था, जो अपनी पत्नी कंचन और बच्चों के साथ वहीं रहता था।
15 गुंडों के साथ जबरन घुसपैठ: 26 अप्रैल 2025 की रात करीब सवा 10 बजे, 10 से 15 अज्ञात बदमाशों ने इस कोठी पर कब्जा करने की नीयत से हथियारों के साथ क्रिमिनल ट्रेसपास किया। इन बदमाशों ने केयरटेकर शंभू के परिवार को बंधक बना लिया, उनके घर का सारा सामान तहस-नहस कर दिया और शंभू व उसकी पत्नी के साथ बुरी तरह मारपीट की।
पुलिस के सामने लगाए ताले भी तोड़ डाले: वारदात के बाद पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए 28 अप्रैल 2025 को एक FIR दर्ज की। इसके बाद मेजर गिल दिल्ली से लुधियाना पहुंचे और पुलिस की मौजूदगी में कोठी के मुख्य गेट पर दो मजबूत ताले लगा दिए, लेकिन आरोपियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने पुलिस के सामने लगाए गए उन दोनों तालों को भी कटर से काट दिया और दोबारा कब्जा करने की कोशिश की।
आरोपी को जेल भेजा: जब मेजर गिल अपनी बेटी दिवस गिल और दामाद ब्रिन देसाई के साथ दोबारा वहां पहुंचे, तो ताले टूटे देख उनके होश उड़ गए। इसके बाद पुलिस ने वर्तमान मुख्य मुकदमा दर्ज किया, जिसमें सुखविंदर सिंह को 3 मई 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
जमानत के लिए हाईकोर्ट तक गया था सुखविंदर
जेल में बंद रहने के दौरान सुखविंदर सिंह ने अपनी रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी। लुधियाना की सेशन कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसने अपने वकील के माध्यम से पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसे वहां से भी राहत नहीं मिली थी। अब तक उसे सजा नहीं सुनाई गई थी।

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