Buland kesari/कनाडा में जालंधर की रहने वाली यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की 3 मार्च को हुई हत्या के बाद लगातार खालिस्तान समर्थकों द्वारा अटैक करने के वीडियो सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में कनाडा के ब्रैम्पटन का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें खालिस्तानी युवक एक हिंदू को पीट रहे हैं।
हिंदू को धक्का देकर खालिस्तानी युवक गिरा देते हैं और उसे गालियां देते हैं। पीड़ित की पहचान यशदीप शिंदे के रूप में हुई है। जबकि, युवक को पीटने वाला जोधवीर धालीवाल है। जोधवीर धालीवाल युवक को ब्राह्मण कहकर गाली देता है।
उसे कहता है कि यहां से भाग जा। वहां जाकर मूत्र पी। इसके बाद युवक को धक्का मारकर रोड पर गिराया जाता है। फिर आरोपी कहता है कि आया अब तुझे मजा? पता चल गया न कि मूत्र पीकर सेहत नहीं बनती। तुम मूत्र पीने के ही काबिल हो।
यह मामला कोरोना काल के दौरान का है। घटना उस समय घटी जब कनाडा में रह रहे हिंदू वैक्सीन के संबंध में PM नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करने के लिए कार रैली निकाल रहे थे। इस रैली का खालिस्तानियों ने विरोध किया और झंडे लेकर रोड पर आ गए।
खालिस्तानियों ने हिंदू और कनाडा की कम्युनिटी को रैली निकालने से रोका, हाथापाई की और गालियां दीं। इसमें जोधवीर की पत्नी मनजोत धालीवाल भी शामिल हुई और उसने भी गालियां दीं। जोधवीर के खिलाफ कनाडा पुलिस ने केस दर्ज किया था।

जानें ब्रैम्पटन में हुई इस झड़प के मुख्य कारण…
कनाडा में मार्च 2021 में भारतीय समुदाय के लोगों ने कार रैली का आयोजन किया। इसका मकसद भारत की कोविड में कनाडा की मदद करने पर आभार जताना था। भारत ने कनाडा को 20 लाख कोविड वैक्सीन भेजी थीं। इस रैली को फ्रैंडशिप कार रैली नाम दिया गया। इस रैली से खालिस्तानी चिढ़ गए और रैली का विरोधी करना शुरू कर दिया।
मुख्य आरोपी जोधवीर धालीवाल ने रैली में शामिल यशदीप शिंदे की कार से तिरंगा झंडा जबरन छीन लिया और उस पर थूकने व अपमानजनक टिप्पणी करने की कोशिश की, जिससे स्थिति हिंसक झड़प में बदल गई।
झड़प के दौरान हमलावरों ने गो एंड ड्रिंक यूरिन (जाओ और मूत्र पीयो) जैसी हिंदूफोबिक और अपमानजनक गालियां दीं, जिससे यह सामान्य झगड़े के बजाय दो समुदायों के बीच वैचारिक और धार्मिक टकराव बन गया। कनाडा की पुलिस दोनों पक्षों में झड़प को नहीं रोक पाई।
पीड़ित शिंदे ने बताई 3 अहम बातें…
- राजनीतिक दबाव में नहीं मिल पाया इंसाफ: शिंदे ने घटना पर दुख जताते हुए कहा- मुझे अब लगता है कि न्याय बिल्कुल नहीं हो रहा है। उन्होंने इस बात पर हैरानी और शक जताया कि आरोपी जोधवीर धालीवाल के राजनीतिक संबंधों के कारण पुलिस ने गंभीर आरोप हटा लिए।
- वकील ने भी अपनी मर्जी से केस वापस ले लिया: शिंदे ने आरोप लगाया कि क्राउन प्रॉसीक्यूटर (सरकारी वकील) ने केस वापस लेने से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली। उन्हें अपनी ही शिकायत पर हुई कानूनी कार्रवाई की जानकारी खुद पुलिस या कोर्ट से नहीं, बल्कि अखबारों से मिली, जिससे वह बहुत दुखी हुए।
- बांह तोड़ दी गई, फिर भी कार्रवाई नहीं: शिंदे का कहना था कि हमले में उनकी बांह टूट गई, लेकिन कोर्ट में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उसे फ्रैक्चर न मानकर केस को हल्का कर दिया गया। उन्होंने कहा कि धालीवाल द्वारा दी गई हिंदूफोबिक गालियों और झंडे के अपमान पर भी कोर्ट ने कोई कार्रवाई नहीं की।

जानें आरोपी जोधवीर धालीवाल ने क्या कहा…
ब्राह्मणो जाओ और मूत्र पीयो: धालीवाल का हमले का वीडियो वायरल हुआ। इसमें वह पीड़ित यशदीप शिंदे को धक्का देने के बाद चिल्लाया और कहा कि ब्राह्मणो जाओ और मूत्र पी लो। इससे तुम्हें ताकत नहीं मिलेगी। यह बयान सीधे तौर पर हिंदू आस्थाओं का अपमान करने और हिंदूफोबिया फैलाने के आरोपों का आधार बना।
रैली निकालकर हिंदुओं ने हमें उकसाया: धालीवाल और उसके साथियों ने तर्क दिया कि यह रैली प्रो-मोदी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में खालिस्तानियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के वक्त मैत्री रैली निकालकर उन्हें उकसाया गया। उसने भारतीय झंडे को छीनकर विचारधारा और भारत सरकार के प्रति गुस्से का इजहार किया था।
कोर्ट में कहा- मैंने कोई अपराध नहीं किया: जब इस मामले में कोर्ट में सुनवाई हुई, तो धालीवाल ने किसी भी आपराधिक जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया। उसने कोर्ट के सामने खुद को निर्दोष बताते हुए केवल एंगर मैनेजमेंट यानी गुस्से पर काबू पाने की काउंसलिंग की शर्त मानी, ताकि उस पर से हमले के गंभीर आरोप हट जाएं।

पुलिस व कोर्ट की कार्रवाई 3 पाइंट में जानें…
आरोपी को गिरफ्तार कर मारपीट की धाराएं लगाईं: ब्रैम्पटन पुलिस ने वीडियो सबूत के आधार पर आरोपी जोधवीर धालीवाल को गिरफ्तार किया और उस पर जानलेवा हमले में केस दर्ज किया। आरोपी पर क्रिमिनल धाराएं लगाईं। दूसरे आरोपी जसकरण सिंह पर भी अलग से हमले का केस बनाया गया।
सरकारी वकील ने केस वापस लिया: गिरफ्तारी के कुछ महीनों बाद सरकारी वकील ने अचानक धालीवाल पर लगे आरोपों को वापस ले लिया। इसका आधार यह बताया गया कि आरोपी ने एंगर मैनेजमेंट की काउंसलिंग पूरी कर ली है और मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ित की हड्डी टूटने की पुष्टि नहीं हुई।
कोर्ट ने एक साल का पीस बॉन्ड लगाया: कोर्ट ने आरोपी पर केवल एक साल का पीस बॉन्ड लगाया, जिसके तहत उसे पीड़ित यशदीप शिंदे से दूर रहने का आदेश दिया गया। धालीवाल ने किसी भी आपराधिक जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण पीड़ित ने इसे अधूरा न्याय और राजनीतिक दबाव का परिणाम बताया।

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