Buland kesari/अमृतसर के रहने वाले संदिग्ध आतंकी (19) के पिता ने दावा किया कि 23 मई को उनके घर पर हुई छापेमारी के दौरान वह घर में मौजूद था, लेकिन छत से कूदकर फरार हो गया था। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बाद ही परिवार को पता चला कि वह उत्तराखंड में अपनी नानी के पास रह रहा था।
पिता के अनुसार, परिवार ने बेटे को रोजगार के लिए रूस भेजने में लाखों रुपए खर्च किए थे, लेकिन वापस लौटने के बाद वह कथित तौर पर गलत संगत में पड़ गया। पिता ने कहा कि परिवार के पास अब खाने का सामान भी नहीं बचा। हमारी सारी उम्मीदें टूट चुकी हैं।
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर से सेना, BSF और पंजाब पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर उत्तराखंड STF ने 15 जून आरोपी ईशानप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसके घर से पहले ही 3 जिगाना पिस्टल, 3 बरेटा पिस्टल, 6 मेड इन चाइना पिस्टल, 20 मैगजीन और लगभग 900 ग्राम हेरोइन बरामद की थी।
ईशानप्रीत सिंह के पास ये सभी हथियार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए पंजाब बॉर्डर पर पहुंचाए गए थे। सूत्रों के मुताबिक, वह 15 अगस्त से पहले किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में था। इसके साथी अभी पंजाब, उत्तराखंड और यूपी में एक्टिव थे।

ईशान के पिता ने कही ये बड़ी बातें….
छापेमारी के दौरान घर पर था, छत से कूदकर भागा: ईशानप्रीत के पिता जगजीत सिंह ने बताया कि उन्हें बेटे की गिरफ्तारी की जानकारी परसों ही मिली थी। जगजीत ने बताया कि 23 मई को हमारे घर पर छापा पड़ा था, जिसके दौरान घर से 12 पिस्टल बरामद हुई थीं। छापेमारी के दौरान वह घर पर ही था, लेकिन बाद में छत से कूदकर फरार हो गया था।
गिरफ्तारी के बाद पता चला नानी के पास रह रहा था: पिता ने कहा- हमें भी उसकी गिरफ्तारी के बाद पता चला कि वह उत्तराखंड में अपनी नानी के पास रह रहा था। पिता ने आंखें भरते हुए कहा, ‘हमारा घर ही उजड़ गया है। आज घर में खाने के लिए भी पर्याप्त सामग्री तक नहीं है। हालांकि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि ईशान के पास पिस्टल कैसे पहुंची।
किसी ने उसे बहकाकर इस रास्ते पर धकेला: जगजीत सिंह ने कहा कि उनका बेटा इतना बड़ा कदम खुद नहीं उठा सकता और संभव है कि किसी ने उसे बहकाकर इस रास्ते पर धकेला हो। उन्होंने बताया कि वह स्वयं एक सीमेंट की दुकान पर मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी पत्नी एक अस्पताल में नौकरी करती हैं। दोनों सुबह काम पर चले जाते थे और देर शाम घर लौटते थे। और आजकल मेरी तबीयत ठीक न होने के कारण मेरी पत्नी ही अस्पताल में पानी पिलाने का कार्य करती है।
नौकरी के लिए रूस भेजा, पैसों के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली तक बेचे: पिता के अनुसार, ईशान ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। इसके बाद वह रोजगार की तलाश में रूस गया था। बेटे को विदेश भेजने के लिए परिवार ने करीब 7 लाख रुपए खर्च किए थे। इसके लिए उन्होंने वर्षों की बचत लगाने के साथ-साथ ब्याज पर पैसे लिए और यहां तक कि अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली भी बेच दी। लेकिन विदेश भेजने वाले एजेंट ने कथित तौर पर उनके साथ धोखा किया और ईशान महज 13 से 14 दिन बाद वापस लौट आया।
अब हमारे हिस्से में सिर्फ दुख और आंसू ही बचे: पिता ने कहा- इस घटना का गहरा असर ईशान के मन पर पड़ा और संभवतः वह गलत संगत में पड़ गया। उन्होंने कहा कि बेटे से परिवार को बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन अब सारी उम्मीदें टूट चुकी हैं। जगदीश सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि अब उनके हिस्से में सिर्फ दुख और आंसू ही बचे हैं।

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