Buland kesari ;- : गेहूं की फसल की कटाई के दौरान श्वास रोगों से संबंधित मरीजों की सांस फूलने लगी है। कटाई के साथ ही हवा में उड़ते गेहूं के बारीक कण मिट्टी धुआं और खेतों में जलाई जा रहे फसलों के अवशेष लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं। सरकारी अस्पताल में पहले 100 के करीब मरीजों की ओ.पी.डी. हो रही थी, परंतु अब एकदम से ही मरीजों की संख्या में वृद्धि हो गई है। बच्चे व बुजुर्गों को हवा खराब होने के कारण श्वास संबंधित बीमारियों का ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा एलर्जी छाती रोग, टी.बी. और अस्थमा के मरीज भी सांस लेने में दिक्कत महसूस करने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार किसानों द्वारा अधिकतर गेहूं की कंबाइन मशीन से की जाती है। कटाई के बाद गेहूं को हडंबा मशीन से निकाला जाता है। इसके साथ ही भूसे के जो धूल-मिट्टी के कण होते हैं, वह हवा में मिल जाते हैं। हवा का रूख जिस तरफ होता है, भूसे के कण उसी तरफ आबादी में पहुंच जाते हैं। इस समय चारों तरफ गेहूं की कटाई हो रही है, इसलिए शहर से लेकर हर गांव में लोग इससे परेशान हैं।
इसके साथ ही फसलों के अवशेष को आग लगाने के कारण पैदा होने वाले कण भी हवा में मिल जाने के कारण रोगियों को दिक्कत दे रहे हैं। अस्थमा रोगियों को इस दौरान श्वास नलिकाएं प्रभावित होती हैं। अस्थमा होने पर इन नलिकाओं में सूजन आ जाती है। इससे नलिकाएं संकरी व संवेदनशील हो जाती हैं और सांस लेने पर कम हवा फेफड़ों तक पहुंचती है। धूल व प्रदूषण के कण नलिकाओं तक पहुंचते हैं तो बेचैनी होती है। दौरा पड़ने पर नलिकाएं बंद हो जाती हैं। अस्थमा के अटैक होने से मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। अस्थमा का अटैक यदि लंबा हो तो व्यक्ति की जान तक चली जाती है। इसी प्रकार एलर्जी के मरीजों को छाती में जकड़न होने के कारण सांस लेने में भारी परेशानी आती है।
तंदरुस्त व्यक्ति में भी बीमारी होने की बढ़ जाती है संभावना
इंडियन मैडीकल एसोसिएशन के टी.बी. कंट्रोल प्रोग्राम के नोडल अधिकारी व पब्लिक रिलैशन अधिकारी तथा प्रसिद्ध छाती रोग विशेषज्ञ डा. नरेश चावला ने बताया कि अस्थमा का शिकार कोई भी व्यक्ति हो सकता है। इस मौसम में धूल ज्यादा उड़ती है। इससे एलर्जी होने के साथ व्यक्ति अस्थमा का शिकार हो जाता है। भूसे के कण इतने बारीक होते हैं कि वह दिखाई भी नहीं देते और सांस से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं, जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही है, ऐसे रोगी ओ.पी.डी. में पहुंच रहे हैं। यदि ज्यादा दिक्कत हो तो तुरंत उपचार कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बर तो डॉक्टर से उपचार न लेने के कारण मरीज को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है तथा उसे बाद में ज्यादा तबीयत खराब होने के कारण अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लोगों को इन दोनों अपनी सेहत का खास ध्यान रखना चाहिए।
एलर्जी के मरीज मुंह ढककर ही निकले घर से बाहर
इंडियन मैडीकल एसोसिएशन के मैंबर डा. रजनीश शर्मा ने बताया इन दिनों कटाई, धूल मिट्टी व पाल्यूशन की वजह से एलर्जी से पीड़ित मरीज काफी ज्यादा आ रहे हैं। इस तरह के सीजन में उन लोगों को खास ध्यान रखना चाहिए, जिन्हें पहले ही श्वास रोग या एलर्जी की समस्या है। ऐसे लोगों को घर से बाहर निकलते हुए मुंह ढक कर रखना चाहिए। अगर आपको पहले से ही एलर्जी या श्वास की समस्या है तो गेहूं की कटाई के दौरान विशेष सावधानी बढ़ते तथा बच्चों का विशेष ध्यान रखें बिना माहीर डॉक्टर से परामर्श दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। इन दोनों मरीजों की संख्या बढ़ जाती हैं।
सरकार भी एडवाइजरी जारी कर लोगों को करती है जागरूक
टी.बी. अस्पताल के पूर्व मुखी तथा सीनियर प्रो. डा. निर्मल चंद काजल ने कहा कि इन दोनों मरीजों को छाती से संबंधित बीमारियां अधिक जकड़ में लेती हैं, सांस लेने में भारी परेशानी आती है। अधिकतर बच्चों को तथा बजुर्गों में श्वास से संबंधित रोग तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार इन दोनों सरकारी तथा प्राइवेट अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ती है। लोगों एलर्जी असमा तथा अन्य श्वास से संबंधित बीमारियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार लापरवाही भारी पड़ सकती है। डाक्टर काजल के अनुसार श्वास से संबंधित सरकार द्वारा भी एडवाइजरी जारी करके लोगों को जागरूक किया जाता है।

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