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लुधियाना सफारी में डेढ़ साल बाद टाइगर्स की दहाड़:नागपुर से पहुंचा ‘बादल-बिजली’ का जोड़ा, 21 दिन क्वारेंटाइन के बाद लोग देख सकेंगे

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भारत के इस राज्य के CM और डिप्टी CM पर चलीं गोलियां!

Buland Kesari/ जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में स्थित...

Buland kesari/लुधियाना जू बनी टाइगर सफारी में डेढ़ साल बाद एक बार फिर से बंगाल टाइगर्स की दहाड़ सुनाई देगी। लुधियाना टाइगर सफारी में महाराष्ट्र के नागपुर स्थित गोरेवाड़ा जूलॉजिकल पार्क से रॉयल बंगाल टाइगर का एक जोड़ा लाया गया।नागपुर से रायल बंगाल टाइगर्स का जो जोड़ा लाया गया है उसमें नर टाइगर का नाम बादल और मादा का नाम बिजली है। दिसंबर 2024 में टाइगर की मौत के बाद से लुधियाना जू में टाइगर सफारी बंद है।

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वन विभाग काफी समय से टाइगर सफारी के लिए टाइगर्स की डिमांड कर रहा था। डेढ़ साल बाद विभाग को टाइगर्स का एक जोड़ा मिला है। दोनों को 21 दिन तक क्वारंटाइन रखा जाएगा और जब वो यहां के माहौल को अडॉप्ट कर लेंगे तब उन्हें टाइगर सफारी में छोड़ दिया जाएगा।

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वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इनकी उम्र और फुर्ती पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होगी। पंजाब के मुख्य वन्यजीव वार्डन बसंत राज कुमार (IFS), वन संरक्षक विशाल चौहान (IFS) और DFO विक्रम सिंह कुंद्रा (IFS) की देखरेख में इस जोड़े को सुरक्षित लुधियाना लाया गया है।

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रायल बंगाल टाइगर बादल
रायल बंगाल टाइगर बादल

तेंदुओं के बाद अब टाइगर की बारी

चिड़ियाघर प्रशासन पिछले कुछ समय से यहाँ जानवरों का कुनबा बढ़ाने में जुटा है। गौरतलब है कि पिछले साल ही चिड़ियाघर में तेंदुओं (Leopards) की एक जोड़ी लाई गई थी। अब बाघों के आने से लुधियाना का यह वाइल्डलाइफ पार्क में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ जाएगी।

बेहद खास हैं ‘बादल’ और ‘बिजली’, जानिए इनकी खूबियां

  • वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रॉयल बंगाल टाइगर अपनी ताकत और खूबसूरती के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। लुधियाना पहुंचे बादल और बिजली की अपनी कई विशेषताएं हैं। इनके शरीर पर मौजूद काली पट्टियां बिल्कुल इंसान के फिंगरप्रिंट की तरह होती हैं; यानी दुनिया में किन्हीं भी दो बाघों की धारियां एक जैसी नहीं हो सकतीं।ं ताकत के मामले में ये बिल्ली प्रजाति के सबसे बड़े जानवर हैं, जिनका वजन 250 किलो तक हो सकता है। अक्सर माना जाता है कि बिल्लियाँ पानी से डरती हैं, लेकिन टाइगर इसके उलट बेहतरीन तैराक होते हैं। इनकी दहाड़ इतनी जोरदार होती है कि यह 3 किलोमीटर दूर तक सुनी जा सकती है।
रायल बंगाल टाइगर बिजली।
रायल बंगाल टाइगर बिजली।

21 दिन की ‘निगरानी’, फिर दीदार

बादल और बिजली को अभी सीधे सफारी में नहीं छोड़ा गया है। नियमों के मुताबिक, उन्हें 21 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा जाएगा। इस दौरान डॉक्टर यह देखेंगे कि वे पंजाब के पानी और माहौल में कितना ढल रहे हैं। जून की शुरुआत में इन्हें सफारी के खुले जंगल में छोड़ा जाएगा, जहाँ पर्यटक बंद गाड़ियों में बैठकर इनका दीदार कर सकेंगे।

गर्मी का टॉर्चर: कूलर और स्प्रिंकलर तैनात

लुधियाना की भीषण गर्मी को देखते हुए बाघों के बाड़े में विशेष इंतजाम किए गए हैं। बाड़ों में बड़े कूलर लगाए गए हैं और पानी का छिड़काव करने के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम चालू किया गया है। बाड़े के अंदर बने तालाबों में 24 घंटे ताजे पानी की व्यवस्था की गई है ताकि ‘बादल-बिजली’ जब चाहें तैराकी कर सकें और उन्हें गर्मी से राहत मिले।

लुधियाना जू में तेंदुए का जोड़ा।
लुधियाना जू में तेंदुए का जोड़ा।

लुधियाना जू में तेंदुओं के जोड़े स्नेहा व नीतू के लिए किए गए प्रबंध, जानिए…

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  • पानी में ग्लूकोज दे रहे: लुधियाना जू में नर तेंदुआ का नाम नीतू और मादा का नाम स्नेहा है। दोनों को 2024 में शिमला से लाया गया था। टैंपरेचर 35-37 डिग्री सेल्सिस पहुंचने के बाद तेंदुओं को डिहाइडेशन होने की संभवना रहती है। ऐसे में लुधियाना जू प्रशासन ने तेंदुओं के पानी में ग्लूकोज मिलाना शुरू कर दिया। तेंदुओं के बाड़े में अंदर और बाहर जो पानी रखा गया है उसमें ग्लूकोज मिलाया गया है।
  • कूलर की व्यवस्था: तेंदुओं को दिन व रात के समय जिन बाड़ों(कमरों) में रखा जाता है उनमें कूलर फिट कर दिए गए हैं। जब तेंदुओं को कमरों में बंद किया जाता है तो कूलर चलाकर छोड़ दिए जाते हैं ताकि उन्हें गर्मी न लगे।
  • दिन में नहीं निकाल रहे बाहर: लुधियाना जू के इंचार्ज नरिंदर सिंह ने बताया कि तेंदुओं को दिन में बाहर नहीं निकाल रहे। उन्होंने बताया कि 10:30 से 11 बजे के बीच में उन्हें अंदर कर दिया जाता है और उसके बाद शाम को चार से पांच बजे तक बाहर रखा जाता है। फिर उन्हें अंदर कर दिया जाता है।
  • डाइट में चिकन बढ़ाया: तापमान बढ़ने के कारण तेंदुओं को बकरे का मीट अब सप्ताह में दो दिन दिया जा रहा है। बकरे का मीट गर्म होता है इसलिए उसकी जगह अब चिकन दे रहे हैं। एक तेंदुआ रोज का चार से पांच किलोग्राम चिकन खाता है। इन्हें भैंसे का मीट नहीं दिया जा रहा है। इन्हें शिमला से लाया गया है वहां पर जो डाइट चल रही थी वही कंटीन्यू की है।
  • इंस्ट्रक्टर लगातार रख रहा नजर: नरिंदर सिंह ने बताया कि तेंदुओं को शिमला से लाए हैं। ये ठंडे मौसम में पैदा हुए हैं। इसलिए पिछले साल भी और इस साल भी गर्मी में इन पर एक इंस्ट्रक्टर लगातार नजर रखता है। अगर इन्हें थोड़ा भी गर्मी महसूस होती है तो तुरंत इनके लिए पानी छोड़ दिया जाता है।
  • ओपन बाड़े में छोड़ देते हैं पानी: उन्होंने बताया कि तेंदुओं को जब अंदर बंद करते हैं तो उनके ओपन बाडे़ में पानी छोड़ देते हैं ताकि मिट्‌टी व घास से हीट न आए और शाम के बाद वहां ठंडा रहे।

 

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