Buland kesari/जालंधर के वार्ड नंबर 26 के निवासी पिछले 3 सालों से पीने के साफ पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं का आरोप है कि उनके घरों में आने वाला सप्लाई का पानी बेहद गंदा, बदबूदार और रेत (रेता) से भरा होता है।
हालत यह है कि ब्रश कराने और पीने के लिए लोगों को बाजार से मोल का पानी खरीदना पड़ रहा है। चुनाव के समय हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले नेता और पार्षद अब फोन तक उठाने को तैयार नहीं हैं, जिससे लोगों में आक्रोश है।
3 सालों से नलों से टपक रहा है ‘ज़हर’
स्थानीय महिला रजनी और अन्य निवासियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बोतलों में भरा गंदा पानी दिखाया। उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल से पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है। पानी में इतनी ज्यादा रेत और मिट्टी आती है कि वह पीने लायक तो दूर, कपड़े धोने या नहाने के काम भी नहीं आ रहा।
लोगों का कहना है कि दोपहर के समय पानी से बेहद गंदी बदबू आती है। अगर पानी को थोड़ी देर बाल्टी या टंकी में रख भी दिया जाए, तो नीचे सिर्फ रेत की मोटी परत जम जाती है। इस गंदे पानी को पीने की वजह से इलाके के बच्चों और बुजुर्गों के पेट खराब हो रहे हैं और लोग लगातार बीमारियों का शिकार बन रहे हैं।
ब्रश करने तक के लिए खरीदना पड़ रहा फिल्टर पानी
स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि सुबह बच्चों को ब्रश कराने के लिए भी घरों में साफ पानी उपलब्ध नहीं है। लोग फिल्टर वाले पानी के गिलास और बोतलें बाजार से खरीदकर ला रहे हैं। घर के रोजमर्रा के कामों और खाना पकाने के लिए भी लोगों को जेब ढीली कर हर दिन मोल का पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनका बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
चुनाव जीतने के बाद मुंह मोड़ा
स्थानीय लोगों ने नेताओं और स्थानीय पार्षद पर तीखा हमला बोला है। निवासियों का कहना है कि जब चुनाव (इलेक्शन) का समय होता है, तो यही नेता हाथ जोड़कर आते हैं और खुद को ‘अपना परिवार’ बताते हैं। लेकिन आज जब यह परिवार पिछले तीन सालों से गंदे पानी की समस्या से तड़प रहा है, तो कोई सुध लेने नहीं आया।

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