Buland kesari ;- मोहाली के फेज 4 की अध्यापिका परमजीत कौर ने जीवित रहते हुए अपने लीवर का एक बड़ा टुकड़ा निकालकर अपना पूरा शरीर दान कर दिया। दरअसल, 19 साल पहले उन्होंने अपने एक सहेली को एक पत्र (Letter)दिया था और कहा था कि मेरी मौत के बाद ही वह इस पत्र को परिवार के सामने खोले और पढ़े। इसके साथ ही उन्होंने यही पत्र 3 साल पहले क्षेत्र की पार्षद दविंदर कौर वालिया को भी दिया था। अब जब परमजीत कौर की मौत हो गई तो उसकी सहेली हरदर्शन कौर और पार्षदों ने परिवार के सामने पत्र खोलकर पढ़ा तो पता चला कि परमजीत कौर ने अपना पूरा शरीर GMCH-32 दान कर दी है। 
जानकारी के अनुसार परमजीत कौर की 3 फरवरी को मौत हो गई थी, जिसके बाद पत्र में उनके शरीर को दान करने की बात कही गई थी। उनके पति पी. एम. भल्ला ने जब ऑस्ट्रेलिया में रह रहे अपने बेटे से परमजीत कौर का शरीर दान करने के बारे में बात की तो बेटा भी राजी हो गया। 4 तारीख को परमजीत कौर का बेटा अपने घर पहुंचा और जी. एम. सी. एच-32 टीम को बुलाया गया और परमजीत कौर का शरीर दान कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि परमजीत कौर एक शिक्षिका होने के साथ-साथ एक समाजसेवी भी थीं।
पत्र में क्या लिखा था?
परमजीत कौर ने जो पत्र दिया, उसमें उन्होंने लिखा कि मैं, परमजीत कौर, आज 19 अगस्त 2006 को अपने पूरे होशोहवास में यह शरीर दान करने के लिए यह पत्र लिख रही हूं। मैं इस फॉर्म की 2-3 फोटोकॉपी अपने करीबी दोस्तों के पास रख रहा हूं, जो मेरी मृत्यु के तुरंत बाद आपको सूचित करने के हकदार होंगे। अस्पताल को मेरा शरीर छात्रों के लिए रखने तथा किसी भी जरूरतमंद के लिए उपयोगी अंग दान करने का पूरा अधिकार है। मेरे शरीर का कौई हिस्सा बच्चों के किसी काम का नहीं होगा, आप इसे अपने तरीके से जला सकते हैं। मैंने यह निर्णय बहुत सोच-विचार के बाद लिया है। किसी को भी मेरे निर्णय पर आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है।

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