Buland kesari ;- गुरदासपुर : पंजाब सरकार द्वारा राज्य में सहायक व्यवसायों को प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत, राज्य में मछली पालक किसानों को भी बड़ी राहत मिली है। इसके तहत, पिछले 5 सालों के दौरान राज्य में मछली पालकों की आय में लगभग 500 करोड़ की वृद्धि हुई है। जिसके कारण न केवल सरकार की नीली क्रांति मुहिम ने रंग दिखाया है, बल्कि इससे कई अन्य किसानों का भी मछली पालन की ओर झुकाव बढ़ रहा है।
यह उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पालन का व्यवसाय करने वाले किसानों को बकायदा सबसिडी दे रही है। जो मछली पालकों को इस व्यवसाय की ओर और भी प्रोत्साहित कर रही है। कुछ समय पहले भी पंजाब में कई किसान मछली पालन का काम करते थे, लेकिन बाद में कई तरह के नुकसान होने के कारण किसानों ने इस व्यवसाय से मुंह मोड़ लिया था।
सरकार द्वारा फिर से किसानों को कई तरह की सुविधाएं और सबसिडी देने की शुरू की गई मुहिम के बाद, अब मछली पालन का व्यवसाय फिर से लाभदायक व्यवसाय बनता जा रहा है। इसी कारण अब राज्य में कई किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मछली पालन में भी रुचि दिखा रहे हैं।
क्या है योजना और इसके लाभ?
पी.एम.एम.एस.वाई. योजना 2020 में शुरू हुई थी। जो किसान यह काम करना चाहते हैं, उन्हें सरकार द्वारा इस व्यवसाय के लिए आवश्यक विभिन्न प्रकार के साजो-सामान, आवश्यक वाहन, इंफ्रास्ट्रक्चर और फीड आदि पर 40 से 60 प्रतिशत तक की सबसिडी दी जाती है। पिछले पांच सालों के दौरान यदि मछली उत्पादन का लेखा-जोखा किया जाए तो इन पांच सालों में राज्य में 35000 टन मछली उत्पादन में वृद्धि हुई है, जिसकी अनुमानित कीमत 500 करोड़ बताई जा रही है। इस समय राज्य में कुल 2 लाख टन से अधिक मछली उत्पादन हो रहा है जिसकी कीमत लगभग 3000 करोड़ तक मानी जाती है।
साल 2020-21 के दौरान पंजाब में 41093 एकड़ में मछली उत्पादन होता था जो 2024-25 तक बढ़कर 43683 एकड़ हो गया है। इस तरह इन पांच सालों में ही राज्य में मछली पालन के तहत लगभग 2590 एकड़ का इजाफा हुआ है। इसी तरह और भी कई किसान हैं जिनके द्वारा छोटे से बड़े स्तर तक मछली उत्पादन का काम किया जा रहा है।
किसानों के लिए अच्छी आय का साधन
मछली पालन किसानों के लिए अच्छी आय का साधन है। आमतौर पर बहुत से किसान ऐसी जमीनों पर मछली पालन का काम करते हैं जो खेती योग्य नहीं हैं। इस कारण अतिरिक्त भूमि को आसानी से उपयोग में लाया जा सकता है। जो किसान प्राकृतिक पानी वाली झीलों या तालाबों में मछली पालन का काम कर रहे हैं, वे प्रति हैक्टेयर डेढ़ से दो लाख रुपये की कमाई करते हैं। इसके साथ ही मछली की किस्म भी किसानों की आय में कमी या बढ़ौतरी का कारण बनती है। कार्प किस्म आमतौर पर 130 से 150 रुपए प्रति किलो तक बिकती है जबकि कैटफिश बोनलेस होने के कारण 600 से 700 रुपए प्रति किलो तक की कीमत पर भी बिक जाती है। पंजाब में अभी इस किस्म की ओर किसानों का रुझान कम है। दूसरी ओर, पंजाब में मछली उत्पादन की औसत 8 टन प्रति हैक्टेयर है जबकि पूरे देश की बात करें तो औसतन 3 टन प्रति हैक्टेयर उत्पादन होता है।
आने वाले समय में और भी बढ़ेगा उत्पादन
सरकार द्वारा मछली पालन के व्यवसाय को और प्रोत्साहित करने के लिए कई नई योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसके तहत सरकार द्वारा करीब 833.34 लाख का बजट अलग रखा गया है। पंजाब के मछली पालन विभाग द्वारा हर साल मछली पालन करने वाले किसानों को सबसिडी पर मछली का पूंग (मछली के बच्चे) उपलब्ध करवाया जा रहा है।
सरकार ने राज्य में विभिन्न गांवों में 1100 ऐसे तालाबों की भी पहचान की है जो विभिन्न पंचायतों के अधीन हैं और वहां भी मछली पालन का काम आसानी से किया जा सकता है। इसी तरह इस व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा और भी कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है जिसके बदौलत यह व्यवसाय आने वाले दिनों में और भी फल-फूल सकता है।

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