Buland Kesari/ चंडीगढ़:स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग), केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में रियल एस्टेट कंपनी *मेसर्स सुषमा बिल्डटेक लिमिटेड (M/s Sushma Buildtech Ltd.)* को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को उसकी जमा राशि 9% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे। इसके साथ ही अदालत ने मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्च के रूप में मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
यह आदेश आयोग के अध्यक्ष *जस्टिस राज शेखर अत्री* और सदस्य *प्रीतिंदर सिंह* की पीठ द्वारा उपभोक्ता शिकायत संख्या SC/4/CC/91/2025 पर सुनवाई करते हुए 12 जून 2026 को जारी किया गया।
### क्या है पूरा मामला?
डेरा बस्सी (मोहाली, पंजाब) के रहने वाले विवेक गुप्ता और उनकी पत्नी (श्रीमती नेहा गुप्ता / रेनू गुप्ता) ने जीरकपुर के विलेज नागला में सुषमा बिल्डटेक के एक प्रोजेक्ट में एक 3 BHK+S फ्लैट (यूनिट नंबर R4-134/02, दूसरी मंजिल) बुक किया था। इस यूनिट का कुल एग्रीमेंट मूल्य टैक्स सहित 58,75,120 रुपये था।
19 फरवरी 2025 को हुए एग्रीमेंट के मुताबिक, बिल्डर को 31 मई 2025 तक फ्लैट का कब्जा सौंपना था। लेकिन बिल्डर तय समय पर न तो कब्जा दे सका और न ही खरीदार की रकम वापस की, जिसके बाद खरीदारों ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
### नकद (Cash) भुगतान पर विवाद और कोर्ट की टिप्पणी:
शिकायतकर्ताओं का दावा था कि उन्होंने कुल 54,05,100 रुपये का भुगतान किया था, जिसमें से *44,00,000 रुपये नकद* और शेष 10,05,100 रुपये बैंक लेनदेन के जरिए दिए गए थे।
दूसरी ओर, बिल्डर (सुषमा बिल्डटेक) ने केवल 10,05,100 रुपये प्राप्त होने की बात स्वीकार की और 44 लाख रुपये नकद मिलने के दावे को सिरे से खारिज कर दिया।
बिल्डर ने दलील दी कि आयकर अधिनियम, 1961 के तहत अचल संपत्ति के संबंध में 2,00,000 रुपये से अधिक का नकद लेनदेन प्रतिबंधित है।
अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता 44 लाख रुपये के नकद भुगतान की कोई भी रसीद, वाउचर या पुख्ता दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सके। खरीदार द्वारा पेश किए गए कुछ ईमेल और बैंक लोन के दस्तावेजों में तारीखों का बड़ा विरोधाभास (Discrepancy) पाया गया। अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के केवल दावों के आधार पर इतनी बड़ी नकद राशि के भुगतान को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसलिए, 44 लाख रुपये के नकद भुगतान का दावा खारिज कर दिया गया।
### एकतरफा (Ex-Parte) हुए बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई:
शुरुआत में बिल्डर की तरफ से वकील पेश हुए थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपनी पावर ऑफ अटॉर्नी वापस ले ली। इसके बाद अदालत द्वारा दोबारा नोटिस तामील कराए जाने के बावजूद बिल्डर का कोई प्रतिनिधि कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। नतीजतन, आयोग ने 21 मई 2026 को बिल्डर के खिलाफ एकतरफा (Ex-parte) कार्रवाई का आदेश दिया था।
### उपभोक्ता आयोग का अंतिम आदेश:
आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सुषमा बिल्डटेक लिमिटेड को निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
1. *पूरी रकम की वापसी:*
प्रमाणित बैंक लेनदेन के जरिए प्राप्त *10,05,100 रुपये* की राशि शिकायतकर्ता को वापस की जाए। यह राशि जमा करने की तारीख से लेकर वास्तविक भुगतान तक *9% वार्षिक ब्याज* के साथ लौटानी होगी। (यदि कंपनी आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर यह भुगतान नहीं करती है, तो डिफ़ॉल्ट अवधि के लिए *12% वार्षिक दंडात्मक ब्याज* देना होगा)।
2. *मानसिक प्रताड़ना का मुआवजा:*
शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी और शारीरिक उत्पीड़न के एवज में *75,000 रुपये* का मुआवजा दिया जाए।
3. *मुकदमा खर्च:*
कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में शिकायतकर्ता को *35,000 रुपये* का भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाए।
यह फैसला उन फ्लैट खरीदारों के लिए एक सबक भी है जो बिना पुख्ता कागजी या बैंकिंग सबूतों के बिल्डरों को नकद भुगतान कर देते हैं।

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