Buland Kesari/ जालंधर: शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में शुमार फगवाड़ा गेट की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। मुख्य सड़क पर पहले से ही ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है, लेकिन अब आसपास की संकरी गलियां भी बिजली के सामान के गोदाम संचालकों और व्यापारियों द्वारा कब्जा कर ली गई हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों के लिए पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया है।
फगवाड़ा गेट मुख्य मार्ग पर जब जाम लगता है तो वाहन चालक राहत के लिए आसपास की गलियों का रुख करते हैं, लेकिन वहां भी गोदाम संचालकों द्वारा खड़े किए गए दोपहिया और चारपहिया वाहनों ने रास्ते बंद कर रखे हैं। कई गलियों में माल उतारने-चढ़ाने के नाम पर घंटों वाहन खड़े रहते हैं, जिससे आम नागरिकों, स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
तस्वीरें भी इस बदइंतजामी की गवाही दे रही हैं। गलियों में खड़े वाहन, सड़क पर फैला सामान और अव्यवस्थित पार्किंग यह साबित करने के लिए काफी हैं कि नियमों को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की नजर इन अवैध कब्जों और अराजक पार्किंग पर क्यों नहीं पड़ रही?
सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि फगवाड़ा गेट जैसे महत्वपूर्ण कारोबारी क्षेत्र में रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। यदि किसी गली में आग लग जाए या कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए तो एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड का पहुंचना तक मुश्किल हो सकता है।
नगर निगम की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। गलियों और सार्वजनिक मार्गों पर अवैध कब्जों को हटाना निगम की जिम्मेदारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस अभियान नजर नहीं आया। दूसरी ओर ट्रैफिक विभाग भी केवल चालान काटने तक सीमित दिखाई देता है, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
फगवाड़ा गेट शॉपकीपर्स एसोसिएशन भी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। क्षेत्र के व्यापारियों के हितों की बात करने वाली एसोसिएशन को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कारोबार के नाम पर आम जनता को परेशानी न हो। यदि एसोसिएशन चाह ले तो अपने सदस्यों को नियमों का पालन कराने और अवैध पार्किंग रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन फिलहाल स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को तुरंत संयुक्त अभियान चलाकर गलियों से अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटाना चाहिए, गोदाम संचालकों पर जुर्माना लगाना चाहिए और दोबारा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही क्षेत्र में वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी है।
जब तक नगर निगम, ट्रैफिक विभाग और शॉपकीपर्स एसोसिएशन अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक फगवाड़ा गेट की गलियां जनता के लिए नहीं बल्कि कुछ प्रभावशाली व्यापारियों की निजी पार्किंग बनकर रह जाएंगी। जनता अब कार्रवाई चाहती है, बहाने नहीं।

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