Buland Kesari:उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण को लेकर लुधियाना जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ऐतिहासिक और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने भारतीय रेलवे की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) को गंभीर मानते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला दिया है।
क्या था पूरा मामला?
शिकायतकर्ता प्रेमजीत सिंह ने फरवरी 2023 में हिसार से लुधियाना के लिए रेलवे टिकट बुक किया था, जिसके लिए उन्होंने ₹330 का ऑनलाइन भुगतान किया था। किसी कारणवश टिकट कैंसिल कराने पर नियमानुसार उन्हें ₹90 का रिफंड मिलना चाहिए था।
परंतु, रेलवे द्वारा उनके खाते में मात्र ₹85 ही वापस भेजे गए. जब प्रेमजीत ने मात्र ₹5 की इस कटौती के खिलाफ रेलवे और बैंक के चक्कर काटे, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
अंततः, उन्होंने अपने “राइट टू बी इन्फॉर्मड” (सूचना के अधिकार) की अवहेलना और मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
आयोग का सख्त रुख और फैसला:
माननीय अध्यक्ष संजीव बत्रा और सदस्य मोनिका भगत की पीठ ने मामले की गहन सुनवाई करते हुए कहा कि रेलवे उपभोक्ताओं को बिना पूर्व सूचना या स्पष्ट डिस्प्ले के किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क या कटौती नहीं थोप सकता।
यह सीधा-सीधा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
मुख्य निर्देश:₹5 का रिफंड:
आयोग ने विपक्षी पार्टी (भारतीय रेलवे) को निर्देश दिया कि वे शिकायतकर्ता को कटी हुई ₹5 की राशि 30 दिनों के भीतर वापस करें.
₹10,000 का हर्जाना:
सेवा में कोताही और शिकायतकर्ता को मानसिक रूप से परेशान करने के एवज में ₹10,000 का कंपोजिट जुर्माना ठोंका गया है.
कड़ा जुर्माना:
यदि आदेश की तारीख से 30 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तो रेलवे को ₹200 प्रति दिन की दर से अतिरिक्त हर्जाना देना होगा.
बुलंद संदेश:
यह फैसला देश के हर उस जागरूक नागरिक की जीत है जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता है। रकम चाहे ₹5 की हो या ₹5 लाख की, उपभोक्ताओं के अधिकारों और आत्मसम्मान से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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