Buland Kesari/ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के एक महत्वपूर्ण फैसले में फ्लिपकार्ट, क्लियरट्रिप और जापान एयरलाइंस को उपभोक्ता सेवा में कमी का दोषी माना गया है। आयोग ने कंपनियों को यात्री द्वारा खरीदी गई नई टिकट की पूरी राशि 1 लाख 32 हजार रुपये लौटाने के आदेश दिए हैं।
यह मामला जालंधर निवासी 19 वर्षीय निखिल अग्रवाल और उनके रिश्तेदार तरुण बंसल से जुड़ा है, जिन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पता चला कि उनकी फ्लाइट पहले ही रद्द की जा चुकी है।
क्या था पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार 21 मार्च 2023 को निखिल अग्रवाल ने फ्लिपकार्ट ऐप के जरिए नई दिल्ली से टोरंटो के लिए जापान एयरलाइंस की टिकट बुक की थी। टिकट की कीमत 93,857 रुपये थी।
यह बुकिंग फ्लिपकार्ट के टिकट पार्टनर क्लियरट्रिप के माध्यम से हुई थी। यात्रा 25 अप्रैल 2023 को होनी थी।
शिकायतकर्ता के मुताबिक जब वह अपने रिश्तेदार तरुण बंसल के साथ 25 अप्रैल को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचे, तो जापान एयरलाइंस के काउंटर पर उन्हें बताया गया कि फ्लाइट करीब 10 दिन पहले ही कैंसिल हो चुकी है।
आरोप है कि एयरलाइन और टिकट बुकिंग कंपनियों ने यात्रियों को समय पर इसकी कोई सूचना नहीं दी।
मजबूरी में मौके पर खरीदनी पड़ी नई टिकट
टोरंटो की यात्रा जरूरी होने के कारण यात्रियों को उसी दिन दूसरी फ्लाइट की टिकट खरीदनी पड़ी। इसके लिए मौके पर 1 लाख 32 हजार रुपये खर्च करने पड़े।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि यदि समय रहते फ्लाइट कैंसिल होने की जानकारी मिल जाती, तो इतनी महंगी टिकट खरीदने की नौबत नहीं आती।
अगले दिन भेजा गया री-शेड्यूल ईमेल
मामले में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब 26 अप्रैल 2023 को जापान एयरलाइंस की ओर से ईमेल भेजकर पुरानी टिकट को री-शेड्यूल करने की जानकारी दी गई।
शिकायतकर्ता का कहना था कि तब तक वह दूसरी फ्लाइट से यात्रा कर चुके थे और उन्होंने पुरानी टिकट का पूरा रिफंड मांगा।
रिकॉर्ड में पेश ईमेल्स के अनुसार क्लियरट्रिप ने भी स्वीकार किया कि एयरलाइन ने दिल्ली-HND फ्लाइट JL30 रद्द कर दी थी और यात्रियों को कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई।
कंपनियों ने क्या दलील दी?
फ्लिपकार्ट की ओर से आयोग में कहा गया कि:
- कंपनी केवल प्लेटफॉर्म है, सेवा प्रदाता नहीं।
- शिकायतकर्ता असली यात्री नहीं था।
- मामला गलत तथ्यों पर आधारित है।
- वहीं जापान एयरलाइंस ने दावा किया कि यात्री के पास अमेरिका का ट्रांजिट वीजा नहीं था, इसलिए उसे बोर्डिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती थी।
लेकिन आयोग ने इस दलील को खारिज कर दिया।
आयोग ने एयरलाइन की दलील क्यों ठुकराई?
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि:
कंपनियों की ओर से भेजे गए ईमेल्स में कहीं भी ट्रांजिट वीजा का मुद्दा नहीं उठाया गया।
खुद एयरलाइन ने ईमेल में फ्लाइट कैंसिल होने की बात स्वीकार की।
बाद में री-शेड्यूलिंग का ईमेल भेजा गया, जिससे साबित होता है कि फ्लाइट रद्द हुई थी।
यदि ट्रांजिट वीजा जरूरी था तो टिकट बुकिंग के समय इसकी स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए थी।
आयोग ने यह भी कहा कि फ्लाइट रद्द होने की सूचना समय पर न देना उपभोक्ता सेवा में गंभीर कमी है।
आयोग का फैसला
जालंधर जिला उपभोक्ता आयोग की पीठ — डॉ. हरवीन भारद्वाज (अध्यक्ष), ज्योत्सना (सदस्य) और जसवंत सिंह ढिल्लों (सदस्य) — ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि:
शिकायतकर्ता को नई टिकट पर खर्च हुए 1,32,000 रुपये लौटाए जाएं
मानसिक तनाव और उत्पीड़न के लिए 20,000 रुपये मुआवजा दिया जाए
10,000 रुपये मुकदमे का खर्च दिया जाए
आयोग ने कंपनियों को आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
उपभोक्ताओं के लिए बड़ा संदेश
यह फैसला ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स और एयरलाइंस के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। आयोग ने साफ किया कि यदि फ्लाइट रद्द होती है तो यात्रियों को समय पर सूचना देना कंपनियों की जिम्मेदारी है।
अगर सूचना नहीं दी जाती और यात्री को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, तो कंपनियों को उसकी भरपाई करनी होगी।

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