*Buland Kesari:*राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (State Consumer Disputes Redressal Commission), पंजाब ने *द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (The New India Insurance Co. Ltd.)* द्वारा दायर प्रथम अपील संख्या *1038/2022* पर अपना फैसला सुनाते हुए जिला उपभोक्ता आयोग, लुधियाना के 16 सितंबर 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें बीमा कंपनी को दावा भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
जस्टिस दया चौधरी (अध्यक्ष), श्रीमती सिमरजोत कौर (सदस्य) और श्री विशव कांत गर्ग (सदस्य) की पीठ ने बीमा कंपनी की अपील को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक गतिविधियों (Commercial Activities) और कंपनियों के आपस में हुए व्यावसायिक समझौतों (B2B transactions) के तहत हुए नुकसान के मामले उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के दायरे में ‘उपभोक्ता’ (Consumer) श्रेणी में नहीं आते हैं।
### *क्या था मामला? (केस की पृष्ठभूमि)*
* *इमारत में आग लगने की घटना:
* गुरुग्राम स्थित *”सेंट्रम प्लाजा” (Centrum Plaza)* नामक एक प्रमुख व्यावसायिक इमारत में 22 फरवरी 2014 को इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन में भीषण आग लग गई थी, जिससे इमारत के बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों को भारी नुकसान पहुंचा था।
* *बीमा और क्लेम:*
क्लैरियन प्रॉपर्टीज लिमिटेड (Clarion Properties Ltd. – शिकायतकर्ता सं. 1) ने इस परिसर के लिए बीमा कंपनी से 20 करोड़ रुपये की ‘स्टैंडर्ड फायर एंड स्पेशल पेरिल्स’ (Standard Fire and Special Perils) पॉलिसी ले रखी थी। आग की घटना के बाद सर्वेयर ने नुकसान का आकलन *₹7,45,665.56* किया।
* *बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज (Repudiation):*
बीमा कंपनी (The New India Insurance Co. Ltd.) ने 19 जून 2015 को क्लेम यह कहते हुए खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता कंपनी ने परिसर की इकाइयों/मशीनरी का हस्तांतरण (transfer of ownership/interest) अन्य पक्षों (थर्ड पार्टी) को कर दिया था, जिसके चलते बीमा योग्य हित (insurable interest) समाप्त हो गया था।
### *निचली अदालत (जिला आयोग) का फैसला*
जिला उपभोक्ता आयोग, शहीद भगत सिंह नगर (कैंप कोर्ट, लुधियाना) ने 16 सितंबर 2022 को शिकायतकर्ताओं की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की थी और बीमा कंपनी को आदेश दिया था कि:
1. सर्वेयर द्वारा आकलित *₹7,45,665.56* की राशि 5% वार्षिक ब्याज के साथ शिकायतकर्ता सं. 1 को दी जाए।
2. इसके अलावा, ₹5,000 मानसिक परेशानी/क्षतिपूर्ति के रूप में और ₹5,000 कानूनी खर्च (litigation expenses) के रूप में दिए जाएं।
### *राज्य आयोग का तर्क और अंतिम निर्णय*
इस आदेश से असंतुष्ट होकर न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने राज्य आयोग, चंडीगढ़ के समक्ष अपील दायर की। राज्य आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद निम्नलिखित मुख्य निष्कर्षों के आधार पर फैसला सुनाया:
* *व्यवसायिक गतिविधि (B2B Transaction):*
आयोग ने दस्तावेजों (मेंटेनेंस एग्रीमेंट, बायर्स एग्रीमेंट और सर्विस कॉन्ट्रैक्ट) का अवलोकन करने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता कंपनी नंबर 1 रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़ी है और उसने व्यावसायिक इकाइयों (units) की खरीद-बिक्री तथा रखरखाव के लिए अजंता बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड और निंबस हार्बर फैसिलिटीज मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ अंतर-समझौते (inter-se commercial agreements) किए थे।
* **’उपभोक्ता’ की परिभाषा से बाहर:
** उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(7) के प्रावधानों का हवाला देते हुए राज्य आयोग ने माना कि व्यावसायिक लाभ और वाणिज्यिक उद्देश्यों (Commercial Purpose) के लिए की जाने वाली गतिविधियां ‘उपभोक्ता’ की कानूनी परिभाषा के तहत नहीं आती हैं।
* *कानूनी पेचीदगियाँ:* आयोग ने कहा कि स्वामित्व के हस्तांतरण, बीमा हित और विभिन्न व्यावसायिक कंपनियों के बीच हुए अनुबंधों से जुड़े जटिल कानूनी प्रश्नों का निर्धारण उपभोक्ता आयोग के सीमित अधिकार क्षेत्र के बाहर है।
> *अदालत का अंतिम आदेश:*
> राज्य आयोग ने जिला आयोग के आदेश को खारिज (set aside) करते हुए अपीलकर्ता बीमा कंपनी की अपील स्वीकार कर ली। हालाँकि, आयोग ने शिकायतकर्ताओं/उत्तरदाताओं को यह छूट दी है कि वे अपनी शिकायत के निवारण के लिए उपयुक्त नागरिक/सक्षम अदालत (Appropriate Court) का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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