Buland Kesari/ जालंधर शहर अब अवैध होर्डिंग्स के काले साए में घिर चुका है। हर प्रमुख चौक-चौराहे, बिजली और ट्रैफिक लाइट के खंभे प्राइवेट कंपनियों के होर्डिंग्स से लबालब भर चुके हैं। ये अवैध होर्डिंग्स न केवल शहर की सूरत बिगाड़ रही हैं बल्कि यातायात और सुरक्षा के लिए भी बड़ी समस्या बन चुकी हैं।
आश्चर्य की बात यह है कि नगर निगम के वही कर्मचारी जो इस स्थिति को ठीक कर सकते थे, वे इन अवैध होर्डिंग्स को देख नहीं रहे बल्कि खुलेआम इस अवैध कारोबार में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, निगम के कुछ कर्मचारी प्राइवेट कंपनियों से मोटी रकम लेकर इस अवैध कब्जे का संरक्षण कर रहे हैं।
उन्होंने शहर के हर इलाके में यह पैक्ट बना रखा है कि कोई भी अवैध होर्डिंग निगम की नाक के नीचे से नहीं हटेगा। इस भ्रष्ट प्रणाली की वजह से नगर निगम का राजस्व तो बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, मगर इससे भी बड़ा खामियाजा उठानी पड़ रही है जनसाधारण को।
जनता को दिन-रात खराब ट्रैफिक, दृश्य प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी खतरे झेलने पड़ रहे हैं, जबकि निकाय प्रशासन पूरी तरह से असहाय और नालायक साबित हो रहा है। यह गंभीर विषय अब नगर निगम के लिए शर्म की बात है। साफ़ तौर पर देखा जाए तो निगम प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार ने शहर को इस हालत तक पहुंचा दिया है। अगर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या और बढ़ती जाएगी और जालंधर की नागरिक सुविधा प्रभावित होती रहेगी।
आम जनता की मांग है कि नगर निगम अधिकारी और मेयर इस मामले में तुरंत कड़ा एक्शन लें, अवैध होर्डिंग्स हटाएं और अपने अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करें। नहीं तो आने वाले समय में नगर निगम के प्रति अविश्वास और गुस्सा बढ़ने के साथ ही जनता भी सड़कों पर उतर सकती है।
क्या नगर निगम भ्रष्टाचार के अंधकार से बाहर आ पाएगा या जालंधर की सूरत इसी अवैध होर्डिंग्स के कंकाल बनती रहेगी? जवाब का इंतजार अब सबको है।

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