
दिल्ली के मालवीय नगर जैसा हादसा दोहराने का इंतजार?
जालंधर प्रशासन की यह लापरवाही तब सामने आ रही है, जब अभी कुछ ही दिन पहले 3 जून 2026 को देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के एक होटल (Flourish Stay) में भीषण आग लग गई थी।
* गई थी 21 मासूमों की जान:
उस दर्दनाक अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हो गई थी और 40 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे।
* बिना फायर NOC के चल रहा था होटल: जांच में खुलासा हुआ कि दिल्ली का वह होटल बिना फायर विभाग की मंजूरी (NOC) के अवैध रूप से चल रहा था। आग लगने के बाद बिल्डिंग में बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था, जिससे लोग खिड़कियों से कूदने को मजबूर हो गए थे।
* जालंधर में भी वही गलती:
दिल्ली के उस भयानक मंजर से सबक लेने के बजाय जालंधर का स्थानीय प्रशासन और नगर निगम गहरी नींद सोया हुआ है।
1. संकरी गलियां: न पार्किंग, न एम्बुलेंस का रास्ता:
तस्वीरों से साफ जाहिर है कि जालंधर के ये अमृत गेस्ट हाउस ओर होटल जिन गलियों में बने हैं, वे बेहद संकुचित हैं।
* दमकल का पहुंचना नामुमकिन:
यदि इन इमारतों में दिल्ली जैसा कोई अग्निकांड होता है, तो संकरी गली होने के कारण दमकल विभाग (Fire Brigade) की गाड़ी या एम्बुलेंस का अंदर दाखिल होना पूरी तरह नामुमकिन है।
* लटकते तारों का जाल: ऊपर से गुजर रहे बिजली के ढीले तारों का जाल किसी भी वक्त बड़े शॉर्ट-सर्किट का कारण बन सकता है।
2. नियमों को ताक पर रखकर बनीं कई मंजिलें?
बिल्डिंग बायलॉज के मुताबिक, सड़क की चौड़ाई के हिसाब से ही इमारत की ऊंचाई तय होती है। लेकिन यहाँ अधिकारियों की मेहरबानी से संकरी गली में भी आसमान छूती इमारतें तान दी गई हैं। इनमें न तो कोई इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) है और न ही वेंटिलेशन का कोई पुख्ता इंतजाम।
3. नक्शा पास होने के दावों का फर्जीवाड़ा!
जब भी इन अवैध निर्माणों पर उंगली उठती है, तो रटा-रटाया जवाब दे दिया जाता है कि ‘नक्शा पास है’। सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम के कमिश्नर और बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को इतनी संकरी गली में कमर्शियल गेस्ट हाउस का नक्शा पास करते वक्त आम जनता की सुरक्षा का ख्याल नहीं आया? क्या अधिकारी सिर्फ अपनी जेबें गर्म करने के लिए जालंधर में भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
जालंधर प्रशासन से सीधे सवाल:
* दिल्ली जैसे बड़े अग्निकांडों से जालंधर का स्थानीय प्रशासन सबक क्यों नहीं ले रहा?
* रिहायशी इलाकों के भीतर चल रहे इन संदिग्ध होटलों की औचक जांच (Surprise Inspection) कब की जाएगी?
* आखिर जिन अधिकारियों की रहनुमाई में इन अवैध होटलों का निर्माण हुआ है कब उनकी इंक्वारी खुलेगी और उनके द्वारा ली गई मोटी रिश्वतों का पैसा सरकारी खाते में वापस आएगा।
* कल को यदि कोई बड़ा हादसा होता है और मासूमों की जान जाती है, तो क्या इसकी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के बिल्डिंग इंस्पेक्टर और नगर निगम अधिकारी लेंगे?
जनता चाहती है कड़ी कार्रवाई और न्याय :
जालंधर की जनता अब प्रशासन से कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि इन अवैध निर्माणों पर पीला पंजा चलने की ठोस कार्रवाई चाहती है। देखना होगा कि क्या नगर निगम कट्टर ईमानदारी के दावे भरने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार के राज में तुरंत इन होटल को सील करके इन पर कानूनी कार्रवाई करता है या फिर आंखें बंद कर इंतजार करता है कि कब कोई बड़ा हादसा हो और आम जनता इनके नीचे दबकर मरे।
जुड़े रहिए बुलंद केसरी के साथ, पार्ट-3 में हम खोलेंगे कुछ और अवैध होटलों का कच्चा चिट्ठा!

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