Buland kesari/जालंधर पर भी ईरान-इजराइल युद्ध का असर दिखना शुरू हो गया है। सिलेंडर लेने आई एक महिला ने बताया कि एक ही सिलेंडर है। सुबह अचानक खत्म हो गया जिससे बच्चे भूखे हैं। वहीं एक महिला ऑटो में 3 सिलेंडर लादकर लाई। पूछा को कहा कि प्राइवेट अस्पताल की कैंटीन चला रही हूं। सिलेंडर खत्म होने से बंद कर दी।
सिलेंडर न मिले को काम चलाना मुश्किल हो जाएगा। अस्पताल के अंदर लकड़ी भी नहीं जला सकते। अब कुछ और सोचना होगा। ये कहते ही महिला के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच जाती हैं और वो सोच में पड़ जाती है। वहीं गैस सप्लाई प्रभावित होने के बाद अचानक से बाजार में इंडक्शन की मांग बढ़ गई है।
दुकानदारों ने बताया कि सिलेंडर क्राइसिस के बाद अचानक से इंडक्शन खरीदने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। शहर में डेली की 500 से 600 तक इंडेक्शन की मांग पहुंच गई है। कॉपर महंगा होने से इंडक्शन के रेट 2500 रुपए से 3600 रुपए तक पहुंच गए हैं। डिमांड इतनी है कि पूरी नहीं हो रही। जालंधर की होलसेल इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रानिक मार्केट फगवाड़ा गेट में पहुंचने वाला हर दूसरा कस्टमर इंडेक्शन की मांग कर रहा है।

दुकानदार बोले-कम ही पीस दुकान में रखते है
दुकानदारों ने कहा कि पंजाब में बिजली महंगी होने से यहां शुरू से इंडक्शन का ट्रेंड नहीं रहा है, इसलिए वह कुछ पीस इंडक्शन ही लाकर रखते थे। गर्मियों में तो बिलकुल नहीं रखते क्योंकि इसकी मांग नहीं होती। सिलेंडर न मिलने से लोग पैनिक हैं, जिससे इमरजेंसी के लिए इंडक्शन खरीदकर रख रहे हैं।
सबसे ज्यादा जिस इंडक्शन की मांग है, उसमें सभी बर्तन पर काम करने वाला इंडक्शन बेस शामिल है। लोगों का कहना है कि ऐसा इंडक्शन चाहिए जिस पर सभी तरह के बर्तन चल सकें। अकेले नॉनस्टिक बर्तन वाले इंडक्शन की डिमांड कम है।
जानें इंडक्शन की बढ़ी मांग पर क्या बोले दुकानदार…

- हर 5 मिनट में इलेक्ट्रिकल चूल्हा खरीदने वाला आ रहा- फगवाड़ा गेट में इेक्ट्रिकल के शॉपकीपर टीएस बेदी ने बताया कि वह फगवाड़ा गेट डीलर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी भी हैं। सिलेंडर को लेकर चल रहे क्राइसेस सहित अन्य मुद्दों पर पिछले 4-5 दिनों से नजर है। गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण इंडक्शन और इन्फ्रारेड चूल्हों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। आलम यह है कि हर 5-10 मिनट में ग्राहक इसकी पूछताछ के लिए आ रहे हैं। इस अचानक बढ़ी मांग की वजह से कंपनियों के पास स्टॉक लगभग खत्म हो गया है। लोग इन्फ्रारेड चूल्हों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि उन पर हर तरह के बर्तन इस्तेमाल किए जा सकते हैं। सरकार भले ही किल्लत से इनकार करे, लेकिन हकीकत में लोगों को 25-25 दिनों तक सिलेंडर की बुकिंग नहीं मिल रही, जिससे घबराकर वे बिजली वाले चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं।

- स्टॉक कम होने से रेट 1200 रुपए तक बढ़े – फगवाड़ा गेट में इलेक्ट्रिकल की दुकान चलाने वालीं सोनिका ने बताया कि आजकल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत और डिलीवरी में 25-30 दिनों की देरी के कारण इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है। जो इंडक्शन पहले 2400 का था, वह अब 3600 रुपए तक पहुच गया है। स्टॉक कम होने से पीछे से ही रेट 1200 तक बढ़ गए हैं। ग्राहक अब इन्फ्रारेड चूल्हे ज्यादा मांग रहे हैं ताकि उन्हें अलग से बर्तन न खरीदने पड़ें और पुराने बर्तनों से ही काम चल जाए।

- 90 फीसदी ग्राहक इंडक्शन मांग रहे- दुकानदार करण बेदी ने कहा कि आजकल गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण करीब 90 फीसदी ग्राहक इंडक्शन या इलेक्ट्रिक चूल्हों की मांग कर रहे हैं, जिसमें लोग अब साधारण इंडक्शन के बजाय ऐसे मॉडल ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिन पर सभी तरह के बर्तन चल सकें। तांबे और अन्य कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आने के कारण इंडक्शन और पंखों की लागत काफी बढ़ गई है, जिसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है। यह स्टॉक और सप्लाई चेन की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में इसी तरह के हालात बने हुए हैं।

सिलेंडर नहीं मिल रहा घर में बच्चे भूखे हैं बस्ती एरिया की गैस एजेंसी पर सिलेंडर लेने पहुंची प्रवासी महिला मोना ने बताया उसके पास एक ही सिलेंडर है। कल से ये भी खत्म हो गया। शुक्रवार को वह सिलेंडर बुक करवाने के लिए पहुंची लेकिन गैस एजेंसी बंद मिली।
महिला ने बताया कि गैस खत्म होने की वजह से घर में खाना नहीं बन पाया है। वह खुद और उसके बच्चे भूखे हैं। अब गैस एजेंसी मालिक दफ्तर खोलेगा और सिलेंडर बुक करवाएगा तब जाकर घर में खाना पक पाएगा।

कैंटीन बंद हो गई, एक सिलेंडर बचा, कोई ब्लैक में ही दिला दे कोहली गैस एजेंसी के बाहर ऑटो में पहुंची पूजा नामक एक महिला ने बताया कि उसे सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। जब उससे पूछा गया कि लोगों को एक सिलेंडर बुक कराने में दिक्कत आ रही है और तुम 2 घरेलू और 1 कॉमर्शियल सिलेंडर लेकर जा आई हो, इसे कैस बुक करवाएंगी।
इस पर महिला ने कहा कि वह जालंधर के एक प्राइवेट अस्पताल में कैंटीन चलाती है। तीनों सिलेंडर खत्म हो गए। 2 सिलेंडर कॉपी पर हैं और एक ब्लैक। पहले ब्लैक में मिल जाते थे अब तो वो भी नहीं मिल रहे। उसकी कैंटीन बंद हो गई है। अब एक सिलेंडर बचा है, इससे घर चलाउं या कैंटीन। मुझे तो सिलेंडर चाहिए, कोई ब्लैक में ही दिला दो।

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