Buland kesari/शनि गोचर में मीन राशि में संचार कर रहे हैं जोकि जल तत्व की राशि है। शनि के जल राशि में होने के कारण ही देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ के कारण व्यापक तबाही हुई है और यह बाढ़ भी 1988 में आई बाढ़ की तुलना में कहीं अधिक विकराल दिखाई दे रही है।
ज्योतिषाचार्यों की अगर माने तो शनि गोचर में अभी मीन राशि में 2027 के मध्य तक रहने वाले हैं और तब तक हर वर्ष मनुष्य के ऊपर विपदा आती रहेगी। शनि इस समय वक्री अवस्था में है और जब से यह वक्री अवस्था में आए है तब से बादल फटने, अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति देखने को मिल रही है।
नवम्बर 2025 के शुरू तक शनि ने वक्री अवस्था में संचार करना है। दूसरी बार बृहस्पति का अतिचारी गति से संचार भी बताया जा रहा है। बृहस्पति जीव का कारक है और शनि के वक्री होते ही जीव के ऊपर विपदा आनी शुरू हो गई है।
ज्योतिषाचार्यों की माने तो शनि जब तक जल राशि में रहेंगे तब तक जल से तबाही होगी और जब वह मेष राशि में आएंगे तो आग व बारूद से जीव को हानि पहुंचने का अंदेशा है। मेष राशि अग्रि तत्व की राशि है जिसका मालिक मंगल है।
यह भी कहा जा रहा है कि 2027 मध्य के बाद शनि का गोचर मेष राशि में हो जाएगा और उस समय भी बृहस्पति अतिचारी अवस्था में ही रहेंगे। अतिचारी अवस्था में रहते हुए बृहस्पति हर वर्ष 2 से 3 राशियों में परिवर्तन कर रहे हैं। कभी बहुत तेजी गति से आगे चलते हैं तो फिर वक्री होकर पीछे आ जाते हैं। बृहस्पति की यह अतिचारी अवस्था अगले 8 वर्ष तक रहने का अंदेशा है!
इसलिए ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि 2032-33 तक हर वर्ष मनुष्य के ऊपर कोई न कोई विपदा ईश्वरीय प्रकोप के कारण आती रहेगी। ज्योतिषाचार्यों का यह भी कहना है कि शनि वर्ष में जब -जब लगभग 4 महीनों तक वक्री अवस्था में रहेंगे उस समय बृहस्पति की अतिचारी गति के कारण जीव पर संकट होगा क्योंकि शनि दुख का कारक भी माना जाता है।

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