Buland kesari /पंजाब पुलिस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार आतंकी और गैंगस्टर संगठनों ने युवाओं को फंडिंग और हथियार मुहैया कराने के लिए डेड लेटर बॉक्स (DLB) तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह वही पुराना तरीका है जिसका इस्तेमाल जासूस और खुफिया एजेंसियां गोपनीय संदेश या सामान पहुंचाने के लिए किया करती थीं। इस तरीके में आतंकियों द्वारा पैसा, हथियार या सामान किसी सुनसान जगह, गली के कोने, पेड़ की दरार या कबाड़ के पास रख दिया जाता है। सोशल मीडिया या मैसेजिंग एप्स के जरिए युवाओं को केवल उस स्थान का ‘लैंडमार्क’ बताया जाता है, जिससे वे बिना सीधे संपर्क में आए सामान उठा लें।
जानकारी के अनुसार हाल ही में गिरफ्तार किए गए आतंकी और गैंगस्टरों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि अब ‘डेड लेटर बॉक्स’ तरीके का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह खासतौर पर ऐसे युवाओं को चुनते हैं जो बेरोजगार हैं और जल्दी पैसा कमाने की चाह रखते हैं। पिछले डेढ़ साल में पंजाब में 27 से अधिक वारदातें इसी तकनीक के जरिए की जा चुकी हैं।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि पुलिस अब उन लोगों की पहचान कर रही है जो DLB ठिकानों पर पैसा और हथियार रखते हैं। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि यह सामान कब, कहां और किसे पहुँचाया गया। अधिकारियों का मानना है कि यह जांच आतंकी नेटवर्क की जड़ें उखाड़ने में अहम साबित होगी। पुलिस जांच में सामने आया है कि कई आतंकी और गैंगस्टर संगठन जैसे बब्बर खालसा इंटरनेशनल, सिख फॉर जस्टिस (SFJ), गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई गिरोह इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू पर आरोप है कि वह गरीब युवाओं को DLB के जरिए पैसा देकर उन्हें खालिस्तान समर्थक गतिविधियों के लिए उकसाता है।

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