तेहरान: इजरायल और अमेरिका के हमले के बाद ईरान ने जो जवाबी कार्रवाईयां की हैं, उनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करना शामिल है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित है। भारत के जहाज भी इस रास्ते के बंद होने से समुद्र में खड़े हैं। हालांकि ईरान ने अमेरिकी हमले की कड़ी आलोचना करने वाले रूस-चीन जैसे कुछ देशों के जहाजों को छूट दी है। इसने क्षेत्र में शैडो फ्लीट (छद्म बेड़े) के लिए एक रास्ता खोल दिया है। चीन के झंडे वाले शैडो फ्लीट कथित तौर पर धड़ाधड़ यहां से गुजर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शैडो फ्लीट का चलन बढ़ा है। खासतौर से चीन के झंडे का इस्तेमाल कई जहाज कर रहे हैं। मालिकाना हक के बारे में अस्पष्टता, बीमा कवर की कमी, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाज से जहाज पर सामान ट्रांसफर, गलत लोकेशन डेटा और कम निगरानी वाले देशों के झंडों के साथ शैडो फ्लीट काम करता है। आइए जानते हैं कि कैसे लोकेशन जाटा और नकली झंडे का इस्तेमाल किया जाता है।
जहाज की राष्ट्रीयता की पहचान
जहाज पर किस देश का अधिकार क्षेत्र (कानूनी नियंत्रण) पूरी तरह से कानून का मामला नहीं है। जिस देश का झंडा लगाकर जहाज समुद्र में चलता है। वह देश जहाज के संचालन या गतिविधियों के लिए सीधेतौर पर जिम्मेदार नहीं होता। जहाज का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) एक तरह का कमर्शियल लेन-देन है, जो कानून का पालन करने वाली कंपनियों के लिए एक व्यावसायिक निर्णय बन जाता है।
कई कंपनियां नियमों से बचने के तरीके निकाल लेती हैं। इसे ऐसे समझिए कि दुबई में किसी शेल कंपनी के मालिकाना हक वाला जहाज कैमरून, पलाऊ, लाइबेरिया या जमीन से घिरे मंगोलिया के झंडे के नीचे चल सकता है। अक्सर झंडा ऐसे देश का चुना जाता है, जिसके पास जहाजों की जांच के लिए संसाधन कम हों। जांच का खतरा हो तो जहाज किसी दूसरे झंडे के नीचे भी रजिस्टर हो सकता है।

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