अस्पताल की गाड़ियां सड़क पर, जनता परेशान—नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस आखिर किसका इंतजार कर रही है?
Buland Kesari/ जालंधर: शहर के पॉश इलाके जेपी नगर में अग्रवाल अस्पताल की सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों ने पार्किंग व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन की पोल खोल दी है। तस्वीर देखकर साफ नजर आता है कि अग्रवाल लिवर एंड गट सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के आसपास अस्पताल आने वाले वाहनों और एंबुलेंस के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था का सवाल गंभीर बना हुआ है। अस्पताल के पास स्वामी संत दास स्कूल, बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज ।
सवाल यह है कि अगर अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार आते हैं तो उनके वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था कहां है? तस्वीर में अस्पताल की एंबुलेंस के साथ सड़क पर दोपहिया और अन्य वाहन खड़े दिखाई दे रहे हैं। इससे मुख्य मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होने और किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस को रास्ता मिलने में दिक्कत की आशंका पैदा होती है।
नगर निगम की नजर में क्या सड़कें पार्किंग स्थल हैं?
सबसे बड़ा सवाल नगर निगम प्रशासन से है। शहर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर योजनाएं और दावे तो खूब होते हैं, लेकिन जेपी नगर जैसे इलाके में अगर किसी बड़े अस्पताल के बाहर सड़कें ही पार्किंग स्थल बन जाएं तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा?
अगर अस्पताल की अपनी पार्किंग क्षमता पर्याप्त नहीं है तो नगर निगम को मौके का निरीक्षण कर यातायात और पार्किंग की वैकल्पिक व्यवस्था पर कार्रवाई करनी चाहिए, न कि आम जनता को सड़क पर खड़े वाहनों के बीच से निकलने के लिए मजबूर होना चाहिए।
ट्रैफिक पुलिस भी दे जवाब
वहीं ट्रैफिक पुलिस के लिए भी यह तस्वीर किसी आईने से कम नहीं। सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहनों पर कार्रवाई के लिए क्या नियम केवल आम दुकानदार और आम वाहन चालक के लिए हैं?
क्या अस्पताल के बाहर सड़क पर पार्किंग के खिलाफ नियमित चेकिंग होती है?
क्या नो-पार्किंग क्षेत्र की पहचान और निगरानी की जा रही है?
क्या अस्पताल प्रबंधन को अपने मरीजों और स्टाफ के वाहनों के लिए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं?
ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस दोनों को देना चाहिए।
सबसे संवेदनशील मामला—एंबुलेंस का
मामला सिर्फ ट्रैफिक जाम का नहीं है। यह अस्पताल का इलाका है। यहां कभी भी किसी मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में सड़क पर बेतरतीब पार्किंग आपातकालीन आवाजाही के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
सीधा स्वाल —अगर सड़क ही पार्किंग बनती रही तो फिर सड़क आम जनता के लिए है या अस्पताल की पार्किंग के लिए?
नगर निगम प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को तस्वीरों के आधार पर मौके का निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो कार्रवाई करनी चाहिए।

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