Buland Kesari/ चंडीगढ़ स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (उपभोक्ता अदालत) ने एक लग्जरी कार डीलर के खिलाफ सेवा में कोताही (Deficiency in Service) को लेकर कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने चंडीगढ़ के मर्सिडीज बेंज डीलर ‘जोशी ऑटो ज़ोन प्राइवेट लिमिटेड’ को आदेश दिया है कि वे महिला ग्राहक की महंगी कार का एयर-कंडीशनिंग (AC) सिस्टम 30 दिनों के भीतर मुफ्त में पूरी तरह ठीक करके दें, साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये का हर्जाना भी भुगतें।
*क्या है पूरा मामला?*
यह मामला चंडीगढ़ के सेक्टर-34 की रहने वाली पूनम गोयल (61 वर्ष) का है. उन्होंने 17 जुलाई 2024 को जोशी ऑटो ज़ोन (विपक्षी पार्टी नंबर 1) से *Mercedes Benz X254 GLC 300 4Matic* कार खरीदी थी. इस लग्जरी कार की कुल कीमत टैक्स और रजिस्ट्रेशन चार्जेस को छोड़कर ₹72,87,150 थी।
शिकायत के मुताबिक, कार खरीदने के कुछ ही समय बाद, जब गाड़ी सिर्फ 3000 किलोमीटर ही चली थी और उसकी पहली सर्विस भी नहीं हुई थी, उसमें एक गंभीर तकनीकी खराबी आ गई। गाड़ी को लॉक या अनलॉक करके जब भी स्टार्ट किया जाता, उसका AC अपने आप (Autostart) चालू हो जाता था, भले ही पिछली बार गाड़ी बंद करते समय AC को बंद किया गया हो।
#### *ग्राहक की परेशानी और डीलर का ख़राब रवैया*
महिला ने जब इसकी शिकायत डीलर से की, तो शुरुआत में उन्हें गुमराह किया गया कि यह कार का एक सामान्य फीचर (Standard Feature) है। इसके बाद शिकायतकर्ता कई बार वर्कशॉप गईं. डीलर के टेक्नीशियनों ने माना कि यह एक सॉफ्टवेयर की समस्या है।
महिला का आरोप था कि समस्या को ठीक करने के नाम पर कार को लंबे समय तक वर्कशॉप में रखा गया, उनकी सहमति के बिना पार्ट्स बदले गए और बार-बार गाड़ी के अलग-अलग पार्ट्स बदलने का दबाव बनाया गया। कुल 4 बार गाड़ी रिपेयरिंग के लिए गई।
अक्टूबर 2024 में सिर्फ 2479 किलोमीटर चलने पर कार का ‘हेड यूनिट’ (MBUX) भी बदला गया और सॉफ्टवेयर अपडेट किया गया, लेकिन खराबी दूर नहीं हुई। परेशान होकर महिला ने कानूनी नोटिस भेजा और अंततः उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया।
*डीलर और कार निर्माता कंपनी (Mercedes Benz) की दलीलें*
* *डीलर (जोशी ऑटो ज़ोन):* ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि मामला जटिल कानूनी और तकनीकी तथ्यों से जुड़ा है. उन्होंने दावा किया कि कार में कोई ‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’ (निर्माण दोष) नहीं था। AC का अपने आप चालू होना एक सॉफ्टवेयर आधारित कार्यप्रणाली थी। उन्होंने ग्राहक की संतुष्टि के लिए वारंटी के तहत मुफ्त में हेड यूनिट भी बदली थी।
* *मैन्युफैक्चरर (मर्सिडीज बेंज इंडिया प्रा. लि.):* कार बनाने वाली कंपनी ने कहा कि उनका और डीलर का रिश्ता ‘प्रिंसिपल-टू-प्रिंसिपल’ (स्वतंत्र) आधार पर है, इसलिए डीलर की किसी कमी के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं. साथ ही, शिकायतकर्ता ने यह साबित करने के लिए किसी एक्सपर्ट (विशेषज्ञ) की रिपोर्ट या लैब टेस्ट रिपोर्ट पेश नहीं की है कि कार में कोई निर्माण दोष है।
#### *अदालत ने क्या कहा और फैसला कैसे पलटा?*
कमिशन के प्रेसिडिंग मेंबर श्रीमती पद्मा पांडेय और मेंबर श्री राजेश के. आर्या ने मामले की बारीकी से जांच की.
1. *मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पर फैसला:* अदालत ने माना कि चूंकि पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC) के विशेषज्ञों से कार की जांच कराने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी और शिकायतकर्ता के पास कोई स्वतंत्र एक्सपर्ट रिपोर्ट नहीं थी, इसलिए कानूनी तौर पर इसे ‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’ (इनहेरेंट डिफेक्ट) नहीं माना जा सकता। इस आधार पर कार निर्माता कंपनी (Mercedes Benz) को इस मामले में बरी कर दिया गया।
2. *डीलर की सेवा में कमी (Deficiency in Service):*
हालांकि, अदालत ने डीलर ‘जोशी ऑटो ज़ोन’ को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। कमीशन ने डीलर के ही सर्विस एडवाइजर की उस ईमेल रिपोर्ट और जॉब शीट को देखा, जिसमें साफ दर्ज था कि गाड़ी के लॉक-अनलॉकिंग और रीस्टार्ट होने पर AC खुद-ब-खुद ऑन हो जाता था, जो अन्य समान गाड़ियों में नहीं होता था। तकनीकी जांच में सामने आया था कि यह AC सिस्टम और एक अन्य कंट्रोल यूनिट के बीच कम्युनिकेशन की खराबी (Fault Code) थी, जिसके लिए कार की ‘HYC कंट्रोल यूनिट’ को बदलने की जरूरत थी।
3. *अदालत की कड़ी टिप्पणी:* कमीशन ने कहा कि ₹73 लाख से अधिक की प्रीमियम लग्जरी कार खरीदने वाला ग्राहक मानसिक शांति और आराम की उम्मीद करता है। गाड़ी खरीदने के तुरंत बाद ही ग्राहक को बार-बार वर्कशॉप के चक्कर काटने पड़े, जिससे उसे भारी मानसिक परेशानी और असुविधा हुई।
बार-बार पार्ट्स बदलने के बावजूद समस्या का समाधान न कर पाना सीधे तौर पर डीलर की सेवा में बड़ी कोलाही और लापरवाही को दर्शाता है।
#### *कंज्यूमर कोर्ट का अंतिम आदेश*
उपभोक्ता अदालत ने 9 जून 2026 को सुनाए अपने फैसले में डीलर जोशी ऑटो ज़ोन प्राइवेट लिमिटेड को निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
* *मुफ्त मरम्मत:*
कार (रजिस्ट्रेशन नंबर CH01CV0517) के AC सिस्टम की खराबी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह से ठीक किया जाए, और इसके लिए ग्राहक से कोई चार्ज न लिया जाए।
* *मुआवजा:*
महिला ग्राहक को हुई मानसिक प्रताड़ना और परेशानी के एवज में ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का हर्जाना दिया जाए।
* *मुकदमा खर्च:*
कानूनी लड़ाई के खर्च (Litigation Cost) के रूप में ₹35,000 (पैंतीस हजार रुपये) का भुगतान भी शिकायतकर्ता को किया जाए।
अदालत ने साफ किया है कि यदि डीलर तय 30 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं करता है, तो उसे इस राशि पर 9% सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा। दूसरी तरफ, मर्सिडीज बेंज इंडिया कंपनी (मैन्युफैक्चरर) के खिलाफ शिकायत को खारिज कर दिया गया है।

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